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क्या ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) शिवशंकर यादव और रोजगार सेवक सोनू चौधरी की मिली भगत से हो रहा भ्रष्टाचार

अजीत मिश्रा बस्ती उत्तर प्रदेश

क्या ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) शिवशंकर यादव और रोजगार सेवक सोनू चौधरी की मिली भगत से हो रहा भ्रष्टाचार

ग्राम पंचायत जगतापुर में रोजगार सेवक सोनू चौधरी कैसे फर्जी फोटो लगा के रात में लगाते हैं फर्जी हाजरी

बस्ती–(सल्टौआ) जनसेवक बनकर सरकारी धन का बंदर बांट कैसे किया जाता है अगर आपको भी सीखना है तो आप संपर्क कर सकते हैं! ग्राम पंचायत अधिकारी शिव शंकर यादव और रोजगार सेवक सोनू चौधरी ग्राम सभा जगतपुर से! हम यूं ही नहीं कह रहे कुछ तथ्य और साक्ष्य भी आपको दे रहे हैं जिससे आपको यह महसूस होगा! कि किस तरह से सरकारी धन को आसानी से हड़पा जा सकता है! सोचिए अगर बिना किसी कार्य को कराए हुए आपके पास प्रतिदिन के हिसाब से 12 से 15 हजार रुपए आ जाए वह भी सिर्फ कागजों में फर्जी तरीके से हाजिरी लगाकर! अगर आपको ऐसा कुछ करना है तो आपको मिलना पड़ेगा इन दोनों महानुभावों से! क्योंकि इनको इसका हुनर बख़ूबी पता है! और ना तो उच्चाधिकारियों का थोड़ा सा भी डर है ना ही इन्हें सरकार द्वारा बनाए हुए कानून पर विश्वास! नहीं तो ये लोग इतना बड़ा रिस्क नहीं लेते! अब आप सोचिए ब्लॉक द्वारा कहीं ना कहीं सचिव के ही संतुष्टि पर मनरेगा मजदूरों का डिमांड या यूं कहलें की मास्टर रोल निकला होगा! लेकिन धरातल पर रोजगार सेवक द्वारा या तो सचिव और ब्लॉक के अधिकारियों को अंधेरे में रखकर फर्जी तरीके से मजदूरों की उपस्थित दिखाई जा रही है! या फिर इन लोगों की आपसी रजामंदी से! जो भी हो लेकिन जगतापुर में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा रची जा रही है! क्योंकि ग्राउंड जीरो पर जब मीडिया टीम हकीकत देखने पहुंचा तो पता चला की ग्राउंड पर एक भी मनरेगा मजदूर मौके पर काम करते हुए दिखाई नहीं दिया, ना ही मौके पर कोई कार्य इस तरह का लगा जहां पर प्रतिदिन के हिसाब से 60 से 70 लोग कार्य कर रहे थे, या फिर किए हों! क्योंकि यह एक बड़ा भ्रष्टाचार का मुद्दा था और किसी ने हमारे आने की सूचना रोजगार सेवक को पहले ही दे दिया था! मौके पर रोजगार सेवक सोनू चौधरी भी पहुंच गए और उन्होंने खुद ही बताया की दोनों ही साइडों पर कोई भी मनरेगा मजदूर कार्य नहीं कर रहे हैं! लेकिन कागजों में दिहाड़ी चल रही है! यह केवल मेरे यहां ही नहीं अन्य जगहों पर भी ऐसा चल रहा है! क्योंकि मामला सचिव के संज्ञान में आना चाहिए था! यह पता करने के लिए जब उनको फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि डिमांड किया गया था अगर फर्जी तरीके से रोजगार सेवक द्वारा हाजिरी लगाई जा रही है! तो रोजगार सेवक को नोटिस जारी की जाएगी, और पूरा मास्टर रोल जीरो किया जाएगा! सचिव की अगर मगर की बातों से, सवाल उठना तो लाजिमी ही है! कि अगर सचिव को यही नहीं पता होगा की साइटों पर वाकई में मजदूर ग्राउंड जीरो पर कार्य कर भी रहे हैं या नहीं तो यह तो अपने आप में ही बड़ा भ्रष्टाचार को करने की खुली छूट देने जैसा कार्य है! क्या जिम्मेदार अधिकारी ऐसे लोगों के ऊपर कोई कड़ी कार्यवाही करेंगे! या फिर मिलजुल बाटकर खाएंगे वाली कहावत सही साबित होगी!

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