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बहुचर्चित अधिवक्ता हत्याकांड में हाईकोर्ट नें एसपी सुलतानपुर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर घटना की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दिया सख्त आदेश

परवेज आलम खान
( रिपोर्टर )सत्यार्थ न्यूज़ सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश

बहुचर्चित अधिवक्ता हत्याकांड में हाईकोर्ट नें एसपी सुलतानपुर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर घटना की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दिया सख्त आदेश

सत्यार्थ न्यूज़ सुलतानपुर:बहुचर्चित अधिवक्ता हत्या कांड: हाईकोर्ट ने एसपी सुल्तानपुर को तलब किया, व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश

सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड व पुलिसकर्मियों की लोकेशन रिपोर्ट 28 जुलाई तक पेश करने के निर्देश

(सुलतानपुर) बहुचर्चित अधिवक्ता महेंद्र प्रताप मौर्य हत्याकांड में नामजद किए गए विकास पाल और उनके बड़े पिता राजाराम पाल की गिरफ्तारी पर सवाल खड़ा करते हुए याची बबिता पाल द्वारा दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुल्तानपुर पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कोर्ट ने एसपी सुलतानपुर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर घटना की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तिथि 28 जुलाई निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट ने अखण्डनगर थाने से जुड़ी आठ जून की रात 11:50 बजे से लेकर 10 जून की रात 11:50 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज पेन ड्राइव में सुरक्षित कर प्रस्तुत करने, और मामले से जुड़े थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
याची बबिता पाल ने याचिका में आरोप लगाया है कि उनके पति विकास पाल और बड़े ससुर राजाराम पाल को अखण्डनगर पुलिस ने सुनियोजित साजिश के तहत झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा है। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी दीपक कुशवाहा, एसआई कन्हैया कुमार पांडेय, हेड कांस्टेबल अनिल मौर्य, कांस्टेबल प्रदीप कुमार व धर्मेन्द्र समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से आरोपियों को फर्जी तरीके से हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर इनकाउंटर की धमकी दी और फर्जी बरामदगी दर्शाकर जेल भेज दिया।
ज्ञात हो कि अखण्डनगर थानाक्षेत्र के मरुई किशुनदासपुर निवासी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप मौर्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई सीताराम मौर्य द्वारा दर्ज प्राथमिकी में 3-4 अज्ञात हमलावरों का जिक्र किया गया और जमीन विवाद को लेकर राजाराम पाल पर संदेह जताया गया था। पुलिस ने उसी आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए राजाराम व विकास पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अब जब मामले में उच्च न्यायालय ने साक्ष्य सुरक्षित रखने, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और जांच एजेंसी बदलने की याची की मांग पर विचार किया है, तो जिले की पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में आ गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को भी आदेश की सूचना तत्काल देने का निर्देश दिया है।
यह प्रकरण अब न केवल एक हत्या के रहस्य की गहराइयों को छू रहा है, बल्कि पुलिसिया जांच की पारदर्शिता पर भी कठोर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है।
सत्यार्थ ब्यूरो न्यूज़ सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश

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