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संसार में मां और गुरु के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता है,

रिंगनोद से विजय प्रजापत कि रिपोर्ट

संसार में मां और गुरु के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता है,

मां और गुरु के द्वारा दी गई शिक्षा संस्कारों को ग्रहण करके इंसान देवतुल्य हो जाता है‌। मां और गुरु का श्रण महान है है जिसे इंसान को सदैव याद रखना चाहिए।
उक्त उद्गार सरदारपुर तहसील के ग्राम भोपावर में राठौर परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत सत्संग ज्ञान कथा अंतर्गत छटे दिन सोमवार को बदनावर के दुर्गा धाम परिवार के गुरुदेव मनीष भैय्या ने व्यक्त किये ।
श्री मारू कुमावत धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा समय दोपहर 12 बजे से 3:00 बजे तक में क्षेत्र के सैकड़ो भागवत प्रेमी कथा स्थल पर पहुंच कर धर्म लाभ ले रहे हैं। कथा अंतर्गत श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह मनाया गया। श्री कृष्ण एवं रुक्मणी बने पात्रों से विवाह रस्म कि अदायगी कर विवाह रस्मो का बारीकी से वर्णन कर उपस्थित धर्मावलंबीयो से आग्रह किया कि विवाह मुहूर्त के हिसाब से करें। शुभ लग्न में हुआ विवाह नवदंपति को सुख शांति खुशहाली देता है। नव दंपति का उज्जवल भविष्य रहता है। अतः विवाह में समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए
कथा के अंतिम दिन 28 जनवरी मंगलवार को भागवत कथा के समापन पर गांव के प्रमुख मार्गो से श्रीमद् भागवत ग्रंथ एवं गुरुदेव का सुसज्जित रथबग्गी में विराजित कर बैंड बाजे, ढोल के साथ नाच गान एवं कीर्तन के साथ भव्य शोभायात्रा निकल जाएगी। शोभायात्रा के कथा स्थल पुनः पहुंचाने के पश्चात महा आरती महाप्रसादी का आयोजन होगा।

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