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परमार्थ निकेतन प्रयागराज में संकटमोचन हनुमान जी के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा

परमार्थ निकेतन प्रयागराज में संकटमोचन हनुमान जी के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा

Parul Rathaur
Parmarth Niketan, Rishikesh 

परमार्थ त्रिवेणी पुष्प सनातन संस्कृति व भारत दर्शनम् का अद्भत स्वरूप


पूज्य संतों का पावन सान्निध्य, वेदमंत्रों की दिव्य ध्वनि, शंख व घंटियों के दिव्य नाद के साथ संकटमोचन हनुमान जी के विग्रह की प्राणप्रतिष्ठा

महाकुम्भ प्रयागराज,। सनातन संस्कृति के प्रति अडिग श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में संकटमोचन हनुमान जी के श्री विग्रह की दिव्य प्राण प्रतिष्ठा विधि पूरी धूमधाम और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुई। प्राण प्रतिष्ठा, पूज्य संतों, विद्वानों और भक्तों के पवित्र सान्निध्य में वेदमंत्रों की दिव्य ध्वनि, शंख व घंटियों के नाद, और साधना की गूंज ने पूरे वातावरण को पवित्र कर दिया।
संकटमोचन हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पूज्य संतों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। पूज्य संतों ने पूजन-अर्चन कर इस दिव्य कार्यक्रम को और भी पुण्यकारी बना दिया।


स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा, महाकुम्भ के अवसर पर संकटमोचन हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा से इस दिव्य धरा पर नई ऊर्जा का संचार होगा। यह सनातन धर्म की महिमा को पुनः प्रकट करने का एक दिव्य अवसर है, जो महाकुम्भ में आये लाखों आस्थावान हृदयों को पवित्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
स्वामी जी ने बताया कि परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में भारत की वैभवशाली संस्कृति और परंपराओं को सशक्त रूप से स्थापित किया जा रहा है। भारत के विविधतापूर्ण और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के दर्शन परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में हो रहे हैं। प्राचीन वेद, शास्त्र, और पुरानी परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और जीवन के मूल सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने का एक उत्तम प्रयास है। महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प एक नये

स्वरूप में देखने को मिलेगा, जो भारत की प्राचीन धरोहर और जीवनशैली का प्रतीक है।
संकटमोचन हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा का यह अद्भुत कार्यक्रम सनातन संस्कृति की महिमा और भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बनकर उभरा है।

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