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बीकानेर-6 जुलाई 2024 शनिवार आज का पंचांग व राशिफल और आज गुप्त नवरात्रि की शुभकामनाओं के साथ जानें कुछ खास व विशेष बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

न्यूज रिपोर्टर नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है! शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है !पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त, चद्रोदय-चन्द्रास्त काल, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, योगकाल, करण, सूर्य-चंद्र के राशि, चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं!

आज का पंचांग

*दिनाँक:- 06/07/2024, शनिवार*
प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष,
आषाढ
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि——— प्रतिपदा 28:25:29 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र——— पुनर्वसु 28:46:47
योग———- व्याघात 26:45:49
करण——- किन्स्तुघ्न 16:21:50
करण————– बव 28:25:29
वार———————– शनिवार
माह———————— आषाढ
चन्द्र राशि—– मिथुन 22:33:24
चन्द्र राशि——————- कर्क
सूर्य राशि—————– मिथुन
रितु————————– वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर———————- क्रोधी
संवत्सर (उत्तर) —————कालयुक्त
विक्रम संवत—————- 2081
गुजराती संवत————– 2080
शक संवत——————-1946
कलि संवत—————– 5125

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:30:48
सूर्यास्त—————- 19:17:11
दिन काल————- 13:46:22
रात्री काल————- 10:14:02
चंद्रोदय—————- 05:50:00
चंद्रास्त—————- 20:01:05

लग्न—- मिथुन 20°14′ , 80°14′

सूर्य नक्षत्र—————– पुनर्वसु
चन्द्र नक्षत्र—————— पुनर्वसु
नक्षत्र पाया——————- रजत

*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*

के—- पुनर्वसु 10:12:45

को—- पुनर्वसु 16:22:04

हा—- पुनर्वसु 22:33:24

ही—- पुनर्वसु 28:46:47

*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= मिथुन 19°10, आर्द्रा 4 छ
चन्द्र=मिथुन 20°30 , पुनर्वसु 1 के
बुध =कर्क 11°53′ पुष्य 3 हो
शु क्र= मिथुन 28°05, पुनर्वसु ‘ 3 हा
मंगल=मेष 25°30 ‘ भरणी ‘ 4 लो
गुरु=वृषभ 15°30 रोहिणी , 2 वा
शनि=कुम्भ 25°10 ‘ पू o भा o ,2 सो
राहू=(व) मीन 16°50 रेवती , 1 दे
केतु=(व) कन्या 16°50 हस्त , 3 ण

*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮*

राहू काल 08:57 – 10:41 अशुभ
यम घंटा 14:07 – 15:51 अशुभ
गुली काल 05:31 – 07:14 अशुभ
अभिजित 11:56 – 12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 07:21 – 08:16 अशुभ
वर्ज्यम 16:22 – 18:01 अशुभ
प्रदोष 19:17 – 21:21 शुभ

💮चोघडिया, दिन
काल 05:31 – 07:14 अशुभ
शुभ 07:14 – 08:57 शुभ
रोग 08:57 – 10:41 अशुभ
उद्वेग 10:41 – 12:24 अशुभ
चर 12:24 – 14:07 शुभ
लाभ 14:07 – 15:51 शुभ
अमृत 15:51 – 17:34 शुभ
काल 17:34 – 19:17 अशुभ

🚩चोघडिया, रात
लाभ 19:17 – 20:34 शुभ
उद्वेग 20:34 – 21:51 अशुभ
शुभ 21:51 – 23:07 शुभ
अमृत 23:07 – 24:24* शुभ
चर 24:24* – 25:41* शुभ
रोग 25:41* – 26:58* अशुभ
काल 26:58* – 28:14* अशुभ
लाभ 28:14* – 29:31* शुभ

💮होरा, दिन
शनि 05:31 – 06:40
बृहस्पति 06:40 – 07:49
मंगल 07:49 – 08:57
सूर्य 08:57 – 10:06
शुक्र 10:06 – 11:15
बुध 11:15 – 12:24
चन्द्र 12:24 – 13:33
शनि 13:33 – 14:42
बृहस्पति 14:42 – 15:51
मंगल 15:51 – 16:59
सूर्य 16:59 – 18:08
शुक्र 18:08 – 19:17

