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सफलता की कहानी: निःशुल्क फिजियोथेरेपी सेंटर दिव्यांगों के लिए बना वरदान: जो कभी चल नहीं पाती थी, आज वह दौड़ने में सक्षम,

सफलता की कहानी: निःशुल्क फिजियोथेरेपी सेंटर दिव्यांगों के लिए बना वरदान: जो कभी चल नहीं पाती थी, आज वह दौड़ने में सक्षम,

सूरज यादव,गौरेला पेंड्रा मरवाही। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से बच्चों को स्कॉर्ट अलाउंस, बालिका छात्रवृत्ति एवं सहायक उपकरण प्रदान किए जाते हैं। साथ ही बीआरपी एवं स्पेशल एजुकेटर द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। इसी प्रयास की प्रेरणादायक मिसाल हैं प्राथमिक शाला डुमरिया की छात्रा कु. महेश्वरी। एक समय ऐसा था जब महेश्वरी चलने, दौड़ने और दैनिक कार्य करने में भी असमर्थ थीं। उनके दाहिने पैर की मांसपेशियाँ कमजोर थीं, जिसके कारण सामान्य जीवन जीना भी कठिन हो गया था। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत उन्हें नियमित रूप से संसाधन कक्ष गौरेला में फिजियोथेरेपी उपलब्ध कराई गई।

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्राची आर. पीटर्स द्वारा प्रतिदिन समर्पण और धैर्य के साथ उपचार किया गया। लगातार एक वर्ष तक चली फिजियोथेरेपी और महेश्वरी की दृढ़ इच्छाशक्ति ने अद्भुत परिणाम दिए। आज वही महेश्वरी आत्मविश्वास के साथ चलने और दौड़ने में सक्षम हो चुकी हैं। न केवल शारीरिक रूप से उन्होंने स्वयं को मजबूत बनाया, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी शानदार उपलब्धि हासिल की। सत्र 2025-26 में उन्होंने प्राथमिक शाला परिचय परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त कर कक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया। महेश्वरी की प्रतिभा यहीं नहीं रुकी। विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर आयोजित 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया, जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयाँ दीं। महेश्वरी की इस सफलता के पीछे जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी, संतोष सोनी, अजय जोशी, प्रवीण चौधरी तथा स्पेशल एजुकेटर राजेन्द्र साहू का विशेष मार्गदर्शन और प्रोत्साहन रहा।

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