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एक ही प्रकरण में दो दो आख्या जिम्मेदार मौन उपजिलाधिकारी सदर ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के आदेश को बनाया कूड़ेदान का दस्तावेज

रिपोर्टर मोहम्मद सेबू

एक ही प्रकरण में दो दो आख्या जिम्मेदार मौन उपजिलाधिकारी सदर ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के आदेश को बनाया कूड़ेदान का दस्तावेज

सुल्तानपुर राजस्व विभाग के
गलियारे में इन दिनों एक अजीब तमाशा घूम रहा है अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार सिंह असहाय रिकॉर्ड उलझे और उपजिलाधिकारी सदर और तहसीलदार अपनी अपनी कुर्सियों पर गहरी समाधि में

मामला ग्राम सभा भंडरा परशुरामपुर के नवीन परती भूमि 1346 का है जहां एक ही गाटा संख्या पर दो अलग अलग आख्या भेज कर राजस्व कर्मियों ने तथ्यों को कंफ्यूज कर दिया है जिम्मेदार अधिकारी उन्हें बचाने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं अपर जिलाधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी को दोषी राजस्व कर्मियों पर जांच कर कार्यवाही किए जाने के संबंध में रिपोर्ट मांगी जा रही है लेकिन उपजिलाधिकारी सदर विपिन द्विवेदी द्वारा आज तक नहीं भेजी गई दिलचस बात तो यह है कि उपजिलाधिकारी ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एस सुधारन को गुमराह करते हुए दूसरी जांच रिपोर्ट भेज दी गई थी शायद फाइलों में टहलते टहलते रास्ता भटक बदल गया हो उधर तहसील की दो अलग अलग आख्या तो जैसे जो मन में आए लिख दो सिद्धांत पर आधारित थी
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के न्यायालय में राजस्व कर्मियों द्वारा दी गई आख्या में तत्कालीन लेखपाल सुशील तिवारी और राजस्व निरीक्षक रमाशंकर मिश्र ने 2020 में वही जमीन आवंटी द्वारा आवंटित भूमि से अधिक भाग पर पक्का मकान बना कर 20 वर्षों से निवास किए जाने का दावा

2022 में उसी भूमि पर सिर्फ आवंटित भूमि पर ही पक्का मकान आवंटन सही आवंटी शांतिपूर्वक निवासरत

2025 में नायब तहसीलदार कुड़वार धर्मेंद्र यादव की जांच रिपोर्ट में आवंटित भूमि खाली आवंटी द्वारा आवंटित भूमि में नहीं किया कोई निर्माण आवंटित गाटा के अन्य भाग पर आवंटन से अधिक भूमि पर किया गया अतिक्रमण

यानी एक ही जमीन की दो अलग अलग कहानी जैसे किसी टी वी सीरियल अलग अलग एपिसोड लेकिन किरदार वही इस उलझन के बाद तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एस सुधारन को मसाला कुछ अटपटा लगा और उन्होंने ने अपने कार्यकाल में चार बार उपजिलाधिकारी सदर विपिन द्विवेदी को इन दोषी राजस्व कर्मियों पर कार्रवाई करते हुए अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए पत्राचार किया गया लेकिन उपजिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी उनके जाने के बाद नवागत अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश सिंह ने पूरे मामले को लेकर दिनांक 4 नवंबर 25 को अपने पत्रांक संख्या 503 द्वारा उपजिलाधिकारी को कड़ा पत्र लिखते हुए 13 नवम्बर तक अपनी रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया गया अपने आदेश में साफ साफ लिख दिया कि अब इसमें किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए आदेश स्पष्ट था समय सीमा स्पष्ट थी लहजा भी स्पष्ट था पर शायद उपजिलाधिकारी सदर की दृष्टि ही अस्पष्ट थी सूत्रों की बात सच माने तो अपर जिलाधिकारी का पत्र सीधे रद्दी की टोकरी में नहीं गया बल्कि पहले वह कुछ देर मेज पर रखा रहा फिर धरे से फाइलों के ढेर में दबा दिया गया ताकि आदेश भी न माने जाएं और साहब का अपमान भी न हो उपजिलाधिकारी पर पूर्व के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के तीन तीन अनुस्मारक पत्र भी कोई असर नहीं छोड़ पाए जैसे विभागीय प्रणाली कह रही हो आप आदेश भेजते रहिए हम मौन ही सही जवाब समझते हैं अपर जिलाधिकारी बार बार याद दिला रहे हैं लेकिन उपजिलाधिकारी सदर के दफ्तर का दरवाजा शायद उसी दिन खुलेगा जिस दिन वे स्वयं चाहेंगे या फिर जब और भी कोई कड़ा पत्र आएगा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा यह है कि एक ही प्रकरण में दो जांच रिपोर्ट देने के मामले में फंसे राजस्व कर्मियों को बचाने में उपजिलाधिकारी सदर खासी दिलचस्पी ले रहे है दूसरी तरफ अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश सिंह अपने ही आदेशों का पालन कराने में असहाय दिख रहे है
कुल मिलाकर मामला यही संकेत दे रहा है कि फाइलें चले या न चले आदेश का सम्मान हो या न हो सिस्टम अपने ढंग से ही चलेगा

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