जबलपुर में मानस भवन विवाद की आग घंटाघर तक पहुंची: बजरंग दल और बहुजन समाज के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट, पुलिस ने भारी मुश्किल से संभाला मोर्चा

जबलपुर, 25 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में आज दोपहर एक छोटे से विवाद ने तूल पकड़ लिया और शहर के हृदयस्थल घंटाघर चौक तक हिंसा की आग फैल गई। यह सब तब शुरू हुआ जब मानस भवन में आयोजित एक सामाजिक सम्मेलन के दौरान ‘सनातन विरोधी’ बताई जा रही कुछ पुस्तकों की बिक्री को लेकर हिंदूवादी संगठनों और बहुजन समाज के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हो गया। दोनों पक्षों के बीच हुई जमकर मारपीट में कई लोग घायल हो गए, जबकि शहर की प्रमुख सड़कों पर तनाव फैल गया। पुलिस ने भारी संख्या में बल तैनात कर स्थिति को किसी तरह नियंत्रित किया है।
विवाद की शुरुआत: मानस भवन में पुस्तकों पर आपत्ति
घटना की जड़ मानस भवन में चल रहे ‘पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सम्मेलन’ में है, जिसका आयोजन बहुजन समाज पार्टी (BSP) और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा किया गया था। सम्मेलन के दौरान स्टॉल पर उपलब्ध कुछ पुस्तकों को बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ‘हिंदू विरोधी’ और आपत्तिजनक करार दिया। इन पुस्तकों में कथित रूप से हिंदू धर्म पर टिप्पणियां थीं, जो संगठनों को अस्वीकार्य लगीं।
सूत्रों के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजे बजरंग दल के 20-25 कार्यकर्ता अचानक मानस भवन पहुंचे और पुस्तकों की बिक्री रोकने की मांग करने लगे। सम्मेलन आयोजकों ने इसे सामाजिक साहित्य बताकर सफाई दी, लेकिन बातचीत जल्द ही बहस में बदल गई। बहुजन समाज के कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक हस्तक्षेप बताते हुए विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। मारपीट में लाठियां, डंडे और कुर्सियां तक चलीं। आंखों देखी हालात के मुताबिक, कम से कम 8-10 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
घंटाघर तक फैली हिंसा: शहर में तनाव
विवाद मानस भवन से बाहर निकल गया और कार्यकर्ता घंटाघर चौक की ओर बढ़ गए। यहां सड़क पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू की, जबकि BSP समर्थकों ने कथित धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए पथराव किया। घंटाघर के आसपास की दुकानें बंद हो गईं, और ट्रैफिक जाम हो गया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “पहले तो सिर्फ चीखने-चिल्लाने की बात थी, लेकिन अचानक लाठियां चलने लगीं। महिलाएं बीच-बचाव करने आईं तो उन्हें भी निशाना बनाया गया।”
हिंसा के दौरान कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा, और एक दुकान का शटर तोड़ दिया गया। सोशल मीडिया पर #ManasBhavanControversy, #GhantaGharJabalpur और #JabalpurBreaking जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जहां दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हिंदू संगठनों का दावा है कि पुस्तकें ‘सनातन धर्म को अपमानित’ कर रही थीं, जबकि BSP ने इसे ‘SC/ST समुदाय के खिलाफ साजिश’ बताया।
पुलिस का हस्तक्षेप: मोर्चा संभालना मुश्किल
पुलिस को सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी सिटी आयुष गुप्ता के नेतृत्व में भारी संख्या में फोर्स मानस भवन और घंटाघर पहुंची। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिससे भीड़ तितर-बितर हो गई। एसपी गुप्ता ने कहा, “यह एक छोटा विवाद था जो भावनाओं के चलते बढ़ गया। हमने 5-6 लोगों को हिरासत में लिया है, और FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील है।” वर्तमान में घंटाघर और मानस भवन के आसपास पुलिस बैरिकेडिंग की गई है, और अतिरिक्त बल तैनात है।
मेडिकल टीमों ने मौके पर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, जबकि गंभीर रूप से जख्मी 4 लोगों को विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर चोटें सतही हैं, लेकिन दो लोगों को सिर में चोट लगी है।
राजनीतिक रंग: बहुजन समाज और हिंदू संगठनों के बीच तनाव
यह विवाद अब राजनीतिक हो गया है। बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय नेता ने कहा, “यह SC/ST समुदाय के कार्यक्रम में बाहरी तत्वों का घुसपैठ है। हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।” वहीं, बजरंग दल के जिला संयोजक ने पुस्तकों को ‘प्रमाण’ बताते हुए कहा, “हम धार्मिक भावनाओं की रक्षा करेंगे। ऐसी किताबें बिक्री के लिए नहीं हैं।” विपक्षी दल कांग्रेस ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है, जबकि सत्ताधारी BJP ने शांति की अपील की है।
जबलपुर के घंटाघर क्षेत्र में पहले भी सामाजिक-धार्मिक विवाद हो चुके हैं, लेकिन इस बार SC/ST vs हिंदू संगठनों का मुद्दा इसे संवेदनशील बना रहा है। स्थानीय प्रशासन ने रात के कर्फ्यू जैसी कोई घोषणा नहीं की, लेकिन सतर्कता बरतने को कहा है।
आगे की कार्रवाई और अपील
पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ IPC की धारा 147 (दंगा), 323 (मारपीट) और 506 (धमकी) के तहत केस दर्ज किए हैं। कलेक्टर ने एक बयान जारी कर कहा, “शहर में शांति बनाए रखें। कोई भी उकसावे पर ध्यान न दें।” सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मध्यस्थता की पेशकश की है, ताकि मामला कोर्ट के बाहर सुलझ सके।
यह घटना जबलपुर के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर रही है, जहां जातिगत और धार्मिक संवेदनशीलताएं हमेशा सतह पर रहती हैं। उम्मीद है कि शीघ्र शांति बहाल हो और शहर सामान्य हो जाए।

















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