सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्यूरो चीफ
भारतीय संस्कृति पर केंद्रित किताब “जालपा ज्ञान-सागर” के यशस्वी लेखक मदन स्वर्णकार “बूटण” अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका आकस्मिक निधन हृदय गति रुकने से हो गया। ज्ञातव्य है कि उनकी पुस्तक “जालपा ज्ञान-सागर” में उन्होंने अपनी कुलदेवी जालपा से मोक्ष की कामना करते हुए लिखा है। “हमारी मृत्यु अटल है,पर मृत्यु का हमें भय नहीं है। हमारी असल पूंजी तो हमारे कर्म हैं। उनकी इस कृति में विविध मंत्र,स्त्तोत्र,कवच,तीर्थ,व्रत,कर्म-फल,नीति-सार,तत्त्व बोध सहित भारतीय संस्कृति के सूक्ष्म ज्ञान का सार समाहित है। श्री बूटण एक संवेदनशील कर्मयोगी थे। उनके मृदु व्यवहार की हर कोई सराहना करता था। उनके निधन पर श्रीडूंगरगढ़ के सृजनधर्मियों ने शोक संवेदना प्रकट की है। वह अपने पीछे दो पुत्र और चार पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं । उनके अनुज चांदरतन बूटण भी श्रीडूंगरगढ़ के एक प्रतिष्ठित ज्वेलर्स हैं।



















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