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16 जनवरी 2025 गुरुवार आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-(सवांददाता नरसीराम शर्मा)

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।

🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
🕉️आज का पंचांग🕉️

दिनांक:- 16/01/2025, गुरुवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष,
मघा
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– तृतीया 28:05:32 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——- आश्लेषा 11:15:32
योग——— आयुष्मान 25:04:46
करण———– वणिज 15:38:52
करण——- विष्टि भद्र 28:05:32
वार———————- गुरूवार
माह————————– माघ
चन्द्र राशि——– कर्क 11:15:32
चन्द्र राशि—————– सिंह
सूर्य राशि—————– मकर
रितु———————— शिशिर
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर——————– क्रोधी
संवत्सर (उत्तर)———— कालयुक्त
विक्रम संवत—————- 2081
गुजराती संवत————– 2081
शक संवत—————– 1946
कलि संवत—————– 5125

वृन्दावन
सूर्योदय————– 07:12:13
सूर्यास्त————— 17:46:02
दिन काल———— 10:33:48
रात्री काल————–13:26:02
चंद्रास्त————– 08:57:20
चंद्रोदय—————- 20:11:28

लग्न—-मकर 1°58′ , 271°58′

सूर्य नक्षत्र———— उत्तराषाढा
चन्द्र नक्षत्र————– आश्लेषा
नक्षत्र पाया—————— रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

डो—- आश्लेषा 11:15:32

मा—- मघा 17:33:52

मी—- मघा 23:54:42

मू—- मघा 30:18:02

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= मकर 01°40, उ o षा o 2 भो
चन्द्र=कर्क 27°30 , आश्लेषा 4 डो
बुध =धनु 16°52 ‘ पू o षाo 2 धा
शु क्र= कुम्भ 19°05, शतभिषा ‘ 4 सू
मंगल=कर्क 02°30 ‘ पुनर्वसु ‘ 4 ही
गुरु=वृषभ 17°30 रोहिणी, 3 वी
शनि=कुम्भ 21°28 ‘ पू o भा o , 1 से
राहू=(व) मीन 06°35 उo भा o, 1 दू
केतु= (व)कन्या 06°35 उ oफा o 3 पा

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮

राहू काल 13:48 – 15:08 अशुभ
यम घंटा 07:12 – 08:31 अशुभ
गुली काल 09:51 – 11: 10अशुभ
अभिजित 12:08 – 12:50 शुभ
दूर मुहूर्त 10:44 – 11:26 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:57 – 15:39 अशुभ
वर्ज्यम 23:55 – 25:37* अशुभ
प्रदोष 17:46 – 20:30 शुभ

गंड मूल अहोरात्र अशुभ

चोघडिया, दिन

शुभ 07:12 – 08:31 शुभ
रोग 08:31 – 09:51 अशुभ
उद्वेग 09:51 – 11:10 अशुभ
चर 11:10 – 12:29 शुभ
लाभ 12:29 – 13:48 शुभ
अमृत 13:48 – 15:08 शुभ
काल 15:08 – 16:27 अशुभ
शुभ 16:27 – 17:46 शुभ

चोघडिया, रात

अमृत 17:46 – 19:27 शुभ
चर 19:27 – 21:08 शुभ
रोग 21:08 – 22:48 अशुभ
काल 22:48 – 24:29* अशुभ
लाभ 24:29* – 26:10* शुभ
उद्वेग 26:10* – 27:51* अशुभ
शुभ 27:51* – 29:31* शुभ
अमृत 29:31* – 31:12* शुभ

होरा, दिन

बृहस्पति 07:12 – 08:05
मंगल 08:05 – 08:58
सूर्य 08:58 – 09:51
शुक्र 09:51 – 10:44
बुध 10:44 – 11:36
चन्द्र 11:36 – 12:29
शनि 12:29 – 13:22
बृहस्पति 13:22 – 14:15
मंगल 14:15 – 15:08
सूर्य 15:08 – 16:00
शुक्र 16:00 – 16:53
बुध 16:53 – 17:46

होरा, रात

चन्द्र 17:46 – 18:53
शनि 18:53 – 20:00
बृहस्पति 20:00 – 21:08
मंगल 21:08 – 22:15
सूर्य 22:15 – 23:22
शुक्र 23:22 – 24:29
बुध 24:29* – 25:36
चन्द्र 25:36* – 26:43
शनि 26:43* – 27:51
बृहस्पति 27:51* – 28:58
मंगल 28:58* – 30:05
सूर्य 30:05* – 31:12

🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

मकर > 06:02 से 07:52 तक
कुम्भ > 07:52 से 09:24 तक
मीन > 09:24 से 10:54 तक
मेष > 10:54 से 12:34 तक
वृषभ > 12:34 से 14:32 तक
मिथुन > 14:32 से 16:44 तक
कर्क > 16:44 से 19:06 तक
सिंह > 19:06 से 21:20 तक
कन्या > 21:20 से 23:42 तक
तुला > 23:42 से 01:42 तक
वृश्चिक > 01:42 से 04:56 तक
धनु > 04:56 से 06:02 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट-दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।

महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्।
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 3 + 5 + 1 = 24 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

18 + 18 + 5 = 41 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक , दुःख कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

15:44 से रात्रि 28:06 तक

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशिनी

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

*सौभाग्य सुन्दरी व्रत

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

एकेनापि सुवृक्षेण दह्यमानेन गन्धिना ।
वासितं तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा ।।
।। चा o नी o।।

जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प अवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढाता है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग अo-13

सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम्‌ ।,
असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च ॥,

वह सम्पूर्ण इन्द्रियों के विषयों को जानने वाला है, परन्तु वास्तव में सब इन्द्रियों से रहित है तथा आसक्ति रहित होने पर भी सबका धारण-पोषण करने वाला और निर्गुण होने पर भी गुणों को भोगने वाला है॥,14॥,

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष-कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। भूमि व भवन की खरीद-फरो्ख्‍त की योजना बनेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। निवेश शुभ रहेगा। लंबी यात्रा का मन बनेगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा। भय रहेगा। चोट व रोग से बचें।

🐂वृष-प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी। रुके कार्यों में गति आएगी। किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का मौका मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। शत्रु पस्त होंगे। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है।

👫मिथुन-वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। क्रोध व उत्तेजना से बाधा उत्पन्न होगी। नियंत्रण रखें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। दूसरों के काम में दखल न दें। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। काम में मन नहीं लगेगा। विवाद से बचें।

🦀कर्क-पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पठन-पाठन व लेखन आदि में मन लगेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। राजभय है। जल्दबाजी न करें। वाणी में संयम रखें।

🐅सिंह-देव-दर्शन का कार्यक्रम बनेगा। अध्यात्म में रुचि रहेगी। वरिष्ठजनों का सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। प्रभावशालीव व्यक्तियों से परिचय बढ़ेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। निवेश शुभ रहेगा। परिवार के साथ समय अच्छा गुजरेगा।

🙍‍♀️कन्या-किसी अपरिचित की बातों में न आएं। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। व्यवस्था में अधिक प्रयास करना पड़ेंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। किसी झगड़े में न पड़ें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कुसंगति से हानि होगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें।

⚖️तुला-भागदौड़ रहेगी। किसी व्यक्ति के व्यवहार से दिल को ठेस पहुंच सकती है। बनते काम बिगड़ सकते हैं, धैर्य रखें। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। बुद्धि का प्रयोग करें। किसी के उकसावे में न आएं। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। दु:खद समाचार मिल सकता है।

🦂वृश्चिक-घर में अतिथियों का आगमन होगा। व्यय होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आत्मविश्वास बना रहेगा। नौकरी व व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देंगे। कोई अनहोनी होने की आशंका रहेगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा।

🏹धनु-सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। मान-सम्मान मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। यात्रा की योजना बनेगी। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। आय में वृद्धि होगी। मातहतों का सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। प्रयास सफल रहेंगे।

🐊मकर-प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नए कार्य प्रारंभ करने की योजना बनेगी। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा। विरोध करने का अवसर दूसरों को न दें। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🍯कुंभ-यात्रा मनोरंजक रहेगी। सभी ओर से सफलता प्राप्त होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण पर व्यय होगा। व्यस्तता के चलते थकान महसूस होगी। विवेक से कार्य करें। लाभार्जन सहज होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें।

🐟मीन-यात्रा मनोरंजक रहेगी। नई योजना बनेगी। व्यवसाय में वृद्धि के लिए सभी ओर से सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। धन प्र‍ाप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। चोट व दुर्घटना से बचें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

माघ कृष्ण चतुर्थी / संकष्टी चतुर्थी / संकट चौथ

17 जनवरी 2025 शुक्रवार को माघ कृष्ण चतुर्थी संकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी का त्यौहार है। इस चतुर्थी को ‘माघी कृष्ण चतुर्थी,तिलचौथ वक्रतुण्डी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन गणेश भगवान तथा संकट माता की पूजा का विधान है। संकष्ट का अर्थ है कष्ट या विपत्ति,कष्ट का अर्थ है क्लेश,सम् उसके आधिक्य का द्योतक है। आज किसी भी प्रकार के संकट,कष्ट का निवारण संभव है। इस के दिन व्रत रखा जाता है। इस व्रत का आरम्भ गणपतिप्रीतये संकष्टचतुर्थीव्रतं करिष्ये इस प्रकार संकल्प करके करें । सायंकालमें गणेशजी का और चंद्रोदय के समय चंद्र का पूजन करके अर्घ्य दें।

गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धि प्रदायक।
संकष्टहर में देव गृहाणर्धं नमोस्तुते।
कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये।
क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहार्धं नमोस्तुते।’
नारदपुराण,पूर्वभाग अध्याय 11

संकष्टीचतुर्थी व्रत का वर्णन इस प्रकार मिलता है।
माघकृष्णचतुर्थ्यां तु संकष्टव्रतमुच्यते।
तत्रोपवासं संकल्प्य व्रती नियमपूर्वकम् ।। ११३-७२ ।।
चंद्रोदयमभिव्याप्य तिष्ठेत्प्रयतमानसः ।
ततश्चंद्रोदये प्राप्ते मृन्मयं गणनायकम् ।। ११३-७३ ।।
विधाय विन्यसेत्पीठे सायुधं च सवाहनम् ।
उपचारैः षोडशभिः समभ्यर्च्य विधानतः ।। ११३-७४।।
मोदकं चापि नैवेद्यं सगुडं तिलकुट्टकम् ।
ततोऽर्घ्यं ताम्रजे पात्रेH ।। ११३-७५।।
सकुशं च सदूर्वं च पुष्पाक्षतसमन्वितम् ।
सशमीपत्रदधि च कृत्वा चंद्राय दापयेत् ।। ११३-७६ ।।
गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते ।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक ।। ११३-७७ ।।
एवं दत्त्वा गणेशाय दिव्यार्घ्यं पापनाशनम् ।
शक्त्या संभोज्य विप्राग्र्यान्स्वयं भुंजीत चाज्ञया ।। ११३-७८ ।।
एवं कृत्वा व्रतं विप्र संकष्टाख्यं शूभावहम् ।
समृद्धो धनधान्यैः स्यान्न च संकष्टमाप्नुयात् ।। ११३-७९।।
माघ कृष्ण चतुर्थी को संकष्टवव्रत बतलाया जाता है। उसमें उपवास  का  संकल्प लेकर व्रती सबेरे से चंद्रोदयकाल तक नियमपूर्वक रहे। मन को काबू में रखे। चंद्रोदय होने पर मिट्टी की गणेशमूर्ति बनाकर उसे पीढ़े पर स्थापित करे। गणेशजी के साथ उनके आयुध और वाहन भी होने चाहिए। मिटटी में गणेशजी की स्थापना करके षोडशोपचार से विधिपूर्वक उनका पूजन करें। फिर मोदक तथा गुड़ से बने हुए तिल के लडडू का नैवेद्य अर्पण करें। तत्पश्चात्‌ तांबे के पात्र में लाल चन्दन कुश,दूर्वा फूल अक्षत,शमीपत्र,दधि और जल एकत्र करके
निम्नांकित मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें चन्द्रमा को अर्घ्य दें –
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥
गगन रूपी समुद्र के माणिक्य,दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम और गणेश के प्रतिरूप चन्द्रमा! आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए। इस प्रकार गणेश जी को यह दिव्य तथा पापनाशन अर्घ्य देकर यथाशक्ति उत्तम ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्च्यात स्वयं भी उनकी आज्ञा लेकर भोजन करें। ब्रह्मन इस प्रकार कल्याणकारी संकष्टवव्रत’ का पालन करके मनुष्य धन-धान्य से संपन्न होता है। वह कभी कष्ट में नहीं पड़ता।लक्ष्मीनारायणसंहिता में भी कुछ इसी प्रकार वर्णन मिलता है ।
माघकृष्णचतुर्थ्यां तु संकष्टहारकं व्रतम् ।
उपवासं प्रकुर्वीत वीक्ष्य चन्द्रोदयं ततः ।। १२८ ।।
मृदा कृत्वा गणेशं सायुधं सवाहनं शुभम् ।
पीठे न्यस्य च तं षोडशोपचारैः प्रपूजयेत् ।। १२९ ।।
मोदकाँस्तिलचूर्णं च सशर्करं निवेदयेत् ।
अर्घ्यं दद्यात्ताम्रपात्रे रक्तचन्दनमिश्रितम् ।। १३० ।।
कुशान् दूर्वाः कुसुमान्यक्षतान् शमीदलान् दधि ।
दद्यादर्घ्यं ततो विसर्जनं कुर्यादथ व्रती ।। १३१ ।।
भोजयेद् भूसुरान् साधून् साध्वीश्च बालबालिकाः ।
व्रती च पारणां कुर्याद् दद्याद्दानानि भावतः ।। १३२ ।।
एवं कृत्वा व्रतं स्मृद्धः संकटं नैव चाप्नुयात् ।
धनधान्यसुतापुत्रप्रपौत्रादियुतो भवेत् ।। १३३ ।।
भविष्यपुराण में भी इस व्रत का वर्णन मिलता है।

व्रत के दिन क्या करें

1.गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ अत्यन्त शुभकारी होगा।
2.गणेश भगवान को दूध (कच्चा),पंचामृत,गंगाजल से स्नान कराकर,पुष्प,वस्त्र आदि समर्पित करके तिल तथा गुड़ के लड्डू,दूर्वा का भोग जरूर लगायें। लड्डू की संख्या 11 या 21 रखें। गणेश जी को मोदक (लड्डू),दूर्वा घास तथा लाल रंग के पुष्प अति प्रिय हैं। गणेश अथर्वशीर्ष में कहा गया है यो दूर्वांकुरैंर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति” अर्थात जो दूर्वांकुर के द्वारा भगवान गणपति का पूजन करता है वह कुबेर के समान हो जाता है। “यो मोदकसहस्रेण यजति स वाञ्छित फलमवाप्रोति” अर्थात जो सहस्र (हजार) लड्डुओं (मोदकों) द्वारा पूजन करता है,वह वांछित फल को प्राप्त करता है।
3.गणपति के 12 नाम या 21 नाम या 101 नाम से पूजा करें ।
4.शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्ष के। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥  अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्ष तक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।
5.किसी भी समस्या के समाधान के लिए  संकट नाशन गणेश स्तोत्र के 11 पाठ करें।

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