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गोहत्या राष्ट्र हत्या,गोरक्षा राष्ट्र रक्षा” विचार को लेकर धेनु शक्ति संघ ने दिया मुख्यमंत्री को ज्ञापन- साध्वी निष्ठा गोपाल सरस्वती*

गोहत्या राष्ट्र हत्या,गोरक्षा राष्ट्र रक्षा” विचार को लेकर धेनु शक्ति संघ ने दिया मुख्यमंत्री को ज्ञापन- साध्वी निष्ठा गोपाल सरस्वती*

सत्यार्थी न्यूज़ संवाददाता

सुसनेर, पिड़ावा/21अप्रैल, राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता मेले से पुलिस संरक्षण में 52 ट्रकों के माध्यम से रात के अंधेरे में बांसवाड़ा जिले से मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की सीमा पर अवैध रूप से प्रवेश कर रहें नर गोवंश जिन्हें मध्यप्रदेश सीमा से वापस लौटा दिया और राजस्थान के गौसेवकों के अथक प्रयास से उन्हें बांसवाड़ा की विभिन्न गौशालाओं में आश्रय दिया गया और बांसवाड़ा पुलिस प्रशासन से सभी 52 ट्रकों में नन्दीबाबा जिन्हें गो तस्करी के लिए अवैध रूप से ले जा रहन था उनके खिलाफ़ FIR दर्ज करने की मांग की थी लेकिन प्रशासन ने मात्र 2 ट्रकों पर ही FIR दर्ज की थी उसके विरोध में विगत 17 अप्रैल को ग्वाल शक्ति सेना ने राज्य के सभी जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया था उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो आज राज्य के सभी जिला कलेक्टर को राजस्थान में अवैध मेलों के नाम से हो रही गो तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री,राजस्थान के महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम गोपाल परिवार संघ की महिला विंग धेनु शक्ति संघ ने ज्ञापन देकर गो तस्करों को गोवंश के परिवहन की नियमों के विपरीत दी गई स्वीकृति की जांच एवं राजस्थान सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष में अवैध पशु मेलो की आड़ में जो गो तस्करी हो रहीं है उस पर अंकुश लगाने की मांग की ।
गोपाल परिवार संघ से साध्वी निष्ठा गोपाल सरस्वती ने बताया कि मेड़ता मेले से 52 ट्रकों के माध्यम से पुलिस संरक्षण में 13 अप्रैल 2025 को बांसवाड़ा ज़िले में घटित 388 गोवंशों की अवैध तस्करी की घटना, पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 04.05.2015 की पूर्ण अवहेलना के संबंध में ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि यह कार्य न केवल पशुओं के प्रति क्रूरतापूर्ण है, बल्कि कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है साथ ही राजस्थान उच्च न्यायालय का आदेश दिनांक 04.05.2015 (D.B. Civil Writ Petition No. 2009/2014): जो माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गौ रक्षा दल सेवा समिति बनाम राज्य सरकार मामले में पारित ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है किःप्रत्येक जिले में SPCA (Society for Prevention of Cruelty to Animals) का गठन अनिवार्य है और SPCAS के गठन तक, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ईमानदार गौरक्षा कार्यकर्ताओं को पंजीकृत कर जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जिसमे पंजीकृत कार्यकर्ता अभियोजन में हस्तक्षेप कर सकते हैं एवं न्यायालय की सहायता कर सकते हैं।

* पशु परिवहन नियम, 1978 के अंतर्गत Rule 56 का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया गया है जिसमें प्रत्येक ट्रक में पशुओं की संख्या, उनकी देखभाल, चिकित्सा प्रमाण पत्र, स्थान, पहचान विन्ह आदि का स्पष्ट विवरण आवश्यक है।

कोई भी मवेशी मेला राज्य सरकार की अनुमति के बिना आयोजित नहीं किया जा सकता, और कोई भी पशु तब तक नहीं बेचा जा सकता जब तक क्रेता कृषि उपयोग हेतु वैध दस्तावेज व कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करे।

राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परिवहन उचित मेडिकल परीक्षण, शपथ-पत्र, व क्रेता की कृषि भूमि के प्रमाण से ही हो। यह आदेश पूरे राजस्थान राज्य में लागू है और सभी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर यह बाध्यकारी है लेकिन वर्तमान प्रकरण में निम्न उल्लंघनः हुआ है:-

1. किसी भी ट्रक के साथ न तो वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र थे, न गोवंशों पर कोई मार्किंग की गई थी।

2. न तो खरीदारों ने कृषि उपयोग हेतु कोई वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत किया और न ही कोई शपथ-पत्र।

3. गाड़ियों में पशुओं को अत्यत अमानवीय तरीके से ठूंस ठूंसकर रखा गया तथा गौवंश के चारे-पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई जिससे 3 बैलों की मृत्यु हो गई।

43 वर्ष से कम आयु के गोवंश बछड़ों को राजस्थान राज्य से बाहर निर्यात किया जा रहा था जबकि इस पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है।

5. स्थानीय पुलिस द्वारा केवल 2 ट्रकों पर एफआईआर दर्ज करना यह दर्शाता है कि या तो वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, या कहीं न कहीं मिलीभगत है।

6. बांसवाड़ा एसपी द्वारा यह कहना कि दस्तावेजों की पुष्टि के बाद पशुओं को छोड़ा जा सकता है, पूरी तरह न्यायालयीन प्रक्रिया की अवहेलना है, क्योंकि दस्तावेजों की वैधता का निर्धारण केवल न्यायालय कर सकता है, न कि पुलिस ।
ज्ञापन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री,महामहिम राज्यपाल एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री महोदय से मांग की है हमारी मांगें :

1. शेष 50 ट्रकों पर तत्काल FIR दर्ज कर पशु तस्करों को गिरफ्तार किया जाए और उनके विरुद्ध कठोर क़ानूनी कार्यवाही निम्न कानून व धाराओ में की जावे :-

धारा 325 बीएनएस, धारा 11 (जी) पशु शल्य चिकित्सा अधिनियम 1960, धारा 3, 5, 6, 6 (के), 8, 9 एवं 10 गोवंश वध अधिनियम 1995, नियम 47 (के), 47 (के), 48, 49 (के), 49 (के), 50, 51 (एफ), 52, 53, 54(1), 54(2), 54(3), 56 और नियम 96 व 98 पशु परिवहन नियम 1978

2. बांसवाड़ा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर विभागीय एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

3. राज्य स्तर पर एक विशेष जाच समिति (SIT) गठित कर पुरे पशु तस्करी गिरोह की गहन जांच की जाए।

4. माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए क्योंकि गोवंश की रक्षा केवल एक धार्मिक या भावनात्मक विषय नही यह एक संवैधानिक, नैतिक और न्यायिक जिम्मेदारी है। प्रशासन द्वारा इस प्रकार की लापरवाही व मिलीभगत का परिणाम समाज में कानून के प्रति अविश्वास और अपराधियों को बढावा देने जैसा होगा और हमारे धर्मग्रंथों में गो-हत्या राष्ट्र हत्या, गौ रक्षा राष्ट्र रक्षा, का उल्लेख है ।

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