न्यूज रिपोर्टर मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
जिला प्रशासन की नई पहल, नशा छोड़ने की ई-शपथ लेने पर मिलेगा प्रमाण पत्र ।
किशोर एवं युवाओं को नशा के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करना हम सबकी जिम्मेदारी है. जिला प्रशासन की ओर से इसे लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है जन-जागरुकता पखवाड़े के तहत नशा छोड़ने और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करने वाले को जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि का हस्ताक्षर युक्त ई-प्रमाण पत्र प्राप्त होगा। जिला कलक्टर ने शुक्रवार को पहला प्रमाण पत्र जारी करते हुए इसे लांच किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की नशे की लत से परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना ही इसका सर्वोत्तम इलाज है। कुछ बीमारियों का इलाज ही बचाव है, जबकि कुछ बीमारियों से बचाव ही उनका इलाज है। नशा हमारे परिवार और समाज के लिए बेहद घातक है। इससे मनुष्य को सामाजिक, आर्थिक और चारित्रिक रूप से नुकसान होता है। इसके मद्देनजर यह जरूरी है, कि प्रत्येक व्यक्ति को नशे से दूर करे। जिला कलेक्टर ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के प्रयास होंगे। इसी श्रृंखला में यह डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इसे लिंक अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से स्केन करते हुए डाउनलोड किया जा सकता है।ऐसे ले सकते है अपना प्रमाण पत्र, लिंक पर क्लिक करने के बाद पहले चरण में नशे से दूर रहने तथा दूसरों को इसके लिए प्रेरित करने की ई-शपथ लेनी होगी। इसके पश्चात् शपथ ग्रहिता द्वारा अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर क्लिक करना होगा। इसके ठीक बाद जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर युक्त ई- प्रमाण पत्र डाउनलोड हो जाएगा। इस दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक एलडी पंवार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के उप निदेशक गौरव भाटिया और अभियान समन्वयक हरिशंकर आचार्य मौजूद रहें।
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श्रीडूंगरगढ़ डॉ जगदीश गोदारा के एपीओ आदेश पर लगी रोक हाई कोर्ट ने दिया स्थगन आदेश
श्रीडूंगरगढ़। उप जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ जगदीश गोदारा को एपीओ करने के आदेश पर राजस्थान हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। जगदीश गोदारा ने एपीओ आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जिस पर स्थगन आदेश मिल गया है। अब गोदारा उप जिला अस्पताल में सेवा देते रहेंगे। संयुक्त शासन सचिव चिकित्सा प्रीति माथुर द्वारा आदेश किए गए थे जिस पर अब रोक लग गई है।


















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