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सोनभद्र – बी जे पी के लिए कठिन होगा आने वाला समय*- राकेश शरण मिश्र

*बी जे पी के लिए कठिन होगा आने वाला समय*- राकेश शरण मिश्र

सोनभद्र /सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

Mo 9580757830

एन डी ए को एक्जिट पोल में 370 से ऊपर सीट दिलाने वाले न्यूज चैनल वाले जहां पूरी तरह अपने अनुमान में फेल हुए वहीं गारंटी के साथ भविष्य वाणी करने वाले पंडितो को भी इस बार के अप्रत्याशित  लोकसभा परिणाम ने चारो खाने चित कर दिया। इस परिणाम ने यह साबित कर दिया की केवल कुछ हजार लोगो के सर्वे के बल पर पूरे देश के करोड़ों मतदाताओं के दिल में क्या है यह पता करना बहुत मुश्किल है। सर्वे एजेंसियों और भविष्यवक्ताओं को देश वासियों को गुमराह करने का खेल बंद करना चाहिए।

बहरहाल चुनावी अनुमान के विरुद्ध लोक सभा का जो अप्रत्याशित परिणाम आया है वो वास्तव में सभी को चौकाने वाला है। अबकी बार चार सौ पार का नारा देने वाली एन डी ए गठबंधन को बहुमत पाने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ेंगी ये एन डी ए के घटक दलों ने सोचा भी नही होगा। और ना ही बी जे पी ने सोचा होगा कि इस बार अकेले के दम पर वो बहुमत के आंकड़े 273 तक नही पहुंच पाएगी। भले ही एन डी ए गठबंधन के दम पर देश में तीसरी बार प्रधान मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे नरेंद्र मोदी जी अपनी सरकार बना ले पर जो उत्साह सरकार बनाने में बी जे पी समर्थको में होना चाहिए वो इस बार दिखाई नहीं पड़ रहा है। देश के कई राज्यों में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में इतना खराब प्रदर्शन करेंगी किसी ने नही सोचा होगा। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है कि बी जे पी ने जिस अयोध्या में राम मंदिर को लेकर पिछले कई वर्षो से अभूतपूर्व तैयारी की थी और मात्र चार माह पूर्व अयोध्या में भब्य राम मंदिर का पूरे जोर शोर के साथ पूजा पाठ करके दिब्य उद्घाटन समारोह किया जिसमे ना केवल पूरे भारत से बड़े बड़े वी आई पी आए बल्कि विदेशों से भी मीडिया वालो ने आकर राम मंदिर उद्घाटन का विश्व भर में सीधा प्रसारण कर मोदी जी की लोक प्रियता और धर्म एवम हिंदुत्व के प्रति उनका समर्पण पूरी दुनिया को दिखाया, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा तथा अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाने संवारने हेतु दिन रात काम किया और इसके बावजूद इसी अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाने के आंदोलन में कार सेवकों पर गोली चलवाने वाली सपा सरकार का प्रत्याशी बी जे पी के प्रत्याशी को हरा देता है। बी जे पी से आखिर कहां चूक हो गई कि अयोध्या की सीट भी हाथ से निकल गई। और तो और वाराणसी देश के प्रधान मंत्री जी की सीट वो भी बहुत मुश्किल से मोदी जी के खाते में आई है। इंडिया गठबंधन के  प्रत्याशी अजय राय ने इस बार जबर्दस्त टक्कर मोदी जी को दिया जबकि मोदी जी कम से कम दो महीने में एक बार वाराणसी अवश्य आते हैं और अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विकास में उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। चाहें वो वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण की बात हो या वाराणसी के गंगा घाटों के सुंदरी करण की बात हो या वाराणसी की सड़कों के चौड़ीकरण की बात हो। फिर भी ये निराशाजनक परिणाम आना बी जे पी के लिएअत्यंत विचारणीय है।

