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प्रदूषण प्रमाण पत्र के नाम पर फर्जीवाड़ा: बिना जांच ही जारी हो रहे PUC सर्टिफिकेट

प्रदूषण प्रमाण पत्र के नाम पर फर्जीवाड़ा: बिना जांच ही जारी हो रहे PUC सर्टिफिकेट

सुसनेर में खुला बड़ा घोटाला, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

सत्यार्थ न्यूज लाइफ
सोयत कला नगर से मनोज कुमार माली


सुसनेर नगर के क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। आरटीओ ऑफिस से करीब 20 किलोमीटर दूर पगारिया टोल प्लाजा के पास फर्जी तरीके से प्रदूषण सर्टिफिकेट (PUC) जारी किए जाने का मामला सामने आया है। नियमों को दरकिनार कर बिना किसी मशीन जांच के वाहनों को प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो सकता है।

कैसे हो रहा है फर्जीवाड़ा?

जांच में सामने आया कि वाहन (एमपी 43 एल 0516) के जरिए प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। सामान्य तौर पर, PUC सर्टिफिकेट जारी करने के लिए वाहनों की जांच विशेष मशीनों से की जानी चाहिए, जिससे धुएं के मानकों को परखा जाता है। लेकिन इस मामले में बिना किसी तकनीकी परीक्षण के ही प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन:

भारत सरकार के केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 के अनुसार:

हर वाहन के लिए प्रदूषण प्रमाण पत्र अनिवार्य है।

यह प्रमाण पत्र तभी जारी किया जा सकता है जब वाहन मानकों के अनुसार धुएं का उत्सर्जन कर रहा हो।

प्रदूषण जांच केंद्रों को सरकार द्वारा स्वीकृत मशीनों के जरिए जांच करनी होती है।

लेकिन इस मामले में इन सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

पर्यावरण पर असर:

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है। यदि बिना जांच के वाहनों को प्रमाण पत्र दिए जाते हैं, तो कई पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहन सड़कों पर चलते रहेंगे, जिससे वायु गुणवत्ता में गिरावट आएगी।

क्या हो सकता है आगे?

इस मामले में परिवहन विभाग और प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी होगी।

यदि यह घोटाला व्यापक स्तर पर फैला है, तो अन्य PUC सर्टिफिकेट जारी करने वाले केंद्रों की भी जांच होनी चाहिए।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो।

यह मामला सिर्फ एक जिले या टोल प्लाजा तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में इस तरह की धांधली हो सकती है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो इससे प्रदूषण नियंत्रण कानूनों की अवहेलना होगी और आम जनता भी गलत तरीके से प्रदूषण सर्टिफिकेट लेकर नियमों का उल्लंघन करेगी। अब देखने वाली बात होगी कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह दबकर रह जाएगा।

जब इस मामले में हमारे द्वारा परिवहन विभाग की अधिकारी बरखा गौड़ से 7225990922 ,इस नम्बर पे काफी बार संपर्क किया तो उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया

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