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आगर-मालवा-तरबूज एवं अन्य फलों में रंगीन कलर या इंजेक्शन की जांच आसान घरेलू विधि से करें

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सत्यार्थ न्यूज़
रिपोर्ट मनोज कुमार

तरबूज एवं अन्य फलों में रंगीन कलर या इंजेक्शन की जांच आसान घरेलू विधि से करें

 

आगर-मालवा, 20 मई/ तरबूज, हरी मटर, करेला जैसे फल या किसी सब्जी में यदि किसी को रंगीन कलर या इंजेक्शन का संदेह लगता है, इसे आसान घरेलू विधि से पता लगा सकता है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि रंगीन कलर या इंजेक्शन का संदेह होने पर तरबूज को कटकर, या करेला, सफेद टिश्यू पेपर या रूई रखे 5 मिनट बाद देखे। यदि सफेद टिश्यू पेपर या रूई फल सब्जी के रंग जैसे रंग से रंग जाता है तो उस पर बाहर से कलर चढ़ाया गया/रंगीन किया गया है। यदि टिश्यू पेपर या रूई रंगीन नही हुआ है तो प्राकृतिक फल सब्जी है।
आम या केला जैसे फलों को कार्बाइड से पकाने का संदेह है तो कैसे पहचाने
कार्बाइड के संपर्क में आने पर फल की सतह पर काले धब्बे जैसे निशान बन जायेंगे। फल के सड़ने गलने की गति बहुत अधिक हों जाएगी। कैल्शियम कार्बाइड एक प्रकार का केमिकल जो फलों की नमी के संपर्क में आने पर एथेलिन गैस निकलती है जो फलों को पकाने में काम आती है। ऐसे फलों को धोकर ही खाना चाहिए। या इनके सेवन से बचना चाहिए।
प्राकृतिक फलों के ज्यूस स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद है, किंतु इसमें स्वाद बढ़ाने या अच्छे दिखाने के लिए ज्यूस वाले कृत्रिम रंग या फ्लेवर का प्रयोग तो नही कर रहे है। मैंगो ज्यूस में यदि बहुत अधिक पीला या सिंदूरी जैसा दिखे तो बाहर से रंग की संभावना हो सकती है। ऐसे में ज्यूस बनाने वाले की प्रोसेस को देखे की वह केवल मैंगो स्लाइस दूध बर्फ शक्कर ही दल रहा है या रंगीन शक्कर की चासनी या घोल । कटे फल या फलों के ज्यूस बनने के 2 से 3 घंटे के अंदर सेवन कर लिए जाना चाहिए अन्यथा बैक्टीरिया ग्रोथ ले कारण खराब हो जाते है। जो उल्टी दस्त या पेट दर्द जैसे बीमारी का कारण जो सकता है। शीतल पेय या ज्यूस पीने के कुछ समय बाद कड़वापन महसूस हो तो सेकरिन / एस्परटम की संभावना हो सकती है। जो शक्कर से कई गुना ज्यादा मीठा होता है।
फलों को पकाने की प्राकृतिक विधियां –
पेपर बैग विधि – पपीता, एल्यूमीनियम फाइल/ रिपनिंग चैंबर विधि – केला, अनाज या चावल विधि – आम, गर्म पानी विधि – आम, पलाश/खंकारे के पत्ते के साथ दबाना – आम

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