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पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाना प्रकृति का अपमान माना जाता है: शनिभक्त महंत मोतिगिरी

पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाना प्रकृति का अपमान माना जाता है: शनिभक्त महंत मोतिगिरी

Parul Rathaur
Haridwar

हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का त्योहार महत्वपूर्ण त्योहार में से एक माना जाता है। इस दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है।
आइए श्री महानिर्वाणी पंचायती अखाड़ा के शनिभक्त महंत श्री मोतिगिरी महाराज जी से जानें बसंत पंचमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र समेत अन्य बेहद महत्वपूर्ण जानकारी।
महंत मोतिगिरी जी ने बताया कि
हिंदू पंचांग के अनुसार, सरस्वती पूजा के लिए माघ शुक्ल पंचमी तिथि 2 फरवरी, रविवार को सुबह 09:14 बजे से शुरू होकर 3 फरवरी को सुबह 06:52 बजे तक मान्य रहेगी.
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा का मुहूर्त 02 फरवरी को सुबह 7:09 मिनट से लेकर दोपहर 12:35 मिनट तक रहेगा. ऐसे में इस दिन सरस्वती पूजा के लिए सिर्फ 5 घंटे 26 मिनट का समय मिलेगा.

बसंत पंचमी के दिन, भक्त शक्तिशाली मंत्रों के जाप के माध्यम से देवी सरस्वती को प्रसन्न कर सकते हैं. ‘ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि’ और ‘ॐ ऐं ऐं ह्रीं ह्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः’ जैसे मंत्रों से आप देवी सरस्वती की कृपा पा सकते हैं.

बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पीले कपड़े पहनें. फिर पूजा स्थल पर एक चौकी रखकर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर माता सरस्वती की फोटो या प्रतिमा रखें. इसके बाद मंदिर कलश, भगवान गणेश और नवग्रह का पूजन कर मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा शुरू करें. फिर माता के मंत्रों और श्लोकों का जाप करें.

बसंत पंचमी का व्रत रखने के लिए सुबह उठकर नहा-धोकर शुद्ध हो जाएं और पूजा-आराधना करने के बाद ही किसी चीज का सेवन करें. जब तक आपने माता सरस्वती का पूजन नहीं किया है, तब तक किसी नमकीन या अनाज का सेवन न करें. माता सरस्वती के पूजन में चढ़े हुए भोग से व्रत खोलना चाहिए.

केसर की खीर को देवी सरस्वती का का प्रिय भोग कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को केसर की खीर को भोग लगाया जाए तो मां सरस्वती प्रसन्न हो जाती हैं.

धर्म शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी नाम से भी जाना जाता है. इसे आमतौर पर लोग सरस्वती पूजा भी कहते हैं.

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए. पीला रंग बसंत पंचमी का प्रतीकात्मक रंग है और यह ऊर्जा और समृद्धि को दर्शाता है.

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा करते हैं. पूजा में सफेद फूल, पीले वस्त्र और सफेद तिल आदि अर्पित किया जाता है. मां सरस्वती के चरणों में वीणा और पुस्तक रखना शुभ माना जाता है. इस दिन लोग मां से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगते हैं.

बसंत पंचमी के दिन अन्न का दान करना बेहद शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि बसंत पंचमी के अनाज के दान से धन-धान्य की कमी नहीं रहती है. इस दिन पीली चीजों के दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, इसलिए पीली मिठाई या पीले वस्त्र दान जरूर करें.

बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा में कमल के फूल का प्रयोग किया जाता है. कमल का फूल चढ़ाने से सरस्वती देवी प्रसन्न होती हैं.

साल 2025 में बसंत पंचमी 2 फरवरी को मनाई जाएगी। वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाना प्रकृति का अपमान माना जाता है।

शिव शक्ति शनि सेवा समिति के अध्यक्ष महंत श्री मोतिगिरी जी ने
सभी जनमानस से इस बार और हर बार चाइनीज मांझे को खरीदने,बेचने और इस्तेमाल ना करने की अपील करी है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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