Advertisement

शिक्षा के नाम पर खुली लूट कब तक क्या कोई सुनने वाला नहीं नियम केवल शोभा की सुपारी. प्रायवेट स्कूलों की लूट-खसोट बनी चर्चा का केंद्र

शिक्षा के नाम पर खुली लूट कब तक क्या कोई सुनने वाला नहीं नियम केवल शोभा की सुपारी. प्रायवेट स्कूलों की लूट-खसोट बनी चर्चा का केंद्र

संवाददाता कृष्ण कुमार भार्गव बरेली

बरेली /क्षेत्र में अधिकतर प्रायवेट स्कूलों में मिल रही गड़बड़ी की शिकायत चर्चाओं में शासन के निर्धारित नियमों का नहीं किया जा रहा पालन होना चाहिए इस पर नियम अनुसार कार्रवाई जनता ने की मांग सूत्रों की मानें तो मनमानी तरीके से फीस ली जा रही किसी का कोई निर्धारित मापदंड नहीं शासन के निर्देश के अनुसार अधिकतर स्थानों पर दीवारों पर नहीं की गई सूची जारी
।स्कूलों में कम वेतन पर प्रशिक्षित नहीं होने के बावजूद भी रख लिए जाते शिक्षक शासन के नियमों आरटीई का खुला उल्लंघन मिल रही जगह-जगह से शिकायत।
सुविधाओं के नाम पर अधिकतर स्कूलों में वास्तविकता की कमी कागजी आंकड़े अधिक जाकर देखो हो जाओगे वास्तविकता से अवगत सत्यता के मिल जाएंगे दर्शन,कई स्कूलों में नहीं विषय अनुसार शिक्षक अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को पढ़ने के लिए योग अनुभवी शिक्षक की कमी शिकायत मिली की कक्षा दूसरी तीसरी के बच्चे को नहीं आता अक्षर
अधिकतर स्कूलों में नहीं होता वार्षिक से कैलेंडर का पालन कागज आंकड़े कम वास्तविक ज्यादा मिली शिकायत,कई स्कूलों में खुलेआम चल रही फीस पर मनमानी छोटी कक्षाओं के लिए बच्चों की भी मनमानी तरीके से फीस वसूली एवं अनावश्यक अनलिमिटेड पुस्तकों के लिए दबाव की मिल रही शिकायत
जबकि केवल एनसीईआरटी की पुस्तक चलना चाहिए शासन के निर्देशों का होना चाहिए पालन शासन के दिशा निर्देश यदि बनते हैं तो उन पर अमल होना चाहिए ।
शिक्षा के नाम पर खुली लूट कब तक क्या कोई सुनने वाला नहीं नियम केवल शोभा की सुपारी. प्रायवेट स्कूलों की लूट-खसोट बनी चर्चा का केंद्

बरेली /क्षेत्र में अधिकतर प्रायवेट स्कूलों में मिल रही गड़बड़ी की शिकायत चर्चाओं में शासन के निर्धारित नियमों का नहीं किया जा रहा पालन होना चाहिए इस पर नियम अनुसार कार्रवाई जनता ने की मांग सूत्रों की मानें तो मनमानी तरीके से फीस ली जा रही किसी का कोई निर्धारित मापदंड नहीं शासन के निर्देश के अनुसार
रायसेन में शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए बतादें की कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें बेचने की अधिकतम दर तय कर दी है। कक्षा अनुसार निर्धारित मूल्य:
कक्षा 1 से 2 तक – ₹800
कक्षा 3 से 4 तक – ₹900
कक्षा 5 से 6 तक – ₹1000
कक्षा 6 से 8 तक – ₹1200
, जो आम जनता के हित में, बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है इस आदेश के ज़रिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी निजी विद्यालय विद्यार्थियों को लूट नहीं सकता। अधिकतर स्थानों पर दीवारों पर नहीं की गई सूची जारी
।स्कूलों में कम वेतन पर प्रशिक्षित नहीं होने के बावजूद भी रख लिए जाते शिक्षक शासन के नियमों आरटीई का खुला उल्लंघन मिल रही जगह-जगह से शिकायत।
सुविधाओं के नाम पर अधिकतर स्कूलों में वास्तविकता की कमी कागजी आंकड़े अधिक जाकर देखो हो जाओगे वास्तविकता से अवगत सत्यता के मिल जाएंगे दर्शन,कई स्कूलों में नहीं विषय अनुसार शिक्षक अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को पढ़ने के लिए योग अनुभवी शिक्षक की कमी शिकायत मिली की कक्षा दूसरी तीसरी के बच्चे को नहीं आता अक्षर
अधिकतर स्कूलों में नहीं होता वार्षिक से कैलेंडर का पालन कागज आंकड़े कम वास्तविक ज्यादा मिली शिकायत,कई स्कूलों में खुलेआम चल रही फीस पर मनमानी छोटी कक्षाओं के लिए बच्चों की भी मनमानी तरीके से फीस वसूली एवं अनावश्यक अनलिमिटेड पुस्तकों के लिए दबाव की मिल रही शिकायत
जबकि केवल एनसीईआरटी की पुस्तक चलना चाहिए शासन के निर्देशों का होना चाहिए पालन शासन के दिशा निर्देश यदि बनते हैं तो उन पर अमल होना चाहिए

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!