🚩होरा, रात
बुध 19:17 – 20:08
चन्द्र 20:08 – 20:59
शनि 20:59 – 21:51
बृहस्पति 21:51 – 22:42
मंगल 22:42 – 23:33
सूर्य 23:33 – 24:24
शुक्र 24:24* – 25:15
बुध 25:15* – 26:07
चन्द्र 26:07* – 26:58
शनि 26:58* – 27:49
बृहस्पति 27:49* – 28:40
मंगल 28:40* – 29:31

*🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*

मिथुन > 03:18 से 05:34 तक
कर्क > 05:34 से 07:48 तक
सिंह > 07:48 से 09:58 तक
कन्या > 09:58 से 12:12 तक
तुला > 12:12 से 14: 38 तक
वृश्चिक > 14:38 से 16:42 तक
धनु > 16:42 से 18:48 तक
मकर > 18:48 से 20:36 तक
कुम्भ > 20:36 से 22:06 तक
मीन > 22:06 से 23:34 तक
मेष > 23:34 से 01:10 तक
वृषभ > 01:10 से 03:12 तक

*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

1 + 7 + 1 = 9 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

1 + 1 + 5 = 7 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

* आषाणीय गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ

*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*

अनवस्थितकार्यस्य न जने न वने सुखम् ।
जनो दहति संसर्गाद्वनं संगविवर्जनात् ।।
।। चा o नी o।।

जिस के काम करने में कोई व्यवस्था नहीं, उसे कोई सुख नहीं मिल सकता. लोगो के बीच या वन में. लोगो के मिलने से उसका ह्रदय जलता है और वन में तो कोई सुविधा होती ही नहीं.

*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*

गीता -: ज्ञानविज्ञानयोग अo-07

बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते ।,
वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ॥,

बहुत जन्मों के अंत के जन्म में तत्व ज्ञान को प्राप्त पुरुष, सब कुछ वासुदेव ही हैं- इस प्रकार मुझको भजता है, वह महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है॥,19॥,

💮🚩दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष-पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। आनंद के साथ समय व्यतीत होगा। मनपसंद व्यंजनों का लाभ मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। व्यापार मनोनुकूल लाभ देगा। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। किसी व्यक्ति से बहस हो सकती है। आशंका-कुशंका से बाधा होगी।

🐂वृष-ऐश्वर्य के साधनों पर खर्च होगा। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। शारीरिक कष्ट संभव है। भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विवेक से कार्य करें।

👫मिथुन-यात्रा लाभदायक रहेगी। राजकीय सहयोग मिलेगा। सरकारी कामों में सहूलियत होगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। घर में सुख-शांति रहेंगे। कारोबारी अनुबंध हो सकते हैं। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों से सहयोग मिलेगा। झंझटों में न पड़ें।

🦀कर्क-चोट व दुर्घटना से बड़ी हानि हो सकती है। पुराना रोग उभर सकता है। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। किसी व्यक्ति विशेष से कहासुनी हो सकती है। स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। दौड़धूप रहेगी। नकारात्मकता हावी रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।

🐅सिंह-चोट व रोग से कष्ट हो सकता है। बेचैनी रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। सत्संग का लाभ मिलेगा। राजकीय बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। परिवार तथा मित्रों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🙍‍♀️कन्या-सामाजिक कार्य करने में मन लगेगा। योजना फलीभूत होगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन हो सकता है। कारोबार मनोनुकूल लाभ देगा। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। शेयर मार्केट, म्युचुअल फंड से लाभ होगा। आय में वृद्धि होगी। मान-सम्मान मिलेगा। स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें।

⚖️तुला-यात्रा लाभदायक रहेगी। संतान पक्ष से बुरी खबर मिल सकती है। डूबी हुई रकम प्राप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। नौकरी में प्रशंसा मिलेगी। जल्दबाजी से काम बिगड़ सकते हैं। नए उपक्रम प्रारंभ करने संबंधी योजना बनेगी।

🦂वृश्चिक-दुष्टजनों से सावधानी आवश्यक है। फालतू खर्च पर नियंत्रण नहीं रहेगा। हल्की मजाक करने से बचें। अपेक्षित काम में विलंब होगा। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। अपने काम से काम रखें। लाभ के अवसर मिलेंगे। विवेक का प्रयोग करें। आय में वृद्धि होगी।

🏹धनु-बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से मनोनुकूल लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। कोई बड़ा काम होने से प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। उत्साह रहेगा।

🐊मकर-पुरानी संगी-साथियों से मुलाकात होगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। फालतू खर्च होगा। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। आत्मसम्मान बना रहेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। भाइयों का सहयोग मिलेगा। कारोबार से लाभ होगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। जल्दबाजी न करें।

