सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता मीडिया प्रभारी
श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के ख्याती प्राप्त राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के प्रदेश संरक्षक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने जानकारी देते हुए बताया। योग भारत की सबसे प्राचीन पद्वतियों में से एक है। जो लगभग पांच हजार साल पुरानी है। कालवा ने कहा कि भारत के उन तमाम योग तपस्वीयों का आभार व्यक्त करना चाहिए जिन्होंने विश्व कल्याण हेतु योग संस्कृति का निर्माण कर सुखी और निरोगी जीवन जीने के लिए मानव जाति का लम्बे समय तक सर्वांगीण विकास होता रहे ऐसी दिव्य विरासत हमें देकर गए हैं। सौ प्रतिशत विश्व का कल्याण हो सकता है। फिर भी ग्यारह सालों से विश्व पटल पर योग सुर्खियों में आने के बाद भी योग धरातल पर गंदी राजनीति की ओर भेंट चढ़ गया वर्तमान में योग अस्थमा रोग की तरह तड़प रहा है। जब 21 जून योग दिवस नजदीक आता है तो आला कमान कई हजार करोड़ का बजट दिखावे के नाम पर फूंक कर चट कर जाते हैं। योग प्रशिक्षकों को पांच से दस रूपये के प्रमाण पत्र कागज के टुकड़े देकर सम्मान के तौर पर राजी कर देते हैं। योग वाकई में हर रोग में रामबाण औषधि है फिर भी योग के नाम पर केवल केवल दिखावा किया जा रहा है। कालवा ने बताया राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के पदाधिकारी योगाचार्य रामावतार यादव, योगाचार्य मनोज कुमार सैनी, योगाचार्य राकेश कुमार तूनवाल और उनकी पुरी टीम लम्बे समय से बेरोजगार योग प्रशिक्षकों के स्थाई रोजगार हेतू निस्वार्थ भाव से सेवा में लगे हुए हैं। हमारी पुरी टीम ने देश के विभिन्न राज्यों से जानकारी जुटाई है। पता चला है कि देश में कई लाख योग प्रशिक्षक डिग्री डिप्लोमा कोर्स प्राप्त कर स्थाई रोजगार के लिए आज भी तरस रहे हैं। दिखावे के नाम पर देश में विभाग की ओर से अस्थाई रूप से मानदेय के आधार पर महिलाओं को पांच हजार और पुरुषों को आठ हजार रुपए के हिसाब से रोड़ पर भीख मांगने वाले भिखारी से भी ज्यादा देयनीय हालात विभाग ने कर रखी है। इसमें भी कई महीनों तक सैलेरी रोक लेते हैं अतः कह सकते हैं कि आज देश में सबसे ज्यादा शोषण योग प्रशिक्षकों के साथ ही किया जा रहा है। महासंघ की पूरी टीम ने ठाना है। जब तक स्थाई रोजगार नहीं मिलता तब तक संघर्ष जारी रहेगा और उग्र आन्दोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। अब बहुत सहन कर चुके अब लड़ाई आर और पार की होगी।





















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