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सुसनेर-प्रभु को पाना है,तो गौसेवा जरूरी है -स्वामी गोपालानंद सरस्वती

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सत्यार्थ न्यूज़
रिपोर्ट मनोज कुमार

 

प्रभु को पाना है,तो गौसेवा जरूरी है -स्वामी गोपालानंद सरस्वती

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सुसनेर। जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ग्राम पंचायत सालरिया में स्थित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य में निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु आमजन में गो सेवा की भावना जागृत करने के लिए विगत 9 अप्रेल 2024 से चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 36 वें दिवस पर गोकथा में पधारे श्रोताओं को ग्वाल सन्त गोपालाचार्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने सम्बोधित करते हुए कहां कि आज बगुला अष्टमी है और आज ही के दिन मां बगुलामुखी का प्रागटय दिवस है।
स्वामीजी ने बताया कि मध्यप्रदेश सौभाग्य शाली है कि इस राज्य में मां बगुला मुखी एवं मां पीतांबरा की दो सिद्ध शक्ति पीठ है। जो एक सुसनेर विधानसभा के नलखेड़ा एवं दूसरी दतिया में विराजित है।
स्वामीजी ने बताया कि कुछ लोग तन्त्र साधना के नाम से बलि एवं अन्य राक्षसी कृत्य करते है जिससे मां खुश न होकर रुष्ठ ही होती है और उस बलि को कोई जोगिनी भक्षण कर लेती है। क्योंकि मां को किन्ही दुष्ट का विनाश करना होता है तो वह स्वयं खड्ग खप्पर लेकर प्रगट होकर उस दुष्ट का विनाश कर स्वयं बलि ले लेती है।
स्वामीजी ने कहा कि गोमाता भगवान के साथ रहती है और भगवान का कहां अवतरण होना है यह गोमाता ही तय करती है। इसलिए हम हमारी चिन्ता छोड़कर गो की चिंता करेंगे तो गो में विराजित 33कोटि देवता हमारी चिन्ता करेंगे। लेकिन आजकल अधिकतर लोग बकरी एवं भेस पाल रहें है,जिसके कारण व्यक्ति में अंहकार एवं पापाचार बढ़ रहा है, क्योंकि *बकरी अंहकार और भैंस पाप का प्रतीक है।
37 वें दिवस पर चूनड़ी यात्रा सुसनेर तहसील के सालरिया पटेल परिवार महिला मंडल की ओर से :-
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 37वें दिवस पर आगर जिले की सुसनेर तहसील के सालरिया ग्राम से पटेल परिवार महिला मंडल की मानकोर बाई, जुरावर बाई, रामकौर बाई,संतोष बाई एवं गंगा बाई के साथ मातृशक्ति अभयारण्य परिसर में विशाल चुनरी यात्रा लेकर पधारे और कथा मंच पर पहुंचकर गोमाता को चुनरी ओढ़ाकर गोमाता का पूजन एवं आरती कर पूज्य स्वामी गोपालानंद जी महाराज जी से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा कर उसके बाद सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
स्वामीजी ने बुधवार की कथा में राजस्थान के बूंदी जिले के गोठड़ा ग्राम में गोसेवक ब्राह्मण के माध्यम से प्रगट हुए गोठड़ा सांवरिया जी की महिमा सुनाते हुए कहां कि हमें प्रभु को पाना है तो गौसेवा जरूरी है। क्योंकि गोधन सबसे बड़ा धन है और गौसेवा सबसे बड़ा ज्ञान है। जिसने स्वयं गौसेवा नही की ओर दूसरों को ज्ञान देना यह पाखण्ड है।
चित्र 1 : गौकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गौमाता को चुनड़ ओढ़ाते गौभक्त।
चित्र 3 : गौमाता के लिए चुनड़ लाते गौभक्त।
चित्र 4 व 5 : गौभक्तो का सम्मान करती साध्वी दीदी।

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