क्या इस बार के लोक सभा चुनाव में हिंदुत्व और राम मंदिर का कोई असर मतदाताओं पर नही हुआ। क्या गरीबों को मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, घर घर शौचालय योजना, किसान सम्मान योजना आदि तमाम योजनाओं का कोई फायदा बी जे पी को नहीं मिला। कुछ तो कमी हुई है आमजन को समझने में इस सरकार से। वही दूसरी तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन इंडिया का पूरे देश में  शानदार प्रदर्शन आखिर देश के भविष्य की राजनीति के बारे में क्या इशारा करता है। विपक्षी गठबंधन के घटक दल कुछ वर्षो पहले जहां एक दूसरे के घूर विरोधी थे आज मोदी को हराने के लिए एक साथ खड़े हो गए और काफी हद तक वे सफल भी रहे। बी जे पी को हराने में क्या केवल विपक्षी दलों की एकता काम आई या कही बी जे पी के अंदर खाने भी मोदी योगी और अमित शाह के विरुद्ध कोई षडयंत्र किया जा रहा है? कुछ भी संभव है। राजनीति में आने वाले अधिकांश नेता अवसरवादी होते हैं और निज स्वार्थ में अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु किसी भी हद तक दल के सिद्धांतो के विरुद्ध नीचे गिरकर कोई भी खेल किसी के विरुद्ध कर सकते हैं। बहरहाल मोदी जी भले ही एन डी ए गटबंधन के बल तीसरी बार प्रधान मंत्री बनकर सरकार बना ले लेकिन इस बार उनको और दल के शीर्ष नेताओं को बहुत ही जिम्मेवारी के साथ बैठकर पिछले वर्षो में सरकार द्वारा किए गए फैसलों पर और देश के लिए सरकार की आर्थिक नीतियों,  बेरोजगारी,भ्रष्टाचार, जी एस टी जिसमे ब्यापारियो का जम कर शोषण हो रहा है आदि पर गंभीरता पूर्वक विचार विमर्श करना होगा और गलत फैसलों को संशोधित करना होगा। अपने जीते हुए सांसदो की जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी होगी तभी आगे की राह आसान हो सकती है वरना आने वाला समय बी जे पी के लिए और कठिन साबित होगा ऐसा प्रतीत होता है।

 

