सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
🙏आज का पंचांग🙏
दिनांक:- 26/12/2024, गुरुवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष,
पोष “”””””””(समाप्ति काल)
तिथि——–एकादशी 24:43:21 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र———- स्वाति 18:08:38
योग———– सुकर्मा 22:22:25
करण————- बव 11:39:30
करण———- बालव 24:43:21
वार———————- गुरूवार
माह———————— पौष
चन्द्र राशि—————- तुला
सूर्य राशि—————– धनु
रितु———————– शिशिर
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर (उत्तर) ————-कालयुक्त
विक्रम संवत————– 2081
गुजराती संवत———— 2081
शक संवत—————- 1946
कलि संवत—————- 5125
वृन्दावन
सूर्योदय————– 07:09:10
सूर्यास्त————— 17:30:51
दिन काल———— 10:21:41
रात्री काल———— 13:38:41
चंद्रास्त————– 13:51:49
चंद्रोदय—————- 27:43:55
लग्न—- धनु 10°34′ , 250°34′
सूर्य नक्षत्र—————— मूल
चन्द्र नक्षत्र—————– स्वाति
नक्षत्र पाया—————— रजत
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
रो—- स्वाति 11:29:06
ता—- स्वाति 18:08:38
ती—- विशाखा 24:46:22
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= वृश्चिक 10°40, मूल 4 भी
चन्द्र=तुला 14°30 , स्वाति 3 रो
बुध =वृश्चिक 18°52 ‘ ज्येष्ठा 1 नो
शु क्र= मकर 27°05, धनिष्ठा’ 2 गी
मंगल=कर्क 09°30 ‘ पुष्य ‘ 2 हे
गुरु=वृषभ 19°30 रोहिणी, 3 वी
शनि=कुम्भ 19°58 ‘ शतभिषा , 4 सू
राहू=(व) मीन 07°40 उo भा o, 2 थ
केतु= (व)कन्या 07°40 उ oफा o 4 पी
🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮
राहू काल 13:38 – 14:55 अशुभ
यम घंटा 07:09 – 08:27 अशुभ
गुली काल 09:45 -11: 02अशुभ
अभिजित 11:59 – 12:41 शुभ
दूर मुहूर्त 10:36 – 11:18 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:45 – 15:27 अशुभ
वर्ज्यम 24:20* – 26:06 अशुभ
प्रदोष 17:31 – 20:17 शुभ
चोघडिया, दिन
शुभ 07:09 – 08:27 शुभ
रोग 08:27 – 09:45 अशुभ
उद्वेग 09:45 – 11:02 अशुभ
चर 11:02 – 12:20 शुभ
लाभ 12:20 – 13:38 शुभ
अमृत 13:38 – 14:55 शुभ
काल 14:55 – 16:13 अशुभ
शुभ 16:13 – 17:31 शुभ
चोघडिया, रात
अमृत 17:31 – 19:13 शुभ
चर 19:13 – 20:56 शुभ
रोग 20:56 – 22:38 अशुभ
काल 22:38 – 24:20* अशुभ
लाभ 24:20* – 26:03* शुभ
उद्वेग 26:03* – 27:45* अशुभ
शुभ 27:45* – 29:27* शुभ
अमृत 29:27* – 31:10* शुभ
होरा, दिन
बृहस्पति 07:09 – 08:01
मंगल 08:01 – 08:53
सूर्य 08:53 – 09:45
शुक्र 09:45 – 10:36
बुध 10:36 – 11:28
चन्द्र 11:28 – 12:20
शनि 12:20 – 13:12
बृहस्पति 13:12 – 14:04
मंगल 14:04 – 14:55
सूर्य 14:55 – 15:47
शुक्र 15:47 – 16:39
बुध 16:39 – 17:31
होरा, रात
चन्द्र 17:31 – 18:39
शनि 18:39 – 19:47
बृहस्पति 19:47 – 20:56
मंगल 20:56 – 22:04
सूर्य 22:04 – 23:12
शुक्र 23:12 – 24:20
बुध 24:20* – 25:28
चन्द्र 25:28* – 26:37
शनि 26:37* – 27:45
बृहस्पति 27:45* – 28:53
मंगल 28:53* – 30:01
सूर्य 30:01* – 31:10
🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩
धनु > 05:26 से 07:26 तक
मकर > 07:26 से 09:12 तक
कुम्भ > 09:12 से 10:44 तक
मीन > 10:44 से 12:14 तक
मेष > 12:14 से 13:54 तक
वृषभ > 13:54 से 15:52 तक
मिथुन > 15:52 से 18:04 तक
कर्क > 18:04 से 20:22 तक
सिंह > 20:22 से 22:32 तक
कन्या > 22:32 से 00:58 तक
तुला > 00:58 से 02:58 तक
वृश्चिक > 02:58 से 05:18 तक
विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषुच
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय:
अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,नैवाग्नि चक्रंपरिचिन्तनियं
महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत्
15 + 11 + 5 + 1 = 32 ÷ 4 =0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
राहु ग्रह मुखहुति
शिव वास एवं फल -:
26 + 26 + 5 = 57 ÷ 7 = 1 शेष
कैलाश वास = शुभ कारक
भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
