तस्वीर में आपको एक मुर्दा जिस्म नजर आ रहा होगा।
हुआ कुछ यूं है की अचानक बारिश शुरू हो जाती है और मय्यत के , घर वाले रिश्तेदार, वगैरा इस मुर्दा जिस्म (मय्यत) को प्लास्टिक में ढांप लेते है, और तमाम लोग अपने कमरों में पनाह ले लेते है,
ये मेरी और आपकी कहानी है, हमारे होने और न होने से सिर्फ इतना फर्क पड़ता है, आप सोचे के मरने के बाद कोई आपके लिए बारिश में भीगने को तैयार नहीं, इस बारिश मे अपनी कीमती चीजें (कपड़े वगैरा) खराब करना नही चाहता,
सोचने की बात है की हम दुनिया दारी और इन रिश्तों को निभाने के लिए अपने रब को सारी उम्र नाराज करते फिरते हैं, और अखिरत में हमारी हैसियत ?
मोहसिन पत्रकार सहारनपुर

















Leave a Reply