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सोनभद्र – उत्सव ट्रस्ट के गैरैया संरक्षण अभियान को मिला जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद

उत्सव ट्रस्ट के गैरैया संरक्षण अभियान को मिला जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद
– जनपद मुख्यालय राबर्ट्सगंज से लेकर जिले भर में पांच वर्षों से चलाया जा रहा गौरैया संरक्षण अभियान
– स्वनिर्मित घोंसला का भी किया जाता है निःशुल्क वितरण

सोनभद्र /सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह
Mo 9580757830

सोनभद्र। जनपद मुख्यालय राबर्ट्सगंज से लेकर जिले भर में करीब पांच वर्षो से युवा अधिवक्ता आशीष पाठक के जरिए उत्सव ट्रस्ट के गौरैया संरक्षण अभियान को जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद मिला है। उन्हें चित्रकूट जाकर स्वनिर्मित घोंसला भी भेंट किया, जिस पर बेहद खुशी जाहिर करते हुए अपना आशीर्वाद दिया।
बता दें कि जनपद मुख्यालय राबर्ट्सगंज में रिटायर्ड सरकारी चिकित्सक डॉ एस० पी० पाठक के पुत्र उत्सव ट्रस्ट के ट्रस्टी आशीष पाठक विलुप्त होती गौरैया पक्षी को बचाने का अभियान वर्ष 2019 से जोर-शोर से चला रहे हैं। आशीष ने अपने घर में गौरैया के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने के साथ ही मिट्टी के घड़े, प्लाई, एम०डी०एफ० एवं वेस्ट मैटेरियल जैसे काटून के गत्ते, अखबारी कागज, सुतली, नारियल की रस्सी, प्लास्टिक की बोतल आदि से स्वनिर्मित कृत्रिम घोसले बना कर दर्जनों की संख्या में लगाए हैं जिसके कारण आशीष के घर में 25-30 गौरैया के जोड़ों ने अपना स्थाई आवास बना लिया और वर्ष में लगभग 200 गौरैया के बच्चे उनके घर से बड़े हो कर उड़ जाते हैं। आशीष स्वनिर्मित घोसलों को बड़ी संख्या में उन लोगों में वितरित करते हैं जहाँ गौरैया को संरक्षण प्रदान कर उनकी संख्या में वृद्धि की जा सकती है। आशीष द्वारा स्कूल के टीचर एवं बच्चों सहित तमाम लोगों को गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ ही घोसला बनाने का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं। अब तक आशीष द्वारा लगभग 2300 से ज्यादा घोसले बना कर उपयुक्त स्थान के उपयुक्त लोगों में वितरित किया जा चुका है। इसी कड़ी में उन्होंने तुलसीपीठ सेवा न्यास के सस्थापक रामानंदाचारी ज्ञान पीठ पद्मविभूषण जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी को स्वनिर्मित घोसला भेंट किया जिसे पा कर गुरुदेव भगवन अपने अन्तर चक्षु से नन्ही गौरैया के चहचहाने और उसके स्वरूप का स्मरण कर अत्यंत रोमांचित हुए। आशीष पाठक के अभियान के विषय में जान कर गुरुदेव अत्यंत हर्षित हुए और इस कार्य की प्रसंशा करते हुए गुरुदेव ने अपना स्नेह तथा आशीर्वाद प्रदान किया।

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