संवाददाता सुधीर गोखले
राज्य में एसटी के २१ विभाग घाटे में चल रहे हैं, इसलिए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने अधिकारियों को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। यदि आय में वृद्धि नहीं होती है, तो अधिकारी का तबादला कर दिया जाएगा या उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने एस टी विभाग की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और आय बढ़ाने में विफल रहे अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने निगम के दोषी और लापरवाह अधिकारियों को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। मंत्री ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि अगले महीने तक एस टी कि आय बढ़ाने के ठोस परिणाम नहीं दिखे, तो संबंधित अधिकारियों का सीधा तबादला, पदावनति या निलंबन किया जाएगा। महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आम आदमी के लिए एस.टी एक जीवन रेखा है। इसलिए, मंत्री प्रताप सरनाइक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधिकारी केवल दफ्तर में न बैठें, बल्कि पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करें। मंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि केवल बैठकें करना और कागजी योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम करना और निगम की आय में वृद्धि देखना भी आवश्यक है। इस साल अप्रैल-मई के मुख्य गर्मी के मौसम में किराया बढ़ाया गया। आम तौर पर इस दौरान एस.टी को अच्छा मुनाफा होता है, लेकिन इस साल किराया बढ़ने के बावजूद मंत्री प्रताप सरनाइक ने एसटी की आय में भारी गिरावट पर गहरी नाराजगी जताई है। राज्य के कुल 31 एसटी डिवीजनों में से 21 डिवीजन फिलहाल भारी घाटे में चल रहे हैं। चूंकि परिवहन निगम को व्यस्त मौसम में भी घाटा उठाना पड़ रहा है, इसलिए एसटी प्रबंधन की कार्यकुशलता और योजना पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। एसटी कॉर्पोरेशन को घाटे से बाहर निकालने के लिए, प्रत्येक डिपो, डिवीजन, क्षेत्रीय कार्यालय और मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रदर्शन का स्वतंत्र और गहन मूल्यांकन किया जाएगा। आय में गिरावट और यात्रियों की संख्या में कमी के कारणों का पता लगाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस एक महीने की अवधि के बाद, सभी अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और अक्षम अधिकारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवहन मंत्री ने न केवल कार्रवाई की चेतावनी दी है, बल्कि एसटी बसों के रूटों की उचित योजना बनाने, ट्रेनों को समय पर चलाने और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि एसटी निजी वाहनों की प्रतिस्पर्धा में पीछे न रह जाए। मंत्री के इस आक्रामक रुख ने अब एसटी निगम के वरिष्ठ अधिकारियों में हलचल मचा दी है और डिपो प्रबंधकों तथा प्रशासन को अगले महीने एसटी की आय बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।





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