० बरेली में दौड़ रही बिना परमिट और बिना टिकट प्राइवेट बसें ०
बरेली में अनेक रूट पर प्राइवेट बसें बगैर परमिट के ही दौड़ रही है,
अलग-अलग रूट पर चल रही निजी बसों में यात्रियों को टिकट तक नहीं दिए जाने से परिवहन विभाग को लाखो का चूना लग रहा है
आरटीओ अधिकारियों और रोडवेज अफसरों की साठगांठ के यह खेल से लंबे समय से चल रहा है l
इससे जहां एक तरफ़ सरकारी राजस्व का तो नुकसान हो ही रहा है, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों को भी’ जोखिम उठाना पड़ रहा किला से शाही शीशगढ़ के बीच तमाम निजी बसें बगैर परमिट के दौड़ रही हैं। यही हाल कई और रूट पर है।इन निजी बसों में यात्रियों को टिकट के नाम पर सिर्फ एक पर्ची दी जा रही है जिस पर न बस का नंबर होता है न ही किराए की धनराशि।किला से शीशगढ़ चलने वाली बस में दिए जा रहे टिकट पर रूट के आगे सिर्फ किराया लिखा होता है। सेटेलाइट के पास दूसरा कोई विवरण टिकट पर नहीं होता। इसी तरह सेटेलाइट अड्डे के आगे से बीसलपुर जाने वाली बसों में भी बरेली से बीसलपुर का ही टिकट दिया जा रहा है। रास्ते में उतरने वाले यात्रियों को कोई टिकट नहीं दिया जाता है। बस नंबर, यात्रा का शुरू और अंत और यात्री जैसा विवरण टिकट पर नहीं होता। बीसलपुर रूट का टिकट ।बता दें कि किला से शाही, शीशगढ़, दुनका, फतेहगंज, फिरोजाबाद और सेटेलाइट से भुता और बीसलपुर के लिए निजी बसों को चलाया जा रहा है। इन बसों में वैध टिकट न दिए जाने से यात्रा के दौरान किसी तरह की असुविधा होने पर यात्री किसी से संपर्क या शिकायत भी नहीं कर सकता। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन बसों के संचालन में परिवहन विभाग और रोडवेज के साथ ट्रैफिक पुलिस के कुछ लोगों की भी मिलीभगत बताई जाती है। निजी बस का किराया रोडवेज से कम होता है, इसलिए भी ये निजी बसें रोडवेज बस की सवारियां भी ले जाते हैं।

















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