सवांददाता ब्युरो चीफ रमाकान्त झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
प्रयागराज के पवित्र प्रांगण में,त्रिवेणी संगम के किनारे महाकुंभ के अवसर पर सर्वेश्वर नगर में श्री हरि प्रसाद जांगिड़ के अर्थ सौजन्य से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन की कथा में संत श्रीराधा मोहन शरणजी महाराज ने कहा कि संसार का हरेक जीव प्रारब्धवश जन्म लेता है। किंतु भगवान का अवतरण प्रारब्ध से नहीं होता,वे साधुओं के परित्राणार्थ अवतरित होते हैं। जिस परमात्मा की भृकुटि टेढी होनेमात्र से संसार में उथल पुथल मच सकती है, वहाँ उनके लिए दुष्टों का संहार कठिन नहीं है। संतों के लिए भगवान को लीला करनी पड़ती है। उन्हें इस मिथ्या कहे जाने वाले संसार में आना पड़ता है। इस स्वप्नवत संसार में भगवान हमारे कल्याण के लिए उपस्थित होते हैं।महाराज ने कहा कि राम और कृष्ण दोनों ही जन्मों में भगवान चतुर्भुज रूप में आए, पर चार हाथ वाले के साथ कौन खेले, अतः उन्हें लीला वपु धारण करना पड़ा। जांगिड़ परिवार की ओर से आज गिरिराज जी को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया गया पौष पूर्णिमा के दिन यहाँ संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रातःकाल से सायंकाल तक बढ़ती ही गई। कुंभ क्षेत्र के प्रमुख रास्तों पर पुलिस ने टैक्सी, बसों का आवागमन दो दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। प्रयागराज में सभी घाटों पर सुबह से शाम भारी भीड़ के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मंगलवार को संगम के प्रमुख घाटों पर विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत शाही स्नान करेंगे, संतों की टोलियों को देखने के लिए उत्साही जनों के जत्थे सड़क किनारों से उन्हें देखेंगे। सामान्यजन को स्नान करने की इजाजत साधु संतों के बाद ही रहेगी। एक बड़े अनुमान के अनुसार आज संगम क्षेत्र में पचास लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति आंकी गई है। हजारों साधु शिविरों में जहां भी लोगों को जगह मिली,वहां रुक गए।



















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