न्यूज रिपोर्टर नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ
जीवन भर जवान दिखोगे पूर्ण भुजंगासन से जानिए योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा के साथ।
श्रीडूंगरगढ़। कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 42 वें अंक को प्रकाशित करते हुए एडवांस आसनों में स्ट्रेचिंग के लिए भुजंगासन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया।
इस आसन को 4 से 5 बार इसी तरह दोहराएं। भुजंगासन आपकी पीठ और कंधे को स्वस्थ रखने के लिए बहुत उपयोगी है।
विधि
-पूर्ण भुजंगासन का अभ्यास करने के चरण घुटनों को मोड़ें और पैरों को ऊपर उठाएं। सिर,गर्दन और कंधों को पीछे की ओर बढ़ाएं, तथा लक्ष्य रखें कि सिर पंजों या पैरों के तलवों से छुआ जाए। अंतिम स्थिति को आराम से बनाए रखें। वापस आने के लिए पैरों को नीचे लाएं और भुजंगासन में आराम करें।
अर्थ
-भुजंगासन में ‘ भुजंग ‘ का अर्थ होता हैं!साप और आसन का अर्थ होता हैं, योग मुद्रा। इस आसन को करते वक्त फन फैलाये हुऐ साप की तरह शरीर की आकृति बनती हैं, इसिलिए इसे यह नाम दिया गया हैं।
सावधानी
-भुजंगासन करते समय ध्यान दें कि आप अपनी रीढ़ की हड्डी पर जरूरत से ज्यादा दबाव ना बनाएं पोज बनाने के बाद सांस ना रोकें बल्कि लेते रहें.
अपने शरीर को प्रोपर मुद्रा में रखें कोशिश करें कि आप शरीर के किसी भी हिस्से पर सारा वजन ना डाल दें! इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें।पेट में कोई रोग या पीठ में अत्यधिक दर्द हो तो यह आसन न करें|हर्निया के रोगी को यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती स्त्रियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
लाभ
-पूर्ण भुजंगासन (पूर्ण कोबरा मुद्रा) के शारीरिक लाभ: छाती, फेफड़े, कंधे और पेट को खींचता है। पीठ और गर्दन के दर्द को दूर करने के साथ-साथ रीढ़ को लचीला और स्वस्थ रखने में मदद करता है। पेट पर दबाव पेट के अंगों और विशेष रूप से पाचन अंगों के लिए भी फायदेमंद होता है।
नोट
-कठिन योगासनों का अभ्यास सदैव अनुभवी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।
निवेदन
-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी करते हुए 42 वां अंक प्रकाशित किया।




















Leave a Reply