सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
दिनांक:- 30/12/2024, सोमवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष,
पौष””(समाप्ति काल)
तिथि——–अमावस्या 27:55:43 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र————- मूल 23:56:30
योग————– वृद्वि 20:31:03
करण——— चतुष्पद 16:02:19
करण———— नाग 27:55:43
वार———————- सोमवार
माह———————— पौष
चन्द्र राशि——————- धनु
सूर्य राशि—————— धनु
रितु———————– शिशिर
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर (उत्तर)————- कालयुक्त
विक्रम संवत————– 2081
गुजराती संवत———— 2081
शक संवत——————1946
कलि संवत————— 5125
वृन्दावन
सूर्योदय————– 07:10:35
सूर्यास्त—————- 17:33:21
दिन काल———— 10:22:46
रात्री काल———— 13:37:31
चंद्रास्त————– 16:52:43
चंद्रोदय—————- 31:29:47
लग्न—-धनु 14°38′ , 254°38′
सूर्य नक्षत्र————- पूर्वाषाढा
चन्द्र नक्षत्र——————- मूल
नक्षत्र पाया——————- ताम्र
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
यो—- मूल 11:42:49
भा—- मूल 17:50:36
भी—- मूल 23:56:30
भू—- पूर्वाषाढा 30:00:33
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= वृश्चिक 14°40, पू o षा o 1 भू
चन्द्र=धनु 04°30 , मूल 2 यो
बुध =वृश्चिक 23°52 ‘ ज्येष्ठा 2 या
शु क्र= कुम्भ 01°05,धनिष्ठा ‘ 3 गु
मंगल=कर्क 08°30 ‘ पुष्य ‘ 2 हे
गुरु=वृषभ 19°30 रोहिणी, 3 वी
शनि=कुम्भ 20°28 ‘ पू o भा o , 1 से
राहू=(व) मीन 07°25 उo भा o, 2 थ
केतु= (व)कन्या 07°25 उ oफा o 4 पी
🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮
राहू काल 08:28 – 09:46 अशुभ
यम घंटा 11:04 – 12:22 अशुभ
गुली काल 13:40 – 14: 58अशुभ
अभिजित 12:01 – 12:43 शुभ
दूर मुहूर्त 12:43 – 13:24 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:47 – 15:29 अशुभ
वर्ज्यम 22:19 – 23:56 अशुभ
प्रदोष 17:33 – 20:20 शुभ
गंड मूल 07:11 – 23:57 अशुभ
चोघडिया, दिन
अमृत 07:11 – 08:28 शुभ
काल 08:28 – 09:46 अशुभ
शुभ 09:46 – 11:04 शुभ
रोग 11:04 – 12:22 अशुभ
उद्वेग 12:22 – 13:40 अशुभ
चर 13:40 – 14:58 शुभ
लाभ 14:58 – 16:16 शुभ
अमृत 16:16 – 17:33 शुभ
चोघडिया, रात
चर 17:33 – 19:16 शुभ
रोग 19:16 – 20:58 अशुभ
काल 20:58 – 22:40 अशुभ
लाभ 22:40 – 24:22* शुभ
उद्वेग 24:22* – 26:04* अशुभ
शुभ 26:04* – 27:47* शुभ
अमृत 27:47* – 29:29* शुभ
चर 29:29* – 31:11* शुभ
होरा, दिन
चन्द्र 07:11 – 08:02
शनि 08:02 – 08:54
बृहस्पति 08:54 – 09:46
मंगल 09:46 – 10:38
सूर्य 10:38 – 11:30
शुक्र 11:30 – 12:22
बुध 12:22 – 13:14
चन्द्र 13:14 – 14:06
शनि 14:06 – 14:58
बृहस्पति 14:58 – 15:50
मंगल 15:50 – 16:41
सूर्य 16:41 – 17:33
होरा, रात
शुक्र 17:33 – 18:41
बुध 18:41 – 19:50
चन्द्र 19:50 – 20:58
शनि 20:58 – 22:06
बृहस्पति 22:06 – 23:14
मंगल 23:14 – 24:22
सूर्य 24:22* – 25:30
शुक्र 25:30* – 26:38
बुध 26:38* – 27:47
चन्द्र 27:47* – 28:55
शनि 28:55* – 30:03
बृहस्पति 30:03* – 31:11
🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩
धनु > 05:10 से 07:10 तक
मकर > 07:10 से 08:56 तक
कुम्भ > 08:56 से 10:28 तक
मीन > 10:28 से 11:58 तक
मेष > 11:58 से 13:38 तक
वृषभ > 13:38 से 15:36 तक
मिथुन > 15:36 से 17:48 तक
कर्क > 17:48 से 20:06 तक
सिंह > 20:06 से 22:16 तक
कन्या > 22:16 से 00:42 तक
तुला > 00:42 से 02:42 तक
वृश्चिक > 02:42 से 05:02 तक
विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार:-आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें:-
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषुच l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
अग्नि वास ज्ञान :-
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,नैवाग्निचक्रंपरिचिन्तनियं
महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
15 + 15 + 2 + 1 = 33 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
केतु ग्रह मुखहुति
शिव वास एवं फल -:
30 + 30 + 5 = 65 ÷ 7 = 2 शेष
गौरी सन्निधौ = शुभ कारक
भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
सोमवती अमावस्या
