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जेपीवी डी ए वी स्कूल अग्निकांड: 4 नोटिस बेअसर, हजारों बच्चों की जान से खिलवाड़—प्रबंधन की लापरवाही पर प्रशासन की चुप्पी सवालों में

जेपीवी डी ए वी स्कूल अग्निकांड: 4 नोटिस बेअसर, हजारों बच्चों की जान से खिलवाड़—प्रबंधन की लापरवाही पर प्रशासन की चुप्पी सवालों में

राष्ट्र स्तरीय शालेय संस्था को मनमानी की परोक्ष छूट अथवा ट्रिपल एंजिन सिस्टम का पावर फुस्स हो गया

तीन साल से चेतावनी, ज़मीन पर शून्य तैयारी—हादसे के 24 घंटे बाद भी जिम्मेदार खामोश

कटनी।जेपीव्ही डीएव्ही पब्लिक स्कूल में हुई भीषण आगजनी की घटना ने स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी अनदेखी और नियमों की अवहेलना का परिणाम बनकर सामने आया है । नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों से प्रशासन लगातार स्कूल को अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दे रहा था, लेकिन प्रबंधन ने इन्हें गंभीरता से लेने के बजाय केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रखा था l यह दुर्घटना अगर साधारण हैसियत की संचालन समिति द्वारा संचालित शाला में होती तो प्रशासनिक चाबुक तड़ातड़ बरसने लगते लेकिन राष्ट्र स्तरीय संस्था भारी भरकम फीस डोनेशन लेकर चलाती है तो उस पर प्रशासनिक कार्यवाही की कुं -कूँ, चूँ चूँ तक शुरू नहीं हुई है शायद ट्रिपल एंजिन सिस्टम के पार्ट ज़ाम हो गए हैं l

रिकॉर्ड के अनुसार, स्कूल प्रबंधन को 18 सितंबर 2023, 19 दिसंबर 2023, 20 दिसंबर 2024 और 17 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी किए गए। अंतिम नोटिस में साफ उल्लेख था कि 1 जुलाई 2024 को फायर प्लान की स्वीकृति लेने के बावजूद परिसर में कोई सुरक्षा उपकरण स्थापित नहीं किए गए।
इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन ने नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों की अनदेखी करते हुए हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा को जोखिम में डाला।
हादसे के 24 घंटे बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है

फायर सेफ्टी के आवेदन समय से क्यों नहीं ?

समय सीमा में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन न करने पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
“विपरीत स्थिति में कार्रवाई” की चेतावनी के बावजूद ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए ?

घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि दमकल विभाग समय पर नहीं पहुंचता, तो कंप्यूटर लैब से शुरू हुई आग पूरे भवन को अपनी चपेट में ले सकती थी।
यह मामला अब केवल एक स्कूल की लापरवाही तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का भी प्रतीक बनता जा रहा है।

ठोस कार्रवाई के कठोर प्रावधानो में यह शामिल है

संभावित कड़ी कार्रवाई के दायरे में शामिल है स्कूल की मान्यता रद्द करना ,भवन को असुरक्षित घोषित कर सील करना और
भारी आर्थिक दंड लगाने के साथ
प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण एफ आई आर दर्ज करना, नियमों के उल्लंघन पर विद्युत आपूर्ति बाधित करना लेकिन कुछ नहीं हुआ l

निर्दोष बच्चे डेढ़ सप्ताह तक बंधक जैसा बनाने वाला प्रशासन आज खुद बंधक-दशा में

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस गंभीर लापरवाही पर ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी केवल नोटिसों तक सिमट कर रह जाएगा?
बात कड़वी जरूर लगेगी लेकिन जनचर्चा में शासन प्रशासन दोनों की कटु आलोचना इस उदाहरण के साथ की जाती है कि एक तरफ तो अल्पसंख्यक वर्ग की संस्थाओं में पढ़ने जा रहे सैकड़ों गरीब बच्चों को ट्रेन से रेलवे पुलिस कटनी स्टेशन में उतारकर जाँच के नाम पर दस बारह दिनों तक बंधक जैसा बनाकर रखती है और दूसरी तरफ हजारों बच्चों को अग्नि दुर्घटना में भूँजने वाली प्रत्यक्ष लापरवाही करने वाली संस्था पर ऊँगली तक नहीं उठा पाती मानो गुलामों की तरह सर झुकाए ख़डी है l

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