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बीकानेर-नेहरू पार्क में आयोजित भागवत कथा का द्वितीय दिवस,नवधा भक्ति आज भी समयानुकूल है–शिवेन्द्रजी महाराज

सवांददाता ब्यूरो चीफ रमाकांत झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

श्रीडूंगरगढ़ कालूबास के श्री मोहनलाल सोनी (माहेश्वरी) परिवार द्वारा नेहरू पार्क में आयोज्य श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस की कथा को सरस राजस्थानी भाषा में सुनाते हुए युवा संन्यासी शिवेन्द्र स्वरूपजी महाराज ने कहा कि सप्त दिवसीय भागवत कथा का मूल सूत्र- आत्म बोध है। श्रोता के भीतर ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और तप का बोध जाग जाए तो कथा का उद्देश्य पूरा हो जाता है। युवा संत ने कहा कि संसर्ग दोष के कारण व्यक्ति अपने स्वरूप को विस्मृत कर गया है। वरना तो वह स्वयं को’अहं ब्रह्मास्मि’ कहने का हकदार है। द्वितीय दिवस के सायंकाल तक भागवत के चार स्कंधों की कथा कहते हुए कपिलोपाख्यान के अन्तर्गत सांख्य दर्शन को बहुत सरल ढंग से समझाते हुए नवधा भक्ति को समयानुकूल और यथेष्ट बताया। श्रवणं, कीर्तनम्, स्मरणं, पादसेवनम्, अर्चनम्, वंदनम्, सख्यम्, दास्यम् और आत्म निवेदनम् की साधना वर्तमान युग में भी भक्ति का सरल और सुगम मार्ग है। कथा के दौरान महाराज ने राजा परीक्षित की कथा के ब्याज से कहा कि परीक्षित को अपने पूर्वजों की प्रशंसा बहुत अधिक सुनने को मिली क्योंकि पांडवों को भगवद् सानिध्य बहुत अधिक प्राप्त हुआ था। वर्तमान युग में हमें भी अपने पूर्वजों का स्मरण रखना चाहिए तथा उनकी कीर्ति में वृद्धि करने वाले कार्य करने चाहिए। कथा संयोजक डॉ० चेतन स्वामी ने बताया कि प्रयागराज में सन् 2025 के महाकुंभ के अवसर पर संत शिवेन्द्र स्वरूपजी के गुणेश्वराश्रम मठ की ओर से 13 जनवरी से 13 फरवरी 2025 तक दण्ड संन्यास दीक्षा समारोह सहित भागवत महापुराण मूल पाठ, विभिन्न प्रकार के हवन, अष्ट श्राद्ध, महा संकल्प, नित्य रुद्राभिषेक, देव पूजन, गायत्री जय, महामृत्युंजय जप जैसे विभिन्न आयोजन एक माह तक चलेंगे। नित्य- प्रति सत्संग, संत महात्माओं के प्रवचन का लाभ प्राप्त होगा।

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