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बहराइच : कैसरगंज क्षेत्रवासियो की दुर्दशा को बयां करता रसूलपुर घाट का टूटा हुआ पुल।

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• कैसरगंज क्षेत्रवासियो की दुर्दशा को बयां करता रसूलपुर घाट का टूटा हुआ पुल।

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संवाददाता पंकज कुमार शुक्ला बहराइच , उत्तर प्रदेश

कैसरगंज क्षेत्रवासियो की दुर्दशा को बयां करने के लिए वर्षों से टूटा पड़ा रसूलपुर घाट का पुल अभी तक बनकर नहीं तैयार हुआ है। जिसके चलते 14 गांवों के लोगों का जुड़ाव तहसील मुख्यालय से टूटा हुआ है। यहाँ विकास की रोशनी वादों के धुंधलके मे अटकी है। समस्याएँ सुरसा की तरह मुँह फैलाए खड़ी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

कैसरगंज लोक सभा क्षेत्र दिग्गजों का कार्य क्षेत्र रहा है, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को आज भी नाव का सफर तय करके मुख्य मार्ग पर पहुँचना पड़ रहा है। हम बात कर रहे है विकास खंड कैसरगंज के ग्राम कहरई के रसूलपुर घाट की। यहाँ एक दशक  पूर्व एक पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन पुल बनने कुछ ही वर्ष बाद यह पुल टूट कर गिर गया था। जिससे एक दर्जन से अधिक गाँवों का सम्पर्क तहसील मुख्यालय से टूट गया तथा बीस हजार से अधिक की आबादी प्रभावित है। लोग कई किलोमीटर का चक्कर काटकर तहसील मुख्यालय पहुँच पा रहे है। कुछ लोग जान पर खेल कर नाव के सहारे पुल पार कर कैसरगंज पहुँच रहे है।इस पुल के टूटने की वजह से एक दर्जन गाँव के हजारों लोग प्रभावित हो रहे है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। यहां के नागरिकों ने उपजिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक तथा सांसद से लेकर विधायक तक सभी को इस विकट समस्या से अवगत कराया लेकिन किसी ने पुल निर्माण के किसी भी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नही दिया जबकि इस घाट में कई लोग डूब कर अपनी जान भी गँवा चुके है। ग्रामीणों ने बताया कि सोतिया नाले पर बना यह पुल विगत आठ वर्ष पूर्व अचानक ढह गया था। तबसे आज तक इस पुल का कोई पुरसा हाल नहीं था।पिछले साल से इस पुल का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से कराया जा रहा है। जिसके कुछ महीनों मे पूरा होने की आस जगी है, अब 20 मई को लोक सभा चुनाव  के लिए मतदान होना है। ऐसे मे रसूलपुर घाट का टूटा पुल इस चुनाव मे महत्वपूर्ण मुद्दा है। पुल के टूट जाने की वजह से रसूलपुर, बसहिया, हैदर बसहिया, चंदीपुरा, सांथा, आदि गाँवो के लोगों को कैसरगंज पहुंचने के लिए बरसात के दिनो मे नावों का सहारा लेना पड़ता है।

ग्राम प्रधान और ग्रामीण बोले निर्माण जरूरी विकास खंड कहरई के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुरेश यादव का कहना है कि रसूलपुर घाट का पुल विगत आठ वर्षों से टूटा पड़ा था लेकिन कोई सुधि लेने वाला नही है। ग्रामीण नाव के सहारे मुख्य मार्ग तक किसी तरह पहुँच पाते थे। तमाम कोशिशों के बावजूद पुल का निर्माण शुरू नही हो पाया। ग्राम वैरी महेशपुर निवासी अजय श्रीवास्तव का  कहना है कि पुल टूट जाने की वजह से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम कहरई निवासी पुत्तीलाल यादव का कहना है कि इस पुल का निर्माण कराया जाना बेहद आवश्यक है।

ग्राम कहरई निवासी सिराज अहमद का कहना है कि पुल का निर्माण न होने से लोगों को बेहद परेशानी हो रही है। अरशद रईस  का कहना है कि इस पुल का निर्माण न होने से विकास के क्षेत्र मे यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। इसको शीघ्र पूरा कराया जाना नितांत नितान्त आवश्यक है। ग्राम पचम्भा  निवासी मौलाना खालिद का कहना है कि यह पुल वर्षों से टूटा हुआ है। लेकिन कोई सुधि लेने वाला नही है। जिससे आवागमन बेहद प्रभावित है। अब कुछ माह से पीडब्लूडी की ओर से लगभग तीन करोड की लागत से पुल का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन कब पूरा होगा पता नही है।

जून के अंत तक निर्माण की उम्मीद लोक निर्माण विभाग की ओर से लगभग तीन करोड़ की लागत से बनाए जा रहे इस पुल के निर्माण के संबंध में जब  साइड इंचार्ज शेष कुमार यादव से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह पल जून के आखिरी तक बनकर तैयार हो जाएगा और आवागमन भी शुरू हो जाएगा पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है कुछ ही काम शेष रह गया है।

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