रिपोर्ट( रावेंद्र केशरवानी ,रोहन )
श्रीमद्भागवत कथा में सुनाया श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रसंग
(कौंधियारा प्रयागराज )मानव जीवन की सार्थकता तब सिद्ध होती है जब वह मुक्ति का आधार पाए। और मुक्ति पाने के लिए भागवत कथा एक प्रमुख साधन है इसलिए श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन के साथ ही श्रवण करने वाले और भी धन्यवाद है उक्त बातें देवर के(लोकमनि का पूरा) में पंडित दीनानाथ शुक्ल के यहां संगीतमय भागवत के अंतिम दिन ज्योतिष मार्तण्ड भागवत भूषण ब्रह्मर्षी उपेंद्र जी महाराज ने कहीं। आगे व्यास ने कहा कि जब-जब जीवन में अभिमान आता है तब भगवान उनसे दूर हो जाते हैं, जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्री कृष्णा उस पर अनुग्रह करते हैं उसे दर्शन देते हैं। रुक्मिणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए कहा कि रुक्मणी के भाई रुक्मि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ निश्चित किया था। किंतु रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि वह शीशुपाल से नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेगी। क्योंकि शिशुपाल असत्य मार्गी है। और द्वारकाधीश श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। अतरू भगवान श्री कृष्ण जी ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया और उन्हें पति के रूप में वरण करके प्रथम प्रधान पटरानी का स्थान दिया। उनकी आठ पटरानियां थी। रुक्मिणी सत्यभामा,जामवंती, कालिंदी, मित्र बिंद, सत्या भद्रा एवं लक्ष्मणा। विवाह लीला का मंचन देख दर्शन भाव विभोर हो गए। वही संगीत वादक अनिकेत महाराज, विमलेश पांडेय, संजय पांडेय, लालजी (लहरी), ने अपनी कला कौशल के साथ भजन में चार चांद लगा दिया। इस पावन प्रसंग में दान की विशेष महिमा है। आगे उन्होंने कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी है। और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि भक्त सुदामा और भगवान श्री कृष्ण का मिलन जब द्वारिका पुरी में हुआ उसे समय भक्त और भगवान दोनों के नेत्रों में प्रेम और उत्कंठा के आवेग से आंसू छलक
आयें। दोनों आनंद में डूबते उतराते रहे। भगवान श्री कृष्ण का दर्शन करते ही विप्र सुदामा के सारे (पाप) दरिद्रता नष्ट हो गई उनका अंत: करण स्वच्छ और निर्मल हो गया शरीर का एक-एक रोम खिल आया आगे सुदामा के पैर धोना, स्वागत, चावलों को बड़े प्रेम से खाना, सुदामा को सब को समर्पित कर देना आदि प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया।अंत में भागवत पीठ की आरती वह प्रसाद वितरण किया गया।इस मौके पर सुरेंद्रनाथ शुक्ला , शेषनारायण पांडेय,राम मनोरथ यादव,प्रेम शंकर तिवारी, कृपा शंकर मिश्रा,राजेंद्र मिश्रा, रमाकांत तिवारी,अरुण तिवारी, गुलाबचंद शुक्ला,अरुण मिश्रा, संगम लाल मिश्र,प्रेमधर शुक्ला, चंद्र किशोर मिश्रा आदि सैकड़ो भक्त मौजूद रहे। कथा व्यवस्थापक कमलाकर शुक्ला, प्रदुम शुक्ला,दिनकर शुक्ला ने सभी आगंतुको का आभार प्रकट किया।।

















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