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“बेटियों पर ही क्यों ? कुछ बंदिशें बेटों पर भी लगाएं तो बेटियां नि:संदेह सुरक्षित और बेटे संस्कारवान बनेंगे।”♦️

“बेटियों पर ही क्यों ? कुछ बंदिशें बेटों पर भी लगाएं तो बेटियां नि:संदेह सुरक्षित और बेटे संस्कारवान बनेंगे।”♦️

‼️मिशन शक्ति‼️

* ♦️लड़कियों पर पाबंदी लगाने के बजाय क्यों न एक ऐसा जिम्मेदार समाज तैयार करें जहां हर बेटी खुलकर सांस ले सके और अपनी मर्जी और सहूलियत से घर आ जा सके, उसे न अकेले चलते डर लगे न अकेले रहते।

संवाददाता जयचन्द्र कासगंज

कासगंज :- उत्तर प्रदेश शासन द्वारा महिलाओं/बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वालंबन हेतु चलाये जा रहे मिशन शक्ति अभियान (फेज-05) के तहत पुलिस अधीक्षक कासगंज अपर्णा रजत कौशिक के निर्देशन एवं नोडल अधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक राजेश भारती के पर्यवेक्षण में जनपद के समस्त थाना क्षेत्रांतर्गत महिला बीट पुलिस अधिकारियों द्वारा गांव, कस्बा, स्कूल, कालेज, बस स्टैण्ड सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर भ्रमण कर प्राथमिकता के आधार पर महिला एवं बालिकाओं को जागरुक करने के साथ ही महिला संबंधित समस्याओं के निस्तारण कराने के संबंध में जनजागरुकता अभियान चलाया जा रहा है तथा महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ जुड़कर उन्हें सशक्त एवं सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्रम में आज जनपदीय महिला बीट पुलिस अधिकारियों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर बेटों और बेटियों पर पाबंदियों के संबंध में विस्तृत से बात की गई। पुलिस टीम द्वारा बताया गया कि लड़कियों को बंदिशों की इन बेडियों में जकड़ने से हम उनकी आजादी पर तो बंदिश लगा ही रहे हैं, उनके हौसलों और इच्छाओं को भी समाज की गैरजरूरी बंदिशों तले दबा रहे हैं। आखिर जब एक लड़का देर रात तक घर से बाहर रह सकता है चाहे वो काम के नाम पर हो या घूमने फिरने के तो फिर लड़कियों को भी ऐसा सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, क्या वह बराबरी की हकदार नहीं है। उस पर लगाम लगाने से अच्छा, क्यों न हम अपने बेटों को इसके लिए तैयार करें कि वह लड़कियों के प्रति अपना नजरिया बदलें। इसके साथ ही हिंसा के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर बताया गया कि घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 का मुख्य उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना है और पीड़ित महिलाओं को विधिक सहायता उपलब्ध कराना है। महिलाओं और बच्चियों पर घरेलू परिवेश में अत्याचार निंदनीय है और कानूनन अपराध भी। मिशन शक्ति के तहत महिला एवं बालिकाओं को घरेलू हिंसा के मामलों में तत्काल स्थानीय पुलिस, यूपी-112 अथवा 1090 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, इसके साथ ही मामूली विवादों में झूठे मुकदमे न लिखाने, महिला एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वस्थ्य रिलेशनसिप एवं महिलाओं की सुरक्षा सहायता हेतु निर्मित न्यायिक कानूनों का दुरुपयोग एवं झूठे मुकदमों के परिणाम, साइबर हिंसा, प्रेम सम्बन्धों में घर से पलायन तथा नशीली वस्तुओं का सेवन न करने एवं नशे के कारण परिवार को होने वाली शारीरिक, आर्थिक व सामाजिक क्षति के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए जागरूक किया गया। नशे की लत छोड़ने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति जागृत करने एवं नशामुक्ति विशेषज्ञों एवं परिवार के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन कराये जाने हेतु अवगत कराया गया एवं नशा मुक्ति सम्बन्धित पंपलेट वितरित किए गए, इसके साथ ही शासन द्वारा संचालित विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों एवं कानूनी प्रावधानों एवं उनके अधिकारों इत्यादि के बारे में चर्चा करते हुए जागरुक किया गया है ।

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