🍯कुंभ-सामाजिक कार्य करने का मन लगेगा। मान-सम्मान मिलेगा। मेहनत का फल मिलेगा। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। शत्रु तथा ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधानी आवश्यक है। समय की अनुकूलता है।

🐟मीन-स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा, सावधानी रखें। बुरी खबर मिल सकती है। भागदौड़ अधिक रहेगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। मेहनत अधिक होगी। लाभ में कमी रह सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यवसाय-व्यापार मनोनुकूल चलेगा। आय बनी रहेगी।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

🙏शनिदेव जी की जय🙏

शनि देव की पूजन विधि

सर्वप्रथम शरीर की शुद्धि हेतु अंजली में जल लेकर ऐसा कहें -हे अंजली जल आप गंगाजल बन जाएँ तथा मेरे तन को पवित्र करें और फिर उसे अपने ऊपर छिड़क लें। इसके बाद गणेश जी का सुमिरन करें और उन्हें प्रणाम करें। इसके बाद दाहिनी हथेली में पान, सुपारी, अक्षत, तिल, गंगा जल, द्रव्य और फूल, विल्वपत्र और चन्दन लेकर इस प्रकार उच्चारण करें-हे शनि देव मैं कलयुग वासी हूँ,पृथ्वी लोक में मेरा वास है,मेरा अमुक नगर है,अमुक मास है,अमुक पक्ष है, अमुक तिथि और अमुक नक्षत्र है। आप मेरे समस्त कष्टों को नष्ट करें। मैं आपका संकल्प करता हूँ। इसके पश्चात् हथेली की वस्तु शनिदेव के सिंहासन पर समर्पित कर दें। इसके बाद गंगाजल या साधारण जल से शनि देव की मूर्ति को स्नान करावें। इसके पश्चात् अक्षत, तिल, विल्वपत्र, पुष्प, चन्दन तथा पुष्पांजलि श्रद्धापूर्वक समर्पित करें। ऐसा कहकर हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें,हे शनि आप सूर्य के पुत्र हैं तथा यमराज के भाई हैं, आप ही मेरे आधार हैं मैं कर्महीन हूँ,क्रियाहीन हूँ आप मेरी भक्ति को स्वीकार करें तथा मेरी भूल को क्षमा करें। आपको बारम्बार नमस्कार है। श्री शनिदेव जी की जय श्री शनिदेव जी की जय श्री शनिदेव जी की जय श्री शनिदेव जी की जय श्री शनिदेव को जय

आज से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र जानें पूजा व भोग की विधि

देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ धूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ

शनिवार 6 जुलाई 2024
आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि – आषाढ़ शुक्ल पक्ष १ शनिवार तारीख ६.७.२०२४ ई. प्रातः में ७।३७ से ९।१९ तक शुभ, दिवा १२।१५ से १।१० तक अभिजित वेला में पूजन एवं घट स्थपना करना श्रेष्ठ रहेगा

9 दिन लगाएं खास तरह का भोग

गुप्त नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 रूपों को समर्पित हैं. इस दौरान किस दिन कौनसा भोग लगाना चाहिए, इस बारे में जरूर जान लें. मां का प्रिय भोग लगाने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि देती हैं।

प्रतिपदा तिथि भोगः

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों, मिठाइयों का भोग लगाएं।

द्वितीय तिथि भोगः

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, उन्हें पंचामृत और शक्कर का भोग लगाएं।

तृतीया तिथि भोगः

गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है. मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं।

चतुर्थी तिथि भोगः

चतुर्थी तिथि को मां कूष्मांडा की पूजा करें और मालपुए का भोग लगाएं।

पंचमी तिथि भोगः

पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, उन्हें केले का भोग लगाना शुभ होता है।

षष्ठी तिथि भोगः

छठवे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं।

सप्तमी तिथि भोगः

सप्तमी के दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं।

अष्टमी तिथि भोगः

अष्टमी के दिन मां महागौरी को भोग में नारियल अर्पित करें।

नवमी तिथि भोगः

गुप्त नवरात्रि के आखिरी यानी कि नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। तिल का भोग लगाना चाहिए और ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर धरती पर आगमन करेंगी। मां दुर्गा का घोड़े पर आगमन प्राकृतिक आपदा का संकेत देता है।

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