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श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर व उपजिला अस्पताल भवन निर्माण को लेकर संघर्ष समिति ने सयुंक्त निदेशक सौंपा ज्ञापन, जिला कलेक्टर से धीरदेसर चोरियान में शराबबंदी हेतु कोर्ट आदेश की पालना की मांग

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्यूरो चीफ

श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में स्वीकृत ट्रॉमा सेंटर व उपजिला अस्पताल के भवन निर्माण को लेकर ट्रॉमा सेंटर निर्माण संघर्ष समिति ने बुधवार को बीकानेर जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र चौधरी को ज्ञापन सौंपा। समिति ने ज्ञापन में बताया कि भवन के अभाव में ट्रॉमा सेंटर का संचालन सीमित संसाधनों में हो रहा है। जिससे घायल मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार देकर बीकानेर रैफर कर दिया जाता है। जिससे समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार रास्ते में ही मरीजों की मौत हो जाती है। ज्ञापन में यही भी कहा गया है कि 8 मार्च 2025 को जयपुर से आई स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने भवन निर्माण कार्य जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। भवन के लिए 16100 वर्ग मीटर भूमि का पट्टा नगर पालिका श्रीडूंगरगढ़ द्वारा 6 जून 2023 को जारी किया गया था। भवन निर्माण के लिए भामाशाह भी तैयार हैं, नक्शा बनाकर 21 फरवरी 2025 को प्रस्तुत किया गया था, जिसे 13 मई 2025 को विभागीय कमेटी द्वारा स्वीकृति भी मिल चुकी है। फिर भी राजनीतिक कारणों से MOU अब तक नहीं हुआ है। साथ ही अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है और महिला डॉक्टर तक नहीं है, जिससे प्रसव जैसी जरूरी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। संघर्ष समिति द्वारा 15 अक्टूबर 2024 से अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है,जो 248 वें दिन अब तक जारी है। इसके साथ ही धीरदेसर चोरियान गांव में शराबबंदी की मांग को लेकर चल रहे लंबे धरने से जुड़े विषय में संघर्ष समिति ने एक अलग ज्ञापन बीकानेर जिला कलेक्टर को सौंपा। इसमें बताया गया कि इस मामले में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने रिट पिटीशन संख्या 5841/2015 पर 23 अप्रैल 2025 को आदेश पारित कर एक महीने में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उक्त आदेश की प्रति 2 मई 2025 को आबकारी आयुक्त व कलेक्टर को सौंपी गई थी, लेकिन अब दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का धरना अब 293वें दिन में प्रवेश कर चुका है।ज्ञापन में चेताया कि यदि शीघ्र ही कोर्ट आदेश की पालना नहीं की गई, तो समिति उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने को मजबूर होगी, जिस जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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