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पेट में पल रहे बच्चे का आकार बढ़ाकर पूरे परिवार को खिलाया बैल के निकलने से रो पड़ा गांव

रिपोर्टर प्रफुल पाटिल

पेट में पल रहे बच्चे का आकार बढ़ाकर पूरे परिवार को खिलाया बैल के निकलने से रो पड़ा गांव।


बलीराजा ने सरजा का कर्ज चुकाया और शवयात्रा रद्द कर दी उत्तर कार्य ने पूरे गांव को खाना खिलाया अंबापुर के किसान ने अपनी मानवता बचाई।
नंदूरबार,किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका दाह संस्कार पिंडदान दशक्रीया तेरहवां आदि संस्कार किए जाते हैं।लेकिन शहादा तालुका के अंबापुर के एक किसान ने अंतिम शव यात्रा निका लकर उसे विदाई दी।
दिलचस्प बात यह है कि इस बैल का नाम भी, धर्मराज , रखा गया था। 15 साल पहले इस परिवार ने आवारा बछड़े को बच्चे की तरह पाला था,और किसान के साथ मिलकर पूरे परिवार का भरण पोषण भी किया था धर्मराज का इस तरह चले जाना अंबापुर के जगदाले परिवार के लिए एक झटका था।इस लिए मरने के बाद भी धर्मराज। गांव से शव यात्रा निकाली गई सेकडों की संख्या में ग्रामीण आ गए उन्होंने धर्मराज को अंतिम विदाई दी।कल उत्तर कार्य ने सेकडो ग्रामीणों को खाना खिलाया.
जीवन भर अपने परिवार के लिए काली मिट्टी में रहने वाले सरजा के ऋण के चुकाने के लिए बलीराजा द्वारा बनाए गए मानव के दर्शन पूरे श्रेत्र में देखे जा रहे।
शहादा तालुका के अंबापुर के किसान मोतीराम देवाराम के घर 15 साल पहले एक बछड़ा आया था, यह चूक गया,मोतीराम जगदाले ने उन्हें एक बच्चे की तरह पाला।उन्होंने उसका नाम धर्मराज रखा। धर्मराज बड़ा हे।
जब में 11 वी कक्षा में था तब संयोग से धर्मराज हमारे घर आए । मेरे पिता मोतीराम जगदाले उनका बेटे की तरह ख्याल रखते थे।आज हम अपनी सरजा के निधन से दुखी हैं।
हमने उसके साथ कभी जानवर जैसा व्यवहार नहीं किया।
हम सभी परिवार उससे इतना प्यार करते थे कि वह परिवार का सदस्य बन गया।
धर्मराज ने बारिश की शुरुआत से लेकर गर्मियों के अंत तक कड़ी मेहनत की ताकि उसका एहसान कभी पूरा न हो। इसके बाद वह जगदाले परिवार के लिए भाग्यशाली बन गए।जब घर के लोग उसके पास आते थे तो वह गुर्राने लगता था,लेकिन जब बाहरी लोग छुट्टे कुत्ते आ जाते थे तो वह वहशी हो जाता था।इससे धर्मराज पूरे गांव में मशहूर हो गया।इस बारे में जगदाले परिवार का कहना है कि पिछले 15 सालो में हमारे सभी परिवारों की तरह धर्मराज ने भी कड़ी मेहनत की ।हमने इसे लिए ओर इसी कारण हम आगे बढ़े।सरजा का कर्ज चुकाने के लिए शवयात्रा निकाली गई,
कार्य का उत्तर दिया और गांव को भोजन दिया जगदाले परिवार द्वारा पूरे विधि= विधान के साथ जीवन पर्यंत बैल को अंतिम विदाई देकर मानवता ओर करुणा का परिचय दिया गया हे।यह अनोखा आभार शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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