ऊंचडीह वायरल विडियो मामले में पीड़ित के पिता ने पुलिस अधीक्षक से न्याय दिलाने की गुहार लगाया।
सोनभद्र, /सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह
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बहुचर्चित ऊंचडीह वायरल विडियो मामले में पीड़ित अमितेश पाण्डेय के पिता ने पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक द्वारा पत्र भेजकर घटी घटना का पुरा जिक्र करते हुए अमितेश को न्याय दिलाने की गुहार लगाया है।
पीड़ित अमितेश के पिता सुनील कुमार पाण्डेय ने पत्र के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को बताया कि ऊंचडीह गांव से दूर उनकी खेती की जमीन है जहां 23 जून को बेटा अमितेश गया तो सलैया गांव निवासी आशीष पुत्र अखिलेश वहां आम और शीशम का पेड़ काट रहा था। ऐसा देखकर अमितेश ने उसे डांटकर भगा दिया उस दिन। पुनः 27 जून को शाम छः बजे जब अमितेश खेत पर गया तो वहां कयी लोगों ने मिलकर अमितेश पर हमला कर दिया और एक साथ मिलकर उसका गला दबाकर उसे मारने की कोशिश करने लगे। अपना बचाव जब अमितेश ने किया तो खींचकर एक पेड़ से बांध दिया फिर मोटे डंडे, जूते चप्पल और अज्ञात हथियार से बेरहमी से मारने बताया कि हमलावरों ने अमितेश के पेट पर गंभीर वार किया जिससे वह बेहोश हो गया बावजूद इसके हमलावरों ने मारना जारी रखा। पीड़ित अमितेश के पिता सुनील कुमार पाण्डेय ने पत्र के माध्यम से यह भी बताया कि हमलावरों ने अमितेश को भद्दी भद्दी गालियां देते हुए जाति सूचक गालियां दीं और ब्राम्हण समाज पर अभद्र टिप्पणी करते रहे। हमलावरों ने जाति सूचक गालियां देते हुए हिंसा का पुरा विडियो भी खुद बनाया और अमितेश से कहा कि सोशल मीडिया पर इसे वायरल ( पोस्ट) कर पूरे जनपद में प्रसारित करते हुए तुम्हें और जाति को सबक सिखाएंगे। पुलिस अधीक्षक को भेजे गए पत्र में यह भी बताया कि गिरोह बनाकर लड़के को मार रहे लोगों ने अमितेश को धमकी भी दिया कि यदि एफआईआर दर्ज करवाया तो उसे एससी-एसटी एवं पोक्सो मामलों में फंसाया जायेगा। उन्होंने अमितेश को कैमरे के सामने उल्टा-सीधा बयान देने को विवश किया और घटना के बाद भी मानसिक रुप से प्रताड़ित किया। उक्त घटना के बाद अमितेश मानसिक आघात में था। पीड़ित के पिता ने बताया कि उक्त घटना की जानकारी उन्हें तब हुई जब सोशल मीडिया पर वायरल विडियो किया गया आरोपियों द्वारा। उसके बाद तत्काल तीन जुलाई को थाना रावर्रटसगंज जाकर पुलिस को घटना से अवगत कराया और उसी दिन एफआईआर भी दर्ज कर लिया गया। लेकिन एफआईआर में वर्णित धाराओं को देखकर आश्चर्य हुआ कि दर्ज एफआईआर संस्करण में कहीं भी अपराध की गंभीरता को नहीं दर्शाया गया है, इसे सिर्फ सामान्य हाथापाई माना गया है। पीड़ित के पिता ने लिखा है कि मेरे बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट करने और गला घोटकर उसे मारने की कोशिश करने के साथ उसके पेट पर गंभीर चोट करने के जघन्य अपराध के लिए अपराधियों पर लगाए गए आरोप से निराश होकर एफआईआर में सुधार का अनुरोध किया लेकिन थाना पुलिस द्वारा हमारे अनुरोध पर कोई कार्रवाई न करते हुए बाहर निकाल दिया गया। पिता सुनील पाण्डेय ने पुलिस अधीक्षक को भेजे गए पत्र में लिखा है कि यह मामला स्पष्ट रूप से माब लिंचिंग, हत्या का प्रयास , सांप्रदायिक हिंसा, आपराधिक साजिश, आईटी अधिनियम में अपराध, शारीरिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश, मानव शरीर पर हिंसा , गंभीर चोट का मामला है। इसकी जानकारी थाना पुलिस को दी गई थी लेकिन एफआईआर संस्करण में इन गंभीर आरोपों को नजरंदाज कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक को पूरी घटना क्रम से अवगत कराते हुए पीड़ित के पिता ने अमितेश को न्याय दिलाने की गुहार पुलिस अधीक्षक से लगाते हुए थाना पुलिस को एफआईआर में आवश्यक बदलाव करने की मांग किया है।


















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