दर्श अमावस्या
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत् ।
खगा वीतफलं वृक्षं भुक्त्वाचाभ्यागतोगृहम् ।।
।। चा o नी o।।
वेश्या को निर्धन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए, प्रजा को पराजित राजा को त्याग देना चाहिए, पक्षियों को फलरहित वृक्ष त्याग देना चाहिए एवं अतिथियों को भोजन करने के पश्चात् मेजबान के घर से निकल देना चाहिए।
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -: भक्तियोग अo-12
यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।,
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥,
जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है तथा जो शुभ और अशुभ सम्पूर्ण कर्मों का त्यागी है- वह भक्तियुक्त पुरुष मुझको प्रिय है॥,17॥,
💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष-यात्रा मनोरंजक रहेगी। कोई बड़ा काम होने से प्रसन्नता रहेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। समय अनुकूल है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। परिवार के साथ समय प्रसन्नतापूर्वक व्यतीत होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। जल्दबाजी न करें।
🐂वृष-भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। किसी बड़े काम को करने की योजना बनेगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। व्यापार लाभदायक रहेगा। घर-परिवार में कोई मांगलिक कार्य का आयोजन हो सकता है। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा।
👫मिथुन-मित्रों का सहयोग करने का मौका प्राप्त होगा। मेहनत का फल मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। अपरिचितों पर अंधविश्वास न करें। कारोबार ठीक चलेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य अनुकूल है। समय का लाभ लें।
🦀कर्क-विवाद को बढ़ावा न दें। कानूनी अड़चन से सामना हो सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। दौड़धूप से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। आय बनी रहेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। जोखिम न लें।
🐅सिंह-रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। पार्टी व पिकनिक का आयोजन हो सकता है। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें।
🙍♀️कन्या-स्थायी संपत्ति के कार्य मनोनुकूल लाभ देंगे। किसी बड़ी समस्या का हल सहज ही प्राप्त होगा। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का सहयोग मिलेगा। भाग्य अनुकूल है। व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। शत्रुओं का पराभव होगा। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं। प्रसन्नता रहेगी।
⚖️तुला-किसी व्यक्ति विशेष का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार लाभदायक रहेगा। पारिवारिक सदस्यों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। नौकरी में मातहतों से अनबन हो सकती है। शारीरिक कष्ट संभव है। जल्दबाजी से हानि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। धन प्राप्ति सुगम होगी।
🦂वृश्चिक-चोट व दुर्घटना से बड़ी हानि हो सकती है। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। किसी अपरिचित व्यक्ति पर अतिविश्वास न करें। किसी भी प्रकार के विवाद में न पड़ें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यापार ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। मित्रों के साथ समय अच्छा व्यतीत होगा।
🏹धनु-तीर्थदर्शन की योजना फलीभूत होगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। आत्मशांति रहेगी। यात्रा संभव है। व्यापार ठीक चलेगा। संपत्ति के कार्य मनोनुकूल लाभ देंगे। नौकरी में चैन रहेगा। दूसरों की जवाबदारी न लें। थकान रह सकती है।
🐊मकर-कार्यस्थल पर परिवर्तन की योजना बनेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। ऐश्वर्य व आरामदायक साधनों पर व्यय होगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाजी से बचें। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी।
