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बीकानेर-कालवा का जीवन वाकई में प्रेरणा स्रोत 35 वें जन्मदिन पर सत्यार्थ न्यूज चैनल द्वारा विशेष न्यूज कवरेज।

न्यूज रिपोर्टर मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

कालवा का जीवन वाकई में प्रेरणा स्रोत 35 वें जन्मदिन पर सत्यार्थ न्यूज चैनल द्वारा विशेष न्यूज कवरेज।

श्रीडूंगरगढ़। कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा जिनके 35 वें जन्मदिन पर सत्यार्थ न्यूज चैनल द्वारा विशेष न्यूज कवरेज कालवा का जीवन वाकई में प्रेरणा स्रोत है। 25 जून 1989 को जन्मे उपखण्ड के धीरदेसर पुरोहितान में साधारण परिवार में दस भाई बहनों में सबसे छोटा और जब दो साल के थे तब कालवा के पिता की कार दुर्घटना में मौत हो गई थी उनकी माता जी ने ही एक छोटी सी दुकान के बल बूते पर परिवार का लालन पालन किया। ओम कालवा ने योग की दुनियां में एक अलग ही पहचान बनाई अपनी मेहनत, लगन और जज्बे से ओम कालवा ने साबित कर दिया है कि सुविधाओं का मिलना भी कोई जरुरी नहीं है। इंसान बिना सुविधा सब कुछ कर सकता है। ” ठम ठोक चले, ठम ठोक चले, पर्वत भी पैरों में रह जाता है। मानव जब जोर लगाता है तो पत्थर भी पानी बन जाता है। ” कहावत बिल्कुल सही है बस नियमित मेहनत लगन और जुनून के साथ प्रयास करते रहो। सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं। ओम कालवा बचपन से ही योग में जुनून रखते थे और पढ़ाई के साथ नियमित गांव के रेतीले धोरों पर सुबह और शाम दोनों समय पांच घण्टे कठिन योगासनों का अभ्यास करते थे धीरे धीरे योग में इतनी रूचि बढ़ती गई कि उन्होंने अपने पुरे परिवार को ही योगी बना दिया। ओम कालवा की पत्नी मंजू देवी जो योग में मास्टर डिग्री प्राप्त योग प्रशिक्षिका है उनकी बड़ी बेटी योगिता कालवा और छोटा बेटा योगानंद कालवा जो बचपन से ही योग करते आ रहें है और बड़े बड़े मंचों पर योग प्रदर्शन करते है। उनके नाम भी प्रदेश में छाए हुए हैं। ओम कालवा की पढ़ाई भी योग में हुई है। कालवा जो बचपन से ही सुबह चार बजे उठते हैं और योग शिविरों में लग जाते है अब तो पुरा प्रोफेसनल बना दिया है। सुबह से शाम तक योग में ही लगे रहते हैं योग से ही असाध्य रोगों का ईलाज भी करते हैं। इनके पास दूर दूर से लकवे और स्लिप डिस्क के रोगी आते हैं और उनको योग से नया जीवन देते हैं। ओम कालवा का व्यवहार बहुत ही विनम्र और मितभाषी है। ओम कालवा की जीवन जीने की एकदम साधारण सी जीवन शैली हैं। ओम कालवा जो छोटे से गांव से होकर भी देश के नामी योग संगठनों में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर चुके हैं। ओम कालवा जो बचपन से लेकर आज तक बारह लाख से अधिक लोगों को सैकड़ों निशुल्क योग शिविरों के माध्यम से योग सीखा चुके हैं। ओम कालवा जो राजस्थानी भाषा व वेशभूषा में ही शिविर आयोजित करते हैं। योग शिविर आयोजित करने की शैली भी शानदार है। हंसा हंसा कर लोट पोट कर देते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन योग के कार्यक्रम कर हजारों लोगों को प्रेरित करने का पुण्य कार्य किया था। ओम कालवा निरोगी जीवन के नाम से अपना यूट्यूब चैनल चलाते हैं और ओम योग सेवा संस्था के नाम से योगा थैरेपी सेन्टर भी चलाते हैं। कांट्रेक्टर बेस पर आयुर्वेद विभाग में योग प्रशिक्षक पद पर सेवा प्रदान कर रहे हैं। तीन सालों से कस्बे की तुलसी सेवा संस्थान के महाप्रज्ञ प्रेक्षा ध्यान सभागार भवन में नियमित योगा क्लास भी चलाते हैं। निस्वार्थ भाव से लगातार दस सालों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम का संचालन भी कर रहे हैं। योग समिति में प्रदेश संरक्षक पद पर कार्यरत प्रदेश के बेरोजगार योगी भाई बहनों के लिए उनके रोजगार हेतू प्रयास करते आ रहे हैं। योगा लवर्स प्रदेश अध्यक्ष पद पर सेवा प्रदान कर रहे हैं। ओम कालवा कोई भी नशीली वस्तु का सेवन नहीं करते हैं बचपन से ही । ओम कालवा ने योग के क्षेत्र में हजारों पुरस्कार प्राप्त किए हैं। प्रमाण पत्र और ट्रॉफियों से घर भर रखा है। ओम कालवा एक ही बात कहते हैं हर इंसान को नियमित एक घंटा योगाभ्यास करना अनिवार्य है। योग तो ओम कालवा के रग रग में बस गया है। कालवा हर शिविर में संदेश देते हैं कि राष्ट्र और प्रकृति के लिए जिओ। जिस प्रकार हमारे पूर्वज हमें विरासत में कुछ देकर गए हैं हम भी आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ अच्छा देकर जाएं। ओम कालवा ने उनके जीवन में सुख दुख की घड़ी में जिन लोगों ने सहयोग किया उन तमाम मददगारों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। कालवा हर शिविर में अपने गुरुजनों का गुणगान करते हैं। निरंतरता और नियमितता से सब कुछ प्रात किया जा सकता है। कालवा अपने जीवन में कभी कोई भी राजनीति पार्टी ज्वॉइन नहीं करेगें। उनका उद्देश्य सम्पूर्ण मानव समाज को योग से जोड़ना और प्रेरित करना है। सत्यार्थ न्यूज चैनल उनके 35 वें जन्मदिन पर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करती है।

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