*बी जे पी के लिए कठिन होगा आने वाला समय*

एन डी ए को एक्जिट पोल में 370 से ऊपर सीट दिलाने वाले न्यूज चैनल वाले जहां पूरी तरह अपने अनुमान में फेल हुए वहीं गारंटी के साथ भविष्य वाणी करने वाले पंडितो को भी इस बार के अप्रत्याशित लोकसभा परिणाम ने चारो खाने चित कर दिया। इस परिणाम ने यह साबित कर दिया की केवल कुछ हजार लोगो के सर्वे के बल पर पूरे देश के करोड़ों मतदाताओं के दिल में क्या है यह पता करना बहुत मुश्किल है। सर्वे एजेंसियों और भविष्यवक्ताओं को देश वासियों को गुमराह करने का खेल बंद करना चाहिए।
बहरहाल चुनावी अनुमान के विरुद्ध लोक सभा का जो अप्रत्याशित परिणाम आया है वो वास्तव में सभी को चौकाने वाला है। अबकी बार चार सौ पार का नारा देने वाली एन डी ए गठबंधन को बहुमत पाने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ेंगी ये एन डी ए के घटक दलों ने सोचा भी नही होगा। और ना ही बी जे पी ने सोचा होगा कि इस बार अकेले के दम पर वो बहुमत के आंकड़े 273 तक नही पहुंच पाएगी। भले ही एन डी ए गठबंधन के दम पर देश में तीसरी बार प्रधान मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे नरेंद्र मोदी जी अपनी सरकार बना ले पर जो उत्साह सरकार बनाने में बी जे पी समर्थको में होना चाहिए वो इस बार दिखाई नहीं पड़ रहा है। देश के कई राज्यों में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में इतना खराब प्रदर्शन करेंगी किसी ने नही सोचा होगा। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है कि बी जे पी ने जिस अयोध्या में राम मंदिर को लेकर पिछले कई वर्षो से अभूतपूर्व तैयारी की थी और मात्र चार माह पूर्व अयोध्या में भब्य राम मंदिर का पूरे जोर शोर के साथ पूजा पाठ करके दिब्य उद्घाटन समारोह किया जिसमे ना केवल पूरे भारत से बड़े बड़े वी आई पी आए बल्कि विदेशों से भी मीडिया वालो ने आकर राम मंदिर उद्घाटन का विश्व भर में सीधा प्रसारण कर मोदी जी की लोक प्रियता और धर्म एवम हिंदुत्व के प्रति उनका समर्पण पूरी दुनिया को दिखाया, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा तथा अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाने संवारने हेतु दिन रात काम किया और इसके बावजूद इसी अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाने के आंदोलन में कार सेवकों पर गोली चलवाने वाली सपा सरकार का प्रत्याशी बी जे पी के प्रत्याशी को हरा देता है। बी जे पी से आखिर कहां चूक हो गई कि अयोध्या की सीट भी हाथ से निकल गई। और तो और वाराणसी देश के प्रधान मंत्री जी की सीट वो भी बहुत मुश्किल से मोदी जी के खाते में आई है। इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी अजय राय ने इस बार जबर्दस्त टक्कर मोदी जी को दिया जबकि मोदी जी कम से कम दो महीने में एक बार वाराणसी अवश्य आते हैं और अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विकास में उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। चाहें वो वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण की बात हो या वाराणसी के गंगा घाटों के सुंदरी करण की बात हो या वाराणसी की सड़कों के चौड़ीकरण की बात हो। फिर भी ये निराशाजनक परिणाम आना बी जे पी के लिएअत्यंत विचारणीय है।
क्या इस बार के लोक सभा चुनाव में हिंदुत्व और राम मंदिर का कोई असर मतदाताओं पर नही हुआ। क्या गरीबों को मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, घर घर शौचालय योजना, किसान सम्मान योजना आदि तमाम योजनाओं का कोई फायदा बी जे पी को नहीं मिला। कुछ तो कमी हुई है आमजन को समझने में इस सरकार से। वही दूसरी तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन इंडिया का पूरे देश में शानदार प्रदर्शन आखिर देश के भविष्य की राजनीति के बारे में क्या इशारा करता है। विपक्षी गठबंधन के घटक दल कुछ वर्षो पहले जहां एक दूसरे के घूर विरोधी थे आज मोदी को हराने के लिए एक साथ खड़े हो गए और काफी हद तक वे सफल भी रहे। बी जे पी को हराने में क्या केवल विपक्षी दलों की एकता काम आई या कही बी जे पी के अंदर खाने भी मोदी योगी और अमित शाह के विरुद्ध कोई षडयंत्र किया जा रहा है? कुछ भी संभव है। राजनीति में आने वाले अधिकांश नेता अवसरवादी होते हैं और निज स्वार्थ में अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु किसी भी हद तक दल के सिद्धांतो के विरुद्ध नीचे गिरकर कोई भी खेल किसी के विरुद्ध कर सकते हैं। बहरहाल मोदी जी भले ही एन डी ए गटबंधन के बल तीसरी बार प्रधान मंत्री बनकर सरकार बना ले लेकिन इस बार उनको और दल के शीर्ष नेताओं को बहुत ही जिम्मेवारी के साथ बैठकर पिछले वर्षो में सरकार द्वारा किए गए फैसलों पर और देश के लिए सरकार की आर्थिक नीतियों, बेरोजगारी,भ्रष्टाचार, जी एस टी जिसमे ब्यापारियो का जम कर शोषण हो रहा है आदि पर गंभीरता पूर्वक विचार विमर्श करना होगा और गलत फैसलों को संशोधित करना होगा। अपने जीते हुए सांसदो की जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी होगी तभी आगे की राह आसान हो सकती है वरना आने वाला समय बी जे पी के लिए और कठिन साबित होगा ऐसा प्रतीत होता है।

 

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