Advertisement

बीकानेर-ॐ के आकार का ओंकारासन जानिए चमत्कारिक लाभ योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा के साथ

न्यूज रिपोर्टर मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

ॐ के आकार का ओंकारासन जानिए चमत्कारिक लाभ योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा के साथ।

श्रीडूंगरगढ़। कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 41 वें अंक को प्रकाशित करते हुए एडवांस आसनों में संतुलन के लिए ओंकारासन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया। ओंकारासन एक जटिल योगासन है, जिसकी योग मुद्रा बनाने के शरीर का संतुलन होना जरूरी है। इस योगासन में शारीरिक मुद्रा ॐ के आकार की बनती है। इसकी ध्वनि को विभिन्न धर्मों और आस्थाओं में पवित्र माना जाता है और योग सत्रों की शुरुआत और अंत में तीन बार इसका जाप किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भौतिक सृष्टि के अस्तित्व में आने से पहले प्राकृतिक ध्वनि ओम की प्रतिध्वनि थी। इसलिए इसे ब्रह्मांड की आवाज़ कहा जाता है और यह सभी की आवाज़ है।

ओम का वैज्ञानिक अर्थ

-ओम एक पवित्र ‘मंत्र’ है। इसे एक सार्वभौमिक ध्वनि माना जाता है, जो किसी विशिष्ट धर्म या भगवान के संदर्भ के बिना सभी शब्दों का बीज है। बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार, ओम ब्रह्मांडीय ध्वनि है जिसने ब्रह्मांड के निर्माण की शुरुआत की। यह पवित्र शब्दांश केवल एक ध्वनि नहीं है, यह वास्तव में तीन हैं।ओ३म् (ॐ) या ओंकार परमात्मा, ईश्वर, उस एक के मुख से निकलने वाला पहला शब्द है जिसने इस संसार की रचना में प्राण डाले। ॐ, ओम की तीन मात्राएं है। अकार, उकार, और मकार जो प्रकृति के तीन गुणों को बताती है। ओम (या औम्) (संस्कृत: ॐ, ओम, रोमनकृत: Oṃ, ISO 15919: Ōṁ) हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म में एक पवित्र ध्वनि, शब्दांश, मंत्र और आह्वान का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रतीक है। इसका लिखित प्रतिनिधित्व हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है। हिंदी में, “ओम” नाम का अर्थ है “पवित्र शब्दांश” या “आदिम ध्वनि।” यह संस्कृत शब्द “ओम” से लिया गया है, जो तीन ध्वनियों से बना है: “अ,” “उ,” और “म।” कहा जाता है कि ये ध्वनियाँ चेतना की तीन अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं: जागना, सपने देखना और गहरी नींद।

विधि

-दंडासन में बैठकर एक पैर गर्दन के पीछे डालें अब दोनों हथेलियों को जमीन पर रखते हुए एक पैर को दुसरे हाथ की कोहनी के पास लगाते हुए रोक कर रखें शरीर हवा में दोनों हथेलियों को जमीन पर टिका कर रखते हुए। अपनी क्षमता के अनुसार करें

लाभ

-ओंकारासन के लाभ स्ट्रेच, मजबूत, लंबा दोनों हाथों पर शरीर के वजन को संतुलित करने से कलाई अग्रभाग और बाइसेप्स-ट्राइसेप्स मजबूत होते हैं जबकि कोर मजबूत होता है।

नोट

-कठिन योगासनों का अभ्यास सदैव अनुभवी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।

निवेदन

-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी करते हुए 41 वां अंक प्रकाशित किया।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!