सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
लखासर-दुलचासर सड़क मार्ग पर स्थित बाबा रामदेव गौशाला में चल रहे संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को सीता-राम विवाह के प्रसंग का वाचन हुआ। कथावाचक बाल संत शंकर दास महाराज ने सीता स्वयंवर और प्रभु श्री राम के धनुष उठाने वाले दृश्य का जीवंत वर्णन कर सभी को भाव विभोर कर दिया। अयोध्या से मिथिला तक बारात की यात्रा और मिथिला में बारात के आतिथ्य सत्कार पर भी कथा में चर्चा हुई। बाल संत शंकर दास महाराज ने कहा कि पूजा में भाव की महत्ता होती है, प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। यदि हम राम को पाना चाहते हैं तो वे हमें अनुराग से प्राप्त होंगे। प्रभु की छवि को ही मन में बसाना होगा। एक बार छवि मन में बस गई तो राम सब जगह दिखेंगे। भगवान भक्तों का सदैव उचित ही करते हैं। राम को यह पता है कि किसे किस वस्तु की आवश्यकता है, उनसे वह मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। लेकिन हमको इस बात पर विश्वास नहीं होता इसलिए हम उनसे उसे मांगने लगते है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कभी कुछ प्राप्त न हो रहा हो तो मांगने की वस्तु बदल कर देखना चाहिए। राम कथा में मनोकामना और पूजा के संबंध के बारे में भी बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग प्रभु की आराधना मनोकामना की प्राप्ति के लिए करते हैं और जैसे ही मनोकामना पूर्ण होती है पूजा बंद कर दी जाती है। कथा के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा में शुक्रवार को गौ सेवा संघ के प्रदेश सदस्य दलित दाधीच, राजलदेसर गौशाला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगतमल पांडे, तुलसी गौशाला बीकानेर के अनूप गहलोत, कितासर गौशाला के मघाराम सुथार, परमार्थ गोशाला श्रीडूंगरगढ़ के सीताराम जोशी, गोपाल गौशाला के संयोजक ताराचंद इंदौरिया पधारे।




















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