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बीकानेर-लखासर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा की हुई विधिवत पूर्णाहुति, “स्थिति चाहे जो भी हो रिश्तों को निभाने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए”- बाल संत शंकरदास महाराज ,दानदाताओ ने बढ़-चढ़ की घोषणा देखे फ़ोटो सहित पूरी खबर

सवांददाता ब्युरो चीफ रमाकांत झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

लखासर-दुलचासर सड़क मार्ग पर स्थित बाबा रामदेव गौशाला में श्रीराम राज्याभिषेक के बाद नौ दिनों से चल रहे संगीतमय श्रीराम कथा की विधिवत पूर्णाहुति हुई। व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक बाल संत शंकरदास महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि प्रभु श्रीराम प्रत्येक लीला में धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में संयम हो, सदाचार हो और मर्यादा का पालन हो,तो जीवन संवरता है। मानव का जीवन शास्त्र मर्यादा के अनुसार होना चाहिए। भगवान श्रीराम का अवतरण भारत भूमि पर अधर्म का नाश और धर्म का स्थापना करने के लिए हुआ था। प्रभु श्रीराम सभी सद्गुणों के भंडार हैं, श्रीराम की मातृभक्ति, पितृ भक्ति, भातृ प्रेम,प्रजा से स्नेह,रामजी की मधुर वाणी रामजी का सदाचार, यह सभी दिव्य गुण प्रभु श्रीराम में समावेश हैं। हर मनुष्य को भगवान श्रीराम की लीला और मर्यादा का पालन करना चाहिए, जो भवसागर से तारने वाला है। उन्होंने कहा कि भगवान राम सिखाते हैं कि स्थिति चाहे जो भी हो रिश्तों को निभाने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। आज के वक्त में रिश्तों की न तो कोई मर्यादा रही है और न ही उनमें मान रखने की भावना रही है और अपना ही अपनों का शत्रु बन बैठा है,लेकिन श्रीराम जी ने अपने जीवन में सिखाया कि कैसे न सिर्फ रिश्तों बल्कि शत्रु तक का मान रखना चाहिए। पौराणिक कथाओं में एक प्रसंग मिलता है कि जब रावण मृत्यु शैय्या पर था, तब राम जी अपने अनुज लक्ष्मण से कहते हैं कि वह जाएं और रावण से कुछ ज्ञान लें. तब रावण ने तीन सीख दी थीं कि शुभ कार्यों में विलंब नहीं करना चाहिए, अशुभ कार्यों को टालने के प्रयास करने चाहिए और अहम में इतने अंधे नहीं होना चाहिए कि शत्रु को आप कम आंकने लगे। इस तरह से प्रभु राम ने शत्रु का मान रखना भी सिखाया। कथा के नौवें एवं कथा विराम दिवस पर सामूहिक हवन का आयोजन हुआ। इसके पश्चात शोभायात्रा निकाली गई।

इन्होंने संभालीं व्यवस्थाएं

गौशाला कमेटी के सूरजमाल सिंह नीमराना, प्रेम सिंह घूमानदा ,चांद वीर सिंह नीमराना , विजय सिंह राव साहब, नाथू सिंह, तंवर भेरू सिंह, हनुमान जांगिड़ संमनदसर, भंवराराम खिलेरी, मोहन सिंह देवड़ा, गिरधारी सिंह बीका, डूंगरमल प्रजापत कैलाशपुरी श्री राम खिलेरी,गोवर्धन जी पुजारी ,मदन सिंह राठौड़ लखासर, मोहन सिंह देवड़ा, सांवरमल नाई, जितेंद्र सिंह खिलेरी, सुखराम खिलेरी गोशाला कमेटी एवं ग्राम वासियों ने व्यवस्था संभाली।  वही अनेक कार्यकर्ताओं ने सेवाएं दी।

गौ माता की सेवा के लिए आगे आए दानदाता

कथा के अंतिम दानदाताओं ने बढ़ चढ़कर गौ सेवा में सहयोग किया। सत्यनारायण राठी बीकानेर ने 5 लाख राशि से टीन शेड बनाने की घोषणा की लखासर बाबा रामदेव गौशाला के आधार स्तंभ रहे। भामाशाह भूमि दानदाता पूर्व सरपंच स्वर्गीय दाता धनेसिंह तंवर की धर्मपत्नी श्रीमति समंद कंवर ने 21 फिट चाटा (जल) खेली निर्माण करवाने,वही लखासर ग्राम की श्रीमति सज्जन कंवर धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीलाल सिंह तंवर ने 10 पैराशूट कमांडो के द्वारा 21 फिट चाटा खेली निर्माण करवाने,सांवरमल नाई भोपा लखासर के द्वारा 11 फिट चाटा खेली,श्री शंकरलाल नाई लखासर के द्वारा 11 फिट चाटा खेली बनवाने की घोषणा की गई 51000 रुपये मनोहर सिंह जोधा जालनीयासर अरविंद रोड करियर,21000 रुपये राधा कृष्ण सोमानी श्रीडूंगरगढ़ 11000 राजारामजी धारनिया सांवतसर 11000 श्यामसुंदर नांगल सुथार दुलचासर हाल चेन्नई,11000 वासुदेव गौशाला ऊपनी ने बढ़चढ़ दानदाताओं ने सहयोग दिया। कथा के दौरान
मंच का संचालन कोटासर करणी गौशाला के अगरसिंह पड़िहार  ने किया।

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