🍯कुंभ-डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। शेयर मार्केट में जल्दबाजी न करें। व्यापार लाभदायक रहेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। चोट व रोग से कष्ट संभव है। प्रमाद न करें।
🐟मीन-स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। फालतू खर्च होगा। किसी के व्यवहार से क्लेश होगा। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। आय में निश्चितता रहेगी। नौकरी में कार्यभार बढ़ेगा। सहकर्मी साथ नहीं देंगे। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे।
🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें और क्या नहीं करें, जानें
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। इस दिन पितरों का तर्पण व पिंडदान भी किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस बार सोमवती अमावस्या पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे अमावस्या का महत्व काफी बढ़ जाता है। सोमवती अमावस्या पर कुछ उपाय करने से आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है। इसलिए अगर आप भी पैसों से जुड़ी प्रॉब्लम्स से परेशान हैं तो मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पानी के लिए सोमवती अमावस्या पर जरूर करें ये उपाय-
जानें सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें और क्या नहीं करना चाहिए-
1.सोमवती अमावस्या पितरों की शांति के लिए शुभ मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
2.सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखना अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है।
3.सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव का पूजन व उनका जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र,शहद,दही,चंदन व फल आदि भी अर्पित करने चाहिए।
4.अमावस्या के दिन भगवान सूर्य को जल अर्पित करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से स्वस्थ सेहत व आर्थिक खुशहाली मिलती है।
5.अमावस्या के दिन गरीब व जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना चाहिए। इस दिन अनाज,गर्म वस्त्र व कंबल आदि का दान करना शुभ माना गया है।
सोमवती अमावस्या के दिन क्या न करें-
1.सोमवती अमावस्या के दिन गृहकलह नहीं करना चाहिए।
2.इस दिन किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए।
3.इस दिन तामसिक वस्तुओं से दूरी रखनी चाहिए।
4.सोमवती अमावस्या के दिन काली वस्तुओं के दान से बचना चाहिए।
सोमवती अमावस्या उपाय
सोमवती अमावस्या के दिन घर के ईशानकोण में घी का दीपक जलाएं। ध्यान रखें की ये दीपक सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक जलता रहे। इस दिन घी के दीपक में केसर और लौंग के 2 दाने डालकर जलाने से माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और आर्थिक तंगी दूर करने में मदद मिलती है।
1.सोमवती अमावस पर माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सुबह पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें।
2.सोमवती अमावस्या के दिन घर की सुख शांति को बनाए रखने के लिए गाय की सेवा करें। इस दिन पशुओं को भूलकर भी परेशान नहीं करना चाहिए।
3.अपने घर की नकारात्मकता को दूर भागने के लिए पानी में नमक मिलाकर पोछा लगाएं या साफ-सफाई करें।
4.अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए इस दिन 108 बार तुलसी की माला से गायत्री मंत्र का जाप करें।
5.वहीं,शाम के वक्त तिल के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं और परिक्रमा भी करें।
पितृ-शांति उपाय
पितरों को खुश करने और पितृ दोष से राहत पाने के लिए सोमवती अमावस्या का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन दान-पुण्य और श्राद्ध कर्म करने से पितरों को खुश किया जा सकता है। इसलिए किसी गरीब को वस्त्र, फल आदि दान करें। वहीं, सूर्यास्त होने के बाद दक्षिण दिशा में सरसों के तेल में काला तिल डालकर दीपक जलाएं। इस दिन पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ करने से पितरों का आशीर्वाद मिल सकता है।
नोट-इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
















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