सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़- सवांददाता ब्युरो चीफ
आजकल अकसर लोग केवल नगद राशि नहीं लेकर बिना दहेज का विवाह करने की बात प्रचारित करते नजर आते है ऐसे में गांव रीड़ी के एक परिवार ने बिना दहेज विवाह का सच्चा आदर्श प्रस्तुत किया है दिवंगत मुकनाराम जाखड़ के बेटे रामकरण और रामचंद्र ने अपने बेटों मालाराम, विजयपाल और उदयशंकर की शादी बिना दहेज के कर एक मिसाल पेश की।वर पक्ष की ओर से पहले से तय अनुसार 1 रुपया और नारियल ही शगुन के रूप में लिया गया। यह शादियाँ ढाणी सिवराम के श्यामलाल बिरड़ा की बेटी विमला और बापेऊ निवासी गणेशाराम महिया की बेटियाँ सुमन व मनीषा से संपन्न हुईं। खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं ऐसे में सामान्य किसान परिवार द्वारा दहेज प्रथा को रोकने के लिए की गई इस पहल को शादी समारोह में मौजूद सभी लोगों ने एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल बताया।दूल्हों के पिता रामकरण व रामचंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा,की दुल्हन ही वास्तविक दहेज है। बेटी को सम्मान देना ही हमारी संस्कृति की असली पहचान है।”इस बात को चरितार्थ करने में पूरा परिवार न कि केवल रिश्तेदार, बल्कि पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस कदम को सराहनीय बताते हुए कहा कि यदि ऐसे प्रयास लगातार हों, तो दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियाँ समाप्त हो सकती हैं। समाज में इस प्रकार की पहल को आसपास के क्षेत्र समेत पूरे जिले में सराहनीय कदम बताया गया है।




















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