द्वितीय गुरुवार मेला लक्ष्मी जी वेलवन (वृन्दावन)
सफला एकादशी व्रत (सर्वेषां)
कल्पवास प्रारम्भ (मेला प्रयागराज)
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
श्लोकेन वा तदर्धेन पादेनैकाक्षरेण वा ।
अवन्घ्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ।।
।। चा o नी o।।
ऐसा एक भी दिन नहीं जाना चाहिए जब आपने एक श्लोक, आधा श्लोक, चौथाई श्लोक, या श्लोक का केवल एक अक्षर नहीं सीखा, या आपने दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य नहीं किया।
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -: भक्तियोग अo-12
श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्धयानं विशिष्यते ।
ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥
मर्म को न जानकर किए हुए अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है, ज्ञान से मुझ परमेश्वर के स्वरूप का ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यान से सब कर्मों के फल का त्याग (केवल भगवदर्थ कर्म करने वाले पुरुष का भगवान में प्रेम और श्रद्धा तथा भगवान का चिन्तन भी बना रहता है, इसलिए ध्यान से ‘कर्मफल का त्याग’ श्रेष्ठ कहा है) श्रेष्ठ है, क्योंकि त्याग से तत्काल ही परम शान्ति होती है॥,12॥,
💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष-मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। दूर रहने वाले व्यक्तियों से संपर्क के कारण लाभ हो सकता है। नई योजनाओं का सूत्रपात होने के योग हैं। कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। व्यर्थ संदेह न करें। मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा।
🐂वृष-व्यवसाय ठीक चलेगा। अर्थ प्राप्ति के योग बनेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। राजकीय बाधा दूर होगी। बेचैनी रहेगी। विवादों से दूर रहना चाहिए। पिता से व्यापार में सहयोग मिल सकेगा। सरकारी मसले सुलझेंगे। सकारात्मक सोच बनेगी।
👫मिथुन-जोखिम व जमानत के कार्य टालें, बाकी सामान्य रहेगा। प्रयास अधिक करने पर भी उचित सफलता मिलने में संदेह है। कार्य में विलंब के भी योग हैं। आर्थिक हानि हो सकती है। पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण रहेगा। चोट, चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है।
🦀कर्क-यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। रुके धन के लिए प्रयत्न जरूर करें। कार्य का विस्तार होगा। दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप से बचें। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। विलासिता के प्रति रुझान बढ़ेगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। अध्यात्म में रुचि रहेगी।
🐅सिंह-संपत्ति की खरीद-फरोख्त हो सकती है। आय बढ़ेगी। मन में उत्साहपूर्ण विचारों के कारण समय सुखद व्यतीत होगा। मकान व जमीन संबंधी कार्य बनेंगे। अनायास धन लाभ के योग हैं। व्यापार में वांछित उन्नति होगी। बेरोजगारी दूर होगी। विवाद न करें।
🙎♀️कन्या-कार्यस्थल पर परिवर्तन लाभ में वृद्धि करेगा। योजना फलीभूत होगी। नए अनुबंध होंगे। कष्ट होगा। पारिवारिक जिम्मेदारी बढ़ने से व्यस्तता बढ़ेगी। कार्य में नवीनता के भी योग हैं। संतान के व्यवहार से समाज में सम्मान बढ़ेगा। स्वास्थ्य खराब हो सकता है।
⚖️तुला-रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। किसी बड़े कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। प्रसन्नता बनी रहेगी। नए कार्यों से जुड़ने का योग बनेगा। पारिवारिक जीवन सुखद नहीं रहेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा। इच्छित लाभ होगा। नौकरी में कार्य की प्रशंसा हो सकती है।
🦂वृश्चिक-शत्रु सक्रिय रहेंगे। कुसंगति से हानि होगी। व्ययवृद्धि होगी। लेन-देन में सावधानी रखें, जोखिम न लें। किसी शुभचिंतक से मेल-मुलाकात का हर्ष होगा। संतान की आजीविका संबंधी समस्या का हल निकलेगा। लापरवाही से काम न करें।
🏹धनु-किसी कार्य में प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से जुड़ने की प्रवृत्ति आपके लिए शुभ रहेगी। राज्यपक्ष से लाभ होगा। अपने काम से काम रखें। दांपत्य सुख प्राप्त होगा। बुरी खबर मिल सकती है। विवाद को बढ़ावा न दें। भागदौड़ रहेगी। आय में कमी होगी।
🐊मकर-यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। डूबी हुई रकम प्राप्त होगी। आय में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। आकस्मिक लाभ व निकटजनों की प्रगति से मन में प्रसन्नाता रहेगी। परिश्रम से स्वयं के कार्यों में भी शुभ परिणाम आएँगे। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें।
🍯कुंभ-नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। परीक्षा आदि में सफलता मिलेगी। पारिवारिक कष्ट एवं समस्याओं का अंत संभव है। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। आय से अधिक व्यय न करें। परोपकार में रुचि बढ़ेगी।
🐟मीन-मेहमानों का आवागमन होगा। व्यय होगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। प्रसन्नता रहेगी। अपने प्रयासों से उन्नति पथ प्रशस्त करेंगे। बुद्धि चातुर्य से कठिन कार्य भी आसानी से बनेंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। व्यर्थ समय नष्ट न करें। रुका पैसा मिलेगा।
आपका दिन मंगलमय हो

🚩 सफला एकादशी 2024 🚩
🌷🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🌷
सभी सनातन प्रेमियों को सफला एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं
पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 25 दिसंबर की रात 10 बजकर 29 मिनट से हो रही है। अगले दिन 26 दिसंबर रात 12 बजकर 43 मिनट पर इस तिथि का समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार सफला एकादशी का व्रत गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
सफला एकादशी व्रत का पारण
सफला एकादशी के व्रत का पारण… 27 दिसंबर शुक्रवार के दिन सुबह 7 बजकर 12 मिनट से सुबह 9 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकता है।
युधिष्ठिर ने पूछा-स्वामिन् पौष मास के कृष्णपक्ष गुजमहा के लिए मार्गशीर्ष में जो एकादशी होती है,उसका क्या नाम है? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता की पूजा की जाती है ? यह बताइये
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-राजेन्द्र बड़ी बड़ी दक्षिणावाले यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता,जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। पौष मास के कृष्णपक्ष में सफला नाम की एकादशी होती है। उस दिन विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए।
सफला एकादशी व्रत कथा-
व्रत की कथा अनुसार चम्पावती नगरी में महिष्मत नाम के राजा के पांच पुत्र थे। बड़ा पुत्र चरित्रहीन था और देवताओं की निन्दा करता था। मांस भी खाता था और उसमें कई बुराईयां भी थीं,जिससे राजा और उसके भाइयों ने उसका नाम लुम्भक रखा था,इसके बाद उसके भाईयों ने उसे राज्य से बाहर निकाल दिया। इसके बाद भी वह नहीं माना और उसने अपने ही नगर को लूट लिया। एक दिन उसे चोरी करते सिपाहियों ने पकड़ा,पर राजा का पुत्र जानकर छोड़ दिया। फिर वह वन में एक पीपल के नीचे रहने लगा। पौष की कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह सर्दी के कारण बहुत कमजोर हो गया,उसमें खाना लाने की भी शक्ति नहीं थी,ऐसे में उसे कुछ फल तोड़े लेकिन रात होने के कारण खा ना सका, और यह बोल दिया कि भगवान अब आप ही इसे खा लो। इस तरह रातभर जागकर उसने रात बिताई। इस प्रकार रात्रि जागरण और दिनभर भूखे रहने के कारण उससे सफला एकादशी का व्रत हो गया। तब उसे सफला एकादशी के प्रभाव से राज्य और पुत्र का वरदान मिला। इससे लुम्भक का मन अच्छे की ओर प्रवृत्त हुआ और तब उसके पिता ने उसे राज्य प्रदान किया। उसे मनोज्ञ नामक पुत्र हुआ, जिसे बाद में राज्यसत्ता सौंप कर लुम्भक खुद विष्णु भजन में लग कर मोक्ष प्राप्त करने में सफल रहा।


















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