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खंडहरों में तब्दील बरेली पशु अस्पताल सुविधाये शून्य इलाज के लिए भटकते हैं पशु पालक

 संवाददाता तखत सिंह परिहार

खंडहरों में तब्दील बरेली पशु अस्पताल सुविधाये शून्य इलाज के लिए भटकते हैं पशु पालक

बरेली नगर में स्थित बर्षो पुराना पशु अस्पताल जो की पिछले चार-पांच दशकों से अपनी हालत पर चिंतित है ना तो इस अस्पताल की अभी तक मरम्मत हुई़ है और ना ही अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ, ना ही इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं, अब इस स्थिति में बरेली नगर का एकमात्र पशु अस्पताल जिससे काई गांव के भी पशु पालक जुड़े हुए हैं, नगर ही नहीं आसपास के गांव से इलाज के लिए अपेक्षा रखने वाले पशु मालिकों का इस अस्पताल को देखकर कहना है कि जब हम अपने पशुओं को इलाज के लिए इस अस्पताल में लेकर आते हैं तब ना तो अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं मिलती ना ही स्टाफ मौजूद रहता है, नगर एवं प्रदेश के अधितर पशु अस्पतालों केयही हाल हैं, मध्य प्रदेश के पशु अस्पतालों में भवन तो छोड़िए इलाज की सुविधा शून्य पड़ी है अब इस स्थिति में अगर कोई पशु बीमार पड़ जाए या किसी दुर्घटना का शिकार हो जाए तो पशुपालकों को अस्पतालों में इलाज के लिये भटकना पड़ता है परंतु प्राथमिक उपचार के अलावा जटिल समस्याओं का उपचार नहीं होने से सिर्फ पशु मालिकों के पास भटकने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहता, स्टाफ की कहे तो शासकीय सेवा में विभागीय कर्मचारी एवं पदाधिकारी जो की अधकतर अपनी ड्यूटी से नदारद पाएजाते हैं सिर्फ औपचारिकता के लिए अपने काम पर आते हैं ड्यूटी समय में भी यह पदाधिकारी निजी उपचार के लिए अपनी ड्यूटी छोड़कर चले जाते हैं जिससे इनको निजी उपचार करने पर ऊपरी इनकम भी हो जाती है, बरेली नगर में लगभग 1 2 ऐसी संस्थाएं हैं जो गौ सेवा का कार्य प्राथमिकता से कर रही है जिसमें टीम पहल गायों के इलाज के लिए पूर्ण प्राथमिकता से समर्पित है अब इस टीम पहल के सदस्यों द्वारा जो गौ सेवा की जा रही है जिसमें इलाज के अलावा और भी सेवाएं शामिल हैं टीम पहल द्वारा जब इस कार्य को किया जा रहा है तो शासकीय अस्पताल का बोझ काम हो गया है इसी कारण अस्पताल के पदाधिकारी और कर्मचारियों को सहारा मिल गया है जिससे यह अपने काम पर ध्यान नहीं देते ओर लापरबा हो गये कई बार तो पशु पालक अपने पशु की गंभीर बीमारी को लेकर अस्पताल आते हैं परंतु प्राथमिक उपचार कर उनको अन्य जगह इलाज के लिए कह दिया जाता है अगर कोई पशु रात में बीमार हो जाए तो ना तो अस्पताल में कर्मचारी रहते हैं और ना ही गेट का ताला खुलता शासकीय अवकाश के दौरान तो अस्पताल में कोई कर्मचारी ही नहीं रहता जिससे पशु मालिक भटकते रहते हैं

जर्जर होते भवन

अब बात करें अस्पतालों के भबनो की तो बर्षो से ना तो इनकी मरम्मत हुई, वर्षों से बस इसी स्थिति में हैं जहाँ दिखाबे के लिए इक्का दुक्का पशु भर्ति है पुराने छप्पड़ मैं पक्की छत नही होने से वर्षा काल में पानी के रिसाब से असुविधा का सामना करना पड़ता है पशु आहार की भी उचित व्यवस्था नही पक्का छत बस छत के नाम पर छप्पड़ के अलावा कुछ नहीं है जिसमें से बारिश के समय निरंतर पानी टपकता रहता है पिछली दीवाल धराशाही हो चुकी है पिछले चार-पांच दशकों से अस्पताल अपनी स्थितियों पर चिंतित है परंतु इस अस्पताल का ना तो जीणोद्धार हो रहा ना ही इस अस्पताल में कोई विशेष सुविधाएं उपलब्ध अब तो यह अस्पताल खंडहरों में तब्दील होने जा रहा है जर्जर होता भबन अपने इतिहास की दनीय दशा को दर्शा रहा नवीन भावनों के निर्माण के लिए ना तो शासन से कोई आदेश जारी है,ना इस और शासन प्रशासन ध्यान दे रहा,

समय पर नहीं आती है एंबुलेंस

जब किसी पशु की तबीयत बिगड़ी है और वह नाजुक हालत में होता है तो पशु मालिकों द्वारा 1962 एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन लगाया जाता है परंतु फोन करने के बाद भी घंटो एंबुलेंस का पता ही नहीं चलता जब तक पशु तड़पता रहता है एंबुलेंस बुलाने के लिए भी बहुत मुश्किल से जब फोन लगता है तो विभाग द्वारा कई औपचारिक जानकारी पुरी की जाती है इसके बाद घंटो इंतजार करने के बाद एम्बुलेंस भेजी जाती है तब तक पशु की जान ही खत्म हो जाती है हालांकि शासन द्वारा चलित पशु वाहनों की व्यवस्था की गई है परंतु लाखों करोड़ों का ईंधन सिर्फ इधर से उधर घूमने में व्यर्थ करते विभाग के कर्मचारी खाली एंबुलेंस को यहां से वहां घूमने में लगे हुए हैं और अपने निजी कामों में उनका उपयोग कर रहै है

गोसेवक निभा रहे अपना फर्ज

वैसे तो गो सेवकों की शासकीय भर्ती नहीं हुई परंतु डिप्लोमा धारी गोसेवक जो की आशासकीय रूप से इस विभाग की लगातार मदद करने में लगे हुए हैं विभाग द्वारा भर्ती प्रक्रिया ना होने के कारण अशासकीय गौ सेवको से बिभाग द्वार समय समय पर सेबा ली जाती है परंतु काम के मुताबिक इन गो सेवकों को भुगतान नहीं हो पता विभागीय भर्तीयों की कमी होने के कारण इन गो सेवकों को रात दिन तो मेहनत करनी पड़ती है परंतु मेहनत के मुताबिक अभी तक इन को स्थाई नौकरियां नहीं दी गई चाहे वह गो पेट्रोलिंग हो या अन्य कोई विभागिय काम जिसमें यह गोसेवक पूर्ण रूप से अपना दायित्व निभा रहे हैं

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