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सोनभद्र -*स्कूल नही आते शिक्षक, उच्चमाध्यामिक विद्यालय ढोसरा में है पोस्टिंग*

*स्कूल नही आते शिक्षक, उच्चमाध्यामिक विद्यालय ढोसरा में है पोस्टिंग*

 

 

*अपनी कार्यशैली के लिए है चर्चित,विवादों से है पुराना नाता*

 

 

*सोनभद्र*/सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

 

शिक्षा क्षेत्र नगवां ब्लॉक के दुरूह पहाड़ी क्षेत्र ढोसरा उच्च माध्यमिक विद्यालय में पोस्टिंग अध्यापक विनोद मिश्रा कभी विद्यालय नही आते है कभी कभी जाकर अपनी उपस्थिति मेंटेंस कर पूरे महीने गायब रहने का लग रहा है आरोप।

आप को बता दें कि नगवां ब्लॉक के दुरूह पहाड़ी क्षेत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की शिक्षा व्यस्था भ्रष्ट हो चुकी है। उच्च माध्यमिक विद्यालय ढोसरा में कुल पंजीकृत छात्र छात्राओं की संख्या 51 है जिसमे मौके पर 20 छात्र ही उपस्थित रहे विद्यालय में अध्यापकों की संख्या दो है जिसमे मुकेश कुमार उपस्थित मिले जबकि प्रभारी विनोद मिश्रा जिनको अतिरिक्त प्रभार चीचलिक का भी बताया गया वो दोनो ही जगह अनुपस्थित रहे।

ये वही विनोद मिश्रा है जिनकी वजह से सोनभद्र का बेसिक शिक्षा विभाग पर उंगली उठी थी इनके ARP की नियुक्ति पर भी खूब हो हल्ला मचा था सारे नियमों को ताक पर रखकर इनकी नियुक्ति की गई थी पूरे नगवां ब्लॉक के अध्यापकों के स्थानांतरण से पोस्टिंग तक के कार्यों में इनकी खूब चलती है इनके खिलाफ आवाज उठाने वाले शिक्षकों को कड़ी हिदायत के साथ सस्पेंड कर दिया जाता है। विभागीय सूत्रों की माने तो पोस्टिंग और स्थानांतरण में अच्छा खासा सुविधा शुल्क लिया जाएगा विभाग की बोलती बंद कर दी जाती है।

गुरु जी विद्यालय तो आते नहीं है लेकिन इनका दबदबा शिक्षा क्षेत्र नगवां से बीएसए कार्यालय तक है इनके ऊपर अधिकारी कार्यवाही करने से कतराते रहे हैं या कहलीजिए की बेसिक शिक्षा विभाग की कृपा इनके ऊपर है कि ये शिक्षा क्षेत्र में पोस्टिंग से लेकर तबादले इनके ही इशारे पर होते है एवज में इनको फिक्स धनराशि देकर सम्मानित किया जाता है।

यहां तक कि बी आरसी प्रांगण में जर्जर विद्यालयों के नीलामी प्रक्रिया में भी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना टेंडर प्रकाशन के ही नीलाम कर लाभ लिया गया जो शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है स्कूल नही आने वाले शिक्षकों के विरुद्ध शिकायत करते हैं खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिकायत कर्ता को ही झूठा साबित कर आख्या रिपोर्ट लगा दी जाती है जिससे ये बात साफ होती है कि कही न कही शिक्षा विभाग की इस दुर्दशा के लिए अधिकारी भी उतने ही जिम्मेदार है जितना की नियमित विद्यालय नही जाने वाले अध्यापक जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर अच्छे अध्यापक होने का तमगा लिए घूम रहे हैं।

अब देखना है कि क्या शिक्षा विभाग ऐसे अध्यापकों को जांचकर कोई कार्यवाही होती है या हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर मामले को फाइलों में दबा दी जाती है।

इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से सेल फोन पर वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया इस कारण उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।

 

अभिभावकों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से पूरे मामले की जांचकर कार्यवाही करने की मांग की है।

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