Advertisement

शीत लहर के प्रकोप से पशुपालक करें अपने पशुओं का बचाव : डीसी डा. हरीश कुमार वशिष्ठ

शीत लहर के प्रकोप से पशुपालक करें अपने पशुओं का बचाव : डीसी डा. हरीश कुमार वशिष्ठ

-पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने जारी की एडवाइजरी, सभी पशुपालकों से पालन करने का किया आह्वान

पलवल-05 जनवरी
कृष्ण कुमार छाबड़ा

डीसी डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है। बढ़ती ठंड के कारण पशुओं में भी ठंड से होने वाली बीमारियों की संभावना बढ़ जाती हैं। ठंड के तनाव के कारण दुधारू पशुओं में दुग्ध क्षमता घटने लगती है। इसलिए सर्दी के मौसम में इंसानों के साथ-साथ पशुओं को भी ठंड से बचाना बहुत जरूरी है। पशुओं को ठंड की मार से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालन के संबंध में एडवाइजरी जारी की गई है, जिसके अनुसार पशुपालक विशेष सावधानियां बरतकर अपने पशुओं को ठंड के कारण बीमार होने से बचाव कर सकते हैं।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. विरेंद्र सहरावत ने जानकारी देते हुए बताया कि ठंड की चपेट से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालक संतुलित चारे की मात्रा बढ़ाएं तथा गुड़ की मात्रा भी बढ़ाए। पशुओं को रात का रुका हुआ पानी न दे, हो सके तो ताजा पानी या गुनगुना पानी ही पिलाएं। उन्होंने बताया कि सर्दियों के मौसम में विशेष तौर से छोटे पशुओं में निमोनिया होने की संभावना बढ़ जाती है तथा बड़े पशुओं में ठंड के लक्षण आने लगते है, जिसके कारण पशु
की नाक से पानी गिरना शुरू हो जाता है तथा पशु का तापमान गिर जाता है और पशु चारा छोड़ देता है। निमोनिया के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है तथा उत्पादन कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि यदि पशुओं को बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें। उन्हॉने कहा कि दूध देने वाले पशुओं को व ब्याने वाले पशुओ को सामान्य पशु से ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती हैं। इसलिए उनके संतुलित चारे की मात्रा को बढ़ाना चाहिए और खनिज मिश्रण को भी डालना चाहिए। ठंड से पशुओं का बचाव करके ही पशुपालक उन्हें बीमार होने से बचाव सकते हैं। सर्दी से पशुओं को बचाने के लिए यह भी बताया कि बाड़े को चारो तरफ से ढककर रखें, ताकि सर्द हवाएं सीधे पशुओं को न लगें। बाड़े में पशुओं के मूत्र को एकत्रित न होने दें ओर सफाई का विशेष ध्यान रखें। वहीं पशुओं के ऊपर भी कंबल डालकर रखें, धूप निकलने पर ही पशु को बाहर निकालें। उन्होंने गौशाला में भी गौवंश को सर्द हवाओं से बचाव के लिए गौशाला प्रबंधकों से आह्वान किया है।
उपनिदेशक डा. वीरेंद्र सहरावत ने बताया कि पशुओं को मुंहखुर और गलघोटू की बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों के घर-द्वार मुफ्त टीकाकरण किया जा चुका है, जिसमें पलवल जिला के लगभग 2 लाख पशुओं (गाय व भैंस) का मुफ्त टीकाकरण किया है। उन्होंने पशुगणना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 21वीं पशुगणना 2024 का शुभारंभ हो चुका है। उन्होंने पशुपालकों को इस कार्य में पूरा सहयोग करने का आग्रह किया हैं। पशुगणना प्रत्येक 5 साल बाद करवाई जाती है। जिसमें गाय, भैंस भेंड़, बकरी, ऊंट, गधा, घोड़ा व पोल्ट्री आदि के साथ-साथ बेसहारा गायों और कुत्तों की गणना ऑनलाइन मोबाइल ऐप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर 72 प्रगणकों द्वारा 16 पशुचिकित्सकों के मार्गदर्शन में की जाएगी, जिसके लिए उन्होंने पशुपालकों से आह्वान भी किया है कि जब भी पशुगणना करने के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी आए तो उन्हें सभी पशुओं तथा उनसे संबंधित अन्य जानकारियां जोकि पशुगणना प्रारूप में दी गई हैं मोबाइल नंबर सहित प्रदान करें, ताकि पशुगणना से संबंधित सही आंकड़ा सरकार तक पंहुचाया जा सके और सरकार अत्याधिक लाभदायक योजनाओं को बनाकर पशुपालकों को लाभ पहुंचा सके। पशुगणना के आधार पर ही पशुओं तथा पशुपालकों के लिए विभिन्न प्रकार की लाभदायक योजनाओं का प्रारूप तैयार किया जाता है

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!