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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में भीषण मुठभेड़, जैश के 5 आतंकी ढेर; 4 जवान शहीद

नई दिल्ली:-जम्मू-कश्मीर के कठुआ (Kathua Encounter) जिले सुदूर जंगली इलाके में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुआ। इस मुठभेड़ में जैश के 5 आतंकियों के मारे जाने की सूचना है। वहीं, चार जवान बलिदान हो गए हैं और डीएसपी सहित पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। इनमें एक पैरा कमांडो भी शामिल है।

ये सभी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के मुखौटा संगठन पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट के बताए जा रहे है। वीरवार सुबह से देर शाम तक रुक-रुक कर दोनों तरफ से गोलीबारी जारी रही। अंधेरे होते ही अभियान रोक दिया गया था।
पुलिस को एक ग्रामीण ने दी थी आतंकियों के बारे में सूचना

बताया जा रहा कि ये वही आतंकी हैं, जो गत रविवार को हीरानगर के सन्याल गांव में देखे गए थे, जिन्हें पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है। सेना, बीएसएफ, पुलिस व सीआरपीएफ के जवान इस ऑपरेशन में जुटे हैं। मुठभेड़स्थल पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती है ताकि आतंकियों को भागने का मौका न मिल सके।

हेलीकॉप्टर, यूएवी, ड्रोन, डॉग स्क्वॉयड की मदद ली जा रही है। सुबह आठ बजे हीरानगर के राजबाग क्षेत्र के जुथाना के अंबानाल में एक ग्रामीण ने हथियारों से लैस पांच आतंकियों को देख पुलिस को जानकारी दी। ये आतंकी बिलावर की तरफ निकल रहे थे।

मुठभेड़स्थल पर मुस्तैद जवान।
कुछ ही देर में पुलिस की टुकड़ी मौके पर पहुंच गई। 9:15 बजे तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने खुद को घिरा देख गोलीबारी शुरू कर दी। डीएसपी व अन्य जवान मुठभेड़स्थल पर फंस गए और सुरक्षाबल पहुंचने के बाद डीएसपी को घायल हालत में सुरक्षित निकाला गया। साथ ही सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।

मुठभेड़ में 4 जवान बलिदान
डीएसपी बार्डर धीरज कटोज के अलावा पांच जवान जख्मी हुए। डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़ (Kathua Encounter) के बाद अचानक गोलीबारी बंद हो गई। बाद में पुलिस ने राकेट लांचरों का इस्तेमाल किया। आतंकियों ने फिर गोलीबारी शुरू कर दी जो देर शाम तक चली।

मुठभेड़ में बलिदान हुए जवान बलिवंद्र सिंह, जसवंत सिंह और तारिक।
मुठभेड़ (Encounter in Kathua) में बलिदान पुलिस के तीन जवान एसओजी का हिस्सा थे। इनके पेट और सिर पर गोलियां लगी हैं। पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। घायलों में अखनूर निवासी एसपीओ भरत चलोत्रा को जीएमसी जम्मू में, हीरानगर के एसपीओ हैप्पी शर्मा को जीएमसी कठुआ में लाया गया। बाद में उन्हें जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया।

बलिदान पुलिस जवान
•सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल तारिक अहमद पुत्र कबीर हुसैन निवासी रियासी।
•सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल जसवंत सिंह पुत्र अंग्रेज सिंह निवासी लौंडी हीरानगर।
•सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल बलविंदर सिंह पुत्र प्रेम सिंह निवासी कानाचक्क कठुआ।

जीएमसी कठुणा में भर्ती किए गए डीएसपी धीरज
डीएसपी धीरज को जीएमसी कठुआ में भर्ती किया। घायल पैरा कमांडो को एयरलिफ्ट कर सैन्य अस्पताल ले जाया गया। सेना का एक अन्य जवान भी घायल है। सैन्य हेलीकॉप्टर से आतंकियों के छिपे स्थान की निगरानी की जा रही है। मुठभेड़स्थल से सटे गांवों को जाने वाले सभी मार्गों को बंद कर दिया है।

पुलिस के डीजीपी नलिन प्रभात, आइजीपी भीम सेन व डीआइजी शिव कुमार शर्मा के अलावा कठुआ के एसएसपी सक्सेना मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि मुठभेड़ समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। वहीं, देर शाम डीजीपी नलिन प्रभात घायल जवान को देखने जीएमसी जम्मू पहुंचे।


भारी हथियारों को सुरक्षाबलों तक पहुंचाया गांव के युवाओं ने
मुठभेड़ (Jammu Kashmir Encounter) के दौरान स्थानीय लोग भी सुरक्षा कर्मियों की मदद के लिए बढ़चढ़ कर आगे आए। जुथाना के सुदूर जंगली इलाके में मुठभेड़स्थल काफी दूरी पर है। इसलिए वहां तक भारी हथियारों और गोला-बारूद को सुरक्षाबलों तक पहुंचाने में दिक्कतें सामने आने के बाद स्थानीय युवाओं के अलावा किशोर भी मदद को उठ खड़े हुए।

जवानों तक हथियार पहुंचाते युवा।
सेना और पुलिस के अधिकारियों ने ऐसे समय में सुरक्षाबलों की मदद करने पर युवाओं की सराहना की। लोगों ने कहा कि जब जवानों तक हथियार पहुंचाने की बात आई तो पूरे गांव के युवा मदद करने के लिए आगे खड़े हुए।


कठुआ स्टेशन को घेरा
मुठभेड़ के दौरान कठुआ (Kathua Encounter Update) रेलवे स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ाते हुए पुलिस जवान तैनात कर दिए। यात्रियों के सामान की चेकिंग की गई। दो दिन पहले किड़ियां गंडयाल में भी पांच संदिग्ध दिखने के बाद तलाशी अभियान चलाया था, लेकिन कुछ नहीं मिला।

दूसरे दिन रणजीत सागर झील के पास तलाशी अभियान चला, वहां भी कुछ नहीं मिला, ऐसा भी हो सकता है कि वही दल इस रूट से बिलावर के मल्हार की ओर जा रहा होगा। सुफैन के अंबानाल किड़ियां गंडयाल के रूट से दूर है, जो हीरानगर में रविवार को हुई मुठभेड़स्थल से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां उज्ज दरिया साथ लगता है, वह भी आतंकियों का पहले रूट रहा है। गांव सुफैन में दिन भर गोलीबारी, ग्रेनेड और राकेट दागे जाने की आवाजें गूंजती रहीं।

चार एंबुलेंस रहीं तैनात
बताया जाता है कि मुठभेड़ (Jammu Kashmir Encounter) के दौरान कुछ जवानों के घायल होने की जानकारी मिलने के बाद तुरंत एंबुलेंसों को बुलाया गया। इसके बाद मुठभेड़स्थल से कुछ देरी पर चार एंबुलेंस तैनात कर दी गईं। इसमें डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद थे।

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