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अंबेडकरनगर : जिला जेल में बंद पूर्व शिवसेना विधायक पवन पांडेय व 12 अन्य लोगों पर अकबरपुर कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा कायम।

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अंबेडकरनगर। जिला जेल में बंद पूर्व शिवसेना विधायक पवन पांडेय व 12 अन्य लोगों पर अकबरपुर कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा कायम किया है। बीते दिनों ही पवन को इलाज के लिए कोर्ट से पेरोल पर छूटे थे।लाखों की भूमि के रुपये हड़पने से जुड़े विवाद के सिलसिले में अकबरपुर के महमदपुर निवासी पूर्व विधायक पवन पांडेय को गत दिनों एसटीएफ लखनऊ ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।दरअसल अकबरपुर कोतवाली में भूमि धोखाधड़ी से जुड़ा एक मुकदमा कायम हुआ था। इस मामले की जांच पहले सिविल पुलिस ने की। फिर हाईकोर्ट ने इसे एसटीएफ को सौंप दिया। एसटीएफ ने जांच की कमान संभालते ही एक-एक कर आरोपियों को जेल भेजना शुरू किया।अब इस बहुचर्चित मामले को लेकर पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पूर्व विधायक माफिया सरगना पवन व अन्य पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की अनुमति प्रदान कर दी।इसी के बाद अब अकबरपुर कोतवाल बीरेंद्र बहादुर सिंह की तहरीर पर पूर्व विधायक पवन, जौनपुर जनपद के खेतासराय निवासी मुकेश, टांडा के बिहरोजपुर निवासी गोविंद यादव, इब्राहिमपुर के बूढ़नपुर निवासी दीप नरायन शर्मा, आजमगढ़ जनपद के अतरौलिया के भवानीपुर की निवासी नीतू सिंह, अकबरपुर के नासिरपुर बरवा निवासी शीला सिंह, इसी गांव की रेखा सिंह, अकबरपुर के मीरपुर निवासी अभिषेक तिवारी, अकबरपुर निवासी अजय कुमार, लखनऊ के अलीगंज निवासी संतोष मिश्र, लखनऊ के बक्शी का तालाब निवासी अमरेश यादव, अकबरपुर के शास्त्रीनगर निवासी जयराम यादव तथा कुर्की दाउदपुर निवासी लालबहादुर सिंह पर गैंगस्टर का मुकदमा कायम हुआ है।

अकबरपुर कोतवाल ने बताया कि पवन को गैंग लीडर के रूप में पाया गया है। गैंगस्टर का मुकदमा कायम करने के बाद इसी मामले में अब जेल से बाहर जमानत पर रिहा चल रहे करीब आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।

करोड़ों की भूमि लाखों में हड़पने का कुचक्र

पूर्व विधायक और अन्य आरोपियों के लिए जो मुकदमा मुसीबत का सबब बना है वह केस नासिरपुर बरवां निवासी चंपा देवी ने दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि उनके पति की मौत के बाद जब भूमि उनके बेटे के नाम आ गई तो उसे नशीला इंजेक्शन लगाकर करोड़ों की भूमि को लाखों रुपये में हड़पने का कुचक्र रचा गया। यह मामला काफी चर्चित रहा। जनपद पुलिस ने मौत को स्वाभाविक करार दिया था जबकि नशीला इंजेक्शन देने का कोई मामला नहीं पाया था। बाद में जब एसटीएफ ने जांच सम्हाला तो नए सिरे से तथ्य एकत्र किए। इसके बाद ही गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ।

रिपोर्टर “प्रदीप शुक्ल” की रिपोर्ट

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