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सोनभद्र -*सिंचाई विभाग की मनमानी, नरसो बंधी नहीं खुलने से किसान परेशान, कैसे हो फसल की सिंचाई*

*सिंचाई विभाग की मनमानी, नरसो बंधी नहीं खुलने से किसान परेशान, कैसे हो फसल की सिंचाई*

 

*चतरा ब्लॉक के पटना के किसानों ने किया प्रदर्शन, सिंचाई विभाग के जेई पर लगाया मनमानी का आरोप*

 

 

*चतरा सोनभद्र ब्यूरो रिपोर्ट – संतेश्वर सिंह

सोनभद्र चतरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पटना के किसानों ने सिंचाई विभाग के जेई पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया है किसानों का आरोप है कि नरसों बंधी से लगभग पांच सौ बीघा भूमि की सिंचाई की जाती है और आस पास के गावों सिलथम, गिरियां, मंथहवा, आदि गावों की लगभग तीन हजार से अधिक हेक्टेयर भूमि की सिंचाई इसी नर्सों बंधी से होती है।

पटना निवासी किसान दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि सिंचाई विभाग के जेई कमलेश द्वारा नहर खोलने के लिए लालू नाम के एक व्यक्ति को रखा है उसका कहना है कि विभाग द्वारा हमे मानदेय या मजदूरी नही मिलता है मै नहीं खोलूंगा नहर किसान दिनेश ने बताया कि लगभग दो सप्ताह से हम लोग जेई कमलेश से नहर खोलने के लिए लगातार निवेदन कर रहे हैं लेकिन जेई द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है हम लोगों के रबी की फसल गेहूं ,चना, मटर आदि की फैसले सिंचाई के अभाव में खराब होकर सुख रही है।

किसान राजेश यादव शिव प्रताप विश्वकर्मा ने बताया कि हम लोग कई बार जेई कमलेश को फोन कर बंधी खोलने के लिए निवेदन किया हर बार जेई द्वारा सिर्फ आश्वासन ही मिला कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

किसान बद्री यादव, अमरेश यादव ने कहा कि अगर सिंचाई विभाग द्वारा तत्काल बंधी का पानी नही खोलेगी तो हम लोग जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होगी।

इस मामले को लेकर जेई कमलेश से सेल फोन पर वार्ता किया गया तो उन्होंने ने बताया कि मामला संज्ञान में है बंधी खोलने के लिए साफ सफाई का कार्य किया जा रहा है।

वही जेई के बयान के विपरीत साफ सफाई का कार्य किसान मिलकर कर रहे हैं सूखती फसलों को बचाने के लिए किसान खुद झाड़ियां काटते हुए वीडियो में दिख रहे हैं जबकि जेई साहब मजदूरों से साफ सफाई की बात कह रहे हैं।

जेई के इस विरोधाभासी बयान से तो यही प्रतीत होता है कि किसानों के प्रति जेई की मंशा साफ नहीं है।

प्रदर्शन करने वाले किसानों में दिनेश कुमार विश्वकर्मा, राजेश कुमार यादव, अमरेश, बद्री यादव, शिवप्रताप विश्वकर्मा, सोहन लाल चतुर्वेदी, मोहन पासवान आदि किसान रहे।

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