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खुली पड़ी खदानें बन रही हैं मौत का अड्डा स्लिमनाबाद (कटनी) में मार्बल-बॉक्साइट की बंद खदानें पर्यावरण और जीवन के लिए खतरा

खुली पड़ी खदानें बन रही हैं मौत का अड्डा
स्लिमनाबाद (कटनी) में मार्बल-बॉक्साइट की बंद खदानें पर्यावरण और जीवन के लिए खतरा


कटनी, 12 जनवरी 2026

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लिमनाबाद क्षेत्र में मार्बल और बॉक्साइट की दर्जनों खदानें वर्षों से खुली पड़ी हैं। खनन विभाग की लापरवाही के कारण ये गहरे गड्ढे न केवल स्थानीय निवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, बल्कि जंगली जानवरों की लगातार मौत का कारण भी बन रहे हैं। ये खदानें बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं।
यहाँ की अधिकांश मार्बल खदानें 500 से 600 फीट तक गहरी हैं। बंद होने के बाद इन्हें न तो भरा गया और न ही चारदीवारी से घेरा गया। बारिश का पानी भर जाने से ये गड्ढे और खतरनाक हो गए हैं। आसपास के ग्रामीण इलाकों में बच्चे और पशु इनमें गिरने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।
वन्यजीवों की स्थिति और भी चिंताजनक है। आसपास के जंगलों से निकलकर पानी पीने या शिकार की तलाश में आने वाले तेंदुए, अन्य जंगली जानवर इन खुले गड्ढों में गिरकर मारे जा रहे हैं। रोजाना ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है।
यहाँ कुछ चित्रों से स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है:


ये तस्वीरें भारत की खुली खदानों की खतरनाक स्थिति को दर्शाती हैं।
वन विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में वन्य प्राणियों की आवाजाही सामान्य है, लेकिन खुली खदानों के कारण उनकी सुरक्षा खतरे में है।
खनन नियमों के अनुसार, खदान बंद होने पर उसे पूरी तरह सुरक्षित करना (फेंसिंग, भराई आदि) अनिवार्य है, लेकिन यहाँ नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। कई खदानें पर्यावरणीय मंजूरी समाप्त होने या नियम उल्लंघन के कारण बंद हुईं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि खनन विभाग तत्काल इन खदानों को भरवाए या घेरबंदी करवाए, ताकि कोई बड़ा हादसा टाला जा सके।
जिला प्रशासन और खनन विभाग को चेतावनी दी जा रही है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बड़ी त्रासदी हो सकती है।

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