सवांददाता ब्युरो चीफ रमाकान्त झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
देशभर में आज 14 जनवरी को,मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति का यह पर्व 14 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है। क्या आप इसके पीछे के कारणों से अवगत हैं सनातन धर्म में मकर संक्रांति का अत्यधिक महत्व है। यह उत्सव प्रतिवर्ष सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने की तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन साधक गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान और ध्यान करते हैं। इसके साथ ही सूर्य देव की पूजा और उपासना भी की जाती है। मकर संक्रांति का त्योहार जब सूर्य मकर राशि में गोचर करते है उस दिन मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। यह त्यौहार सूर्य के गोचर के अनुसार मनाया जाता है,जनवरी महीने के 14 या 15 तारीख को मनाया जाता है। मकर संक्रांति का अलग महत्व है। भारत में इस त्योहार को अलग अलग नाम से जाना जाता है इन्हें पोंगल खिचड़ी,मकर संक्रांति,लोहड़ी,उतरायण के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य पुरे साल में 12 बार अपना राशि का परिवर्तन करते है सूर्य जिस राशि में गोचर करते है उस राशि के नाम से संक्रांति जाना जाता है इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते है जिसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन दान पुन्य करने का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा,यमुना,गोदावरी,सरस्वती जैसे नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है,इस दिन से शुभ कार्य आरंभ हो जाते है।
कब है मकर संक्रांति
14 जनवरी 2025 दिन मंगलवार समय दोपहर 02:48 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में गोचर करेंगे
मकर संक्रांति का पुण्यकाल
सुबह 09 :30 से 05:20 संध्या
कुल अवधि 08 घंटा 17 मिनट
महापुण्यकाल सुबह 09:30 से 10:50 सुबह तक
कुल अवधि 01 घंटा 47 मिनट .
मकर संक्रान्ति का भगौलिक महत्व
भारत कृषि प्रधान देश है यह त्योहार माघ के महीने में मनाया जाता है क्योंकि इस समय किसान खेत से धान का फसल कटाई करके तेलहन और दलहन की फसल की कटाई का दौर आरंभ होता है शरद ऋतू का अंत तथा बसंत ऋतू का आरंभ होता है,इसलिए किसान मकर संक्रांति को बहुत धूम -धाम से मनाते है।
मकर संक्रांति का महत्व
खगोलशास्त्र के अनुसार सूर्य का दो अयन है जिसे हम उतरायण तथा दक्षिणायन कहते है। एक वर्ष में 12 महीने होता है। और सूर्य के दो अयन होने के कारण एक अयन की अवधि 6 महीने का होता है,मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उतरायण में होते है और आगे 06 महिना तक सूर्य उतरायण ही रहेंगे मान्यता यह है जब सूर्य उतरायण होते है इस दिन से राक्षस का रात्रि आरंभ होता है और देवताओं का दिन की शुरुआत माना जाता है।
मकर संक्रांति के दिन दान क्या करें
मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से ग्रह दोष दूर होते है इस दिन कम्बल,तिल,काला उडद,गुड का दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होता है।
मकर संक्रांति को लेकर धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं
भगवान सूर्यदेव इस दिन अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर गए थे,जिससे पिता-पुत्र के संबंध का महत्व दर्शाया गया
महाभारत के भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने के समय शरीर त्यागा,क्योंकि यह समय मोक्ष के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। गंगा नदी इसी दिन सागर में समाहित हुई थीं,जिससे गंगा स्नान का महत्व बढ़ गया। मकर संक्रांति को भारत के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
उत्तर भारत: गंगा स्नान,खिचड़ी दान और पतंगबाजी
महाराष्ट्र: तिल-गुड़ बांटने और मीठे बोलने की परंपरा
पश्चिम बंगाल: गंगा सागर मेला का आयोजन
तमिलनाडु: पोंगल उत्सव, जो चार दिनों तक चलता है।
मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह धर्म, विज्ञान और समाज का संगम है। खिचड़ी और दान की परंपराएं न केवल हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण को संतुलित करती हैं, बल्कि समाज में सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी देती हैं।
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ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल पारीक।
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
9461110599 श्रीडूंगरगढ़



















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