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नए कानून को 1 वर्ष पूर्ण होने पर थाना प्रभारी ने की चर्चा नए कानून के प्रति और जागरूक होने की जरूरत

नए कानून को 1 वर्ष पूर्ण होने पर थाना प्रभारी ने की चर्चा नए कानून के प्रति और जागरूक होने की जरूरत

संवाददाता गोविन्द दुबे रायसेन

बरेली। नगर के थाना प्रांगण स्थित सभागार में नए कानून के 1 वर्ष पूर्ण होने पर थाना प्रभारी कपिल गुप्ता ने लोगो से चर्चा करते हुए कानून की धाराओं में होने वाले बदलाव के चलते 1 वर्ष में लोगो का क्या अनुभव रहा और लोगो को क्या परेशानी आई।
उन्होंने कहा कि हालांकि धाराओं में बदलाव हुआ है, कटेंट वही है। हां यह जरूर है कि धाराओं के बदलाव को लेकर कहीं-कहीं परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं

उन्होंने बताया कि पूर्व की धाराएं जिन्हें लोगो ने बचपन से जाना और सुना है, ऐसी स्थिति में धाराओं के बदलाव के कारण थोडी परेशानी होना स्वभाविक बात है। किसी भी नए काम की शुरूआत में कुछ कठिनाईयां आती है। नवीन कानून आम आदमी को न्याय दिलाने में सरलता प्रदान करता है। 1 जुलाई 2024 को देशभर में भारतीय दंड संहिता के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधान लागू हुआ है। देश में अंग्रेजो के कानून को बदलकर नए भारत का कानून लागू हुआ है। नए कानून में जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर का प्रावधान

ऐसा किया गया है, कि व्यक्ति कहीं से भी एफआईआर दर्ज करा सकता है। ऐसा करने के बाद वह तीन दिन में पुलिस के पास आ जाता है, तो उसकी एफआईआर हो जाएगी। एफआईआर करते समय वह कहां है, उसकी उपस्थिति मायने नहीं रखती। जिस पीडित के साथ घटना घटित हुई है, उसे 90 दिन में उसके केस की पडताल, कार्रवाई की डिटेल बतानी होगी।

वर्तमान में होने वाले बदलाव के चलते भारतीय न्याय संहिता में 511 धाराएं थी। इसे कम कर 358 धाराओं में कर दिया गया है। पहले सजाओं में कम्यूनिटी पनिश्मेंट का प्रावधान नहीं था। जो अब किया गया है। महिला, बच्चों के लिए एक अध्याय अलग कर दिया गया है। वहीं अब केस की विवेचना मैं वीडियो ग्राफी और बयानों को रिकॉर्ड करना आवश्यक हो गया है। जिससे पीड़ित को न्याय मिलने मैं कोई अड़चन नहीं आती।

अब इलेक्ट्रानिक डॉक्यूमेंट को मान्यता दी गई है। साक्ष्य अधिनियम में भी इलेक्ट्रानिक डॉक्यूमेंट मान्य किया जाएगा। नए कानून में 18 साल से कम की बच्ची के साथ गैंगरेप होता है, तो आजीवन कारावास और मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान है। न्याय प्रणाली में टेक्नॉलॉजी का उपयोग अधिक किया गया है। तलाशी, जब्ती की ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग कराना अनिवार्य किया गया है।

अब इस तरह से समझें बदली धाराएं

धारा-302 हत्या की सजा धारा 103, धारा-304 बी दहेज मृत्यु के लिए सजा धारा 80, धारा 379 चोरी की सजा धारा 303, धारा 376 बलात्कार की सजा धारा 64, धारा 420 धोखाधड़ी के लिए सजा धारा 318, धारा 498ए पति द्वारा क्रूरता का शिकार महिला धारा 85, धारा 120 बी आपराधिक षडयंत्र के लिए सजा धारा